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शरीफ परिवार की सजा के खिलाफ दायर याचिका को लाहौर हाई कोर्ट ने मंजूरी दी

पूर्व प्रधानमंत्री के वकील डोगर ने एवनफील्ड मामले में पिछले महीने शरीफ परिवार को जवाबदेही अदालत द्वारा सुनाई गई सजा रद्द करने की मांग की है

Bhasha Updated On: Aug 04, 2018 08:53 PM IST

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शरीफ परिवार की सजा के खिलाफ दायर याचिका को लाहौर हाई कोर्ट ने मंजूरी दी

लाहौर हाई कोर्ट ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनकी बेटी मरियम और दामाद मोहम्मद सफदर को एवनफील्ड संपत्ति भ्रष्टाचार मामले में मिली कैद की सजा के खिलाफ दायर याचिका मंजूर कर ली. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मुहम्मद यावर अली ने वकील ए.के डोगर की याचिका पर सुनवाई के लिए एक पूर्ण पीठ का गठन किया. डोगर नवाज शरीफ के वकील होने के साथ ही मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के भी वकील हैं.

डोगर ने एवनफील्ड मामले में पिछले महीने शरीफ परिवार को जवाबदेही अदालत द्वारा सुनाई गई सजा रद्द करने की मांग की है. जस्टिस अली ने जस्टिस शम्स महमूद मिर्जा, जस्टिस साजिद महमूद सेठी और जस्टिस मुजाहिद मुस्तकीम की तीन सदस्यीय पीठ गठित की जो आठ अगस्त को डोगर की याचिका पर सुनवाई करेगी.

इस्लामाबाद की जवाबदेही अदालत ने विदेश में उनके परिवार द्वारा संपत्तियों की खरीद से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर छह जुलाई को शरीफ, मरियम और सफदर को सजा सुनाई थी. शरीफ पर एक करोड़ पांच लाख डॉलर और उनकी बेटी मरियम पर 26 लाख डॉलर का जुर्माना लगाया था. यह तीनों रावलपिंडी की अडियाला जेल में सजा काट रहे हैं.

जिन कानूनों का वजूद नहीं उनके तहत मिली शरीफ को सजा

डोगर ने अपनी याचिका में कहा कि जवाबदेही अदालत ने शरीफ परिवार के सदस्यों को राष्ट्रीय जवाबदेही अध्यादेश 1999 के तहत सजा सुनाई है. जोकि अवैध है. उन्होंने हाई कोर्ट से जवाबदेही अदालत के फैसले को निलंबित करने की मांग करते हुए कहा, ‘सैन्य तानाशाह पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने अस्थाई संवैधानिक आदेश (पीसीओ) के तहत अध्यादेश लागू किया था. शरीफ परिवार के सदस्यों और अन्य की इस अध्यादेश के तहत दोषसिद्धि अवैध है. 18वें संशोधन के तहत इस कानून का अब कोई अस्तित्व नहीं है. एक ऐसे कानून के तहत शरीफ परिवार के सदस्यों को सजा दी गई जिसका वजूद नहीं है.’

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