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इवांका ने कहा- मीडिया लोगों की दुश्मन नहीं, ट्रंप ने जोड़ी अपनी 'सफाई'

राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ट्रंप लगातार मीडिया की आलोचना करते रहे हैं

Bhasha Updated On: Aug 04, 2018 05:54 PM IST

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इवांका ने कहा- मीडिया लोगों की दुश्मन नहीं, ट्रंप ने जोड़ी अपनी 'सफाई'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि पूरी मीडिया नहीं बल्कि ‘फर्जी खबरें’ लोगों का दुश्मन हैं और मीडिया का बड़ा हिस्सा फर्जी खबरें दिखाता है. राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ट्रंप लगातार मीडिया की आलोचना करते रहे हैं.

गौरतलब है कि ट्रंप की ये टिप्पणी उसके बाद आई, जब उनकी बेटी और वाइट हाउस एडवाइजर इवांका ट्रंप ने कहा था, ‘मैं नहीं मानती कि मीडिया लोगों का दुश्मन है.’

एक कार्यक्रम के दौरान शुक्रवार को इवांका से पूछा गया था कि वह अपने पिता की ओर से ‘मीडिया को बार-बार लोगों का दुश्मन बताए जाने पर क्या सोचती हैं? उन्होंने कहा था, ‘नहीं. मुझे नहीं लगता कि मीडिया लोगों का दुश्मन है.'

इवांका ने कहा था, 'मेरे बारे में काफी कुछ लिखा गया है, और मैं जानती हूं कि उसमें सबकुछ सच नहीं है. ऐसे में मुझे समझ आता है कि लोग परेशान क्यों होते हैं और वो ऐसा क्यों समझते हैं कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.' इस टिप्पणी के बाद माना जा रहा था कि इस संबंध में बाप-बेटी की सोच अलग-अलग हैं.

हालांकि, कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने ट्वीट कर इसे साफ किया. राष्ट्रपति ने ट्वीट किया है, ‘उन्होंने मेरी बेटी इवांका से पूछा कि मीडिया लोगों का दुश्मन है या नहीं. उसने बिलकुल सही कहा नहीं. फर्जी खबरें लोगों का दुश्मन हैं जो मीडिया के बड़े हिस्से द्वारा दिखाई जाती हैं.’

वहीं जब वाइट हाउस के प्रेस कॉन्फ्रेंस में डोनाल्ड-इवांका के बयानों के संबंध में सवाल किया गया तो प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने राष्ट्रपति के बयान को खारिज करने से इनकार कर दिया.

सैंडर्स ने कहा, 'राष्ट्रपति का गुस्सा एकदम सही है. अर्थव्यवस्था फल-फूल रही है, आईएसआईएस अपनी जान बचाकर भाग रही है, अमेरिकी नेतृत्व को पूरी दुनिया मान रही है, इसके बावजूद उनके बारे में 90 प्रतिशत खबरें नकारात्मक आती हैं.'

वहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की वकालत करने वाली संस्थाओं ने ट्रंप की ओर से मीडिया की आलोचना किए जाने की निंदा की है.

इंटर-अमेरिकन कमीशन ऑन ह्यूमन राइट्स के एडिसन लांजा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत डेविड काए का कहना है कि ये हमले रणनीतिक हैं, जिनका लक्ष्य रिपोर्टिंग के प्रति आम लोगों के विश्वास को कम करना और पुष्ट तथ्यों पर भी शंका पैदा करना है.

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