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नवाज शरीफ का पाकिस्तान लौटना बलिदान है या चुनावी स्टंट!

अगर नवाज शरीफ की पार्टी को चुनाव में कुछ खास हासिल नहीं होता है तो चुनाव के बाद वो लंदन लौटते सकते हैं . संभावनाएं तो यह भी जताई जा रही हैं कि उसके बाद फिर वो कभी पाकिस्तान नहीं लौटेंगे.

Updated On: Jul 14, 2018 06:36 PM IST

FP Staff

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नवाज शरीफ का पाकिस्तान लौटना बलिदान है या चुनावी स्टंट!

नवाज शरीफ पाकिस्तान के अकेले ऐसे नेता हैं जिन्होंने रिकॉर्ड तीन बार प्रधानमंत्री का पद संभाला है. जब कोर्ट ने शरीफ और उनकी बेटी मरियम के लिए सजा का ऐलान किया, उस वक्त ये दोनों लंदन में थे. ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है. ऐसे में नवाज़ शरीफ चाहते तो वो बड़े आराम से इंग्लैंड में रह सकते थे. लेकिन उन्होंने कैंसर से जूझ रही अपनी पत्नी को छोड़ दिया और पाकिस्तान पहुंच गए. और वो भी अकेले नहीं, बल्कि अपनी बेटी के साथ. ये जानते हुए भी कि उन्हें पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया जाएगा और 10 साल की सजा भुगतनी पड़ सकती है.

आखिर शरीफ ने ऐसा क्यों किया? क्या इसके पीछे देश के लिए बलिदान जैसा मकसद है या फिर एक मंझे हुए राजनेता की चतुर रणनीति? आइए जानते हैं उनके इस कदम के पीछे के कारण- 

1. 68 साल के नवाज़ शरीफ राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी हैं. शरीफ बार-बार पाकिस्तान के लोगों को ये बताने की कोशिश कर रहे हैं कि वो देश के लिए बलिदान देने के लिए तैयार है. उनकी पत्नी लंदन में कैंसर के चलते जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है. ऐसे में वो लोगों को ये साबित करने में जुटे हैं कि उन्हें परिवार से ज्यादा चिंता अपने आवाम की है. इसका फायदा उन्हें चुनाव में मिल सकता है. पाकिस्तान रवाना होने से पहले उन्होंने खुद कहा कि वो देश के लिए कुर्बानी देना चाहते हैं. वीडियो मैसेज में शरीफ ने कहा, 'मैं पाकिस्तान की आने वाली पीढ़ी के लिए कुर्बानी दे रहा हूं. वो कदम से कदम मिलाकर और हाथ में हाथ डालकर चलें और मुल्क की तकदीर बदलें. ये मौके बार-बार नहीं आएंगे.'

2. पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव है. कहा जा रहा है कि इस बार नवाज़ शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुसलिम लीग (PMLN) की हालत बेहद खस्ता है. शरीफ पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पार्टी की कमर टूट गई है. कोई भी PMLN की जीत पर दांव लगाने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में नवाज़ शरीफ ने पाकिस्तान लौटकर अपने कार्यकर्ताओं में जोश ला दिया है. कुछ लोग तो ये भी कह रहे हैं कि शरीफ के आने से पाकिस्तान में चुनावी नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं. पंजाब प्रांत में शरीफ खासे लोकप्रिय हैं. ये वो इलाका है, जो चुनाव के नतीजे तय कर सकता है.

3. शरीफ ने पाकिस्तान पहुंच कर क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. पीएम की रेस में सबसे आगे चल रहे इमरान खान को भी शरीफ ने बड़ा झटका दिया है. अगर इमरान खान प्रधानमंत्री बन जाते हैं तो फिर नवाज़ शरीफ और उनके परिवार के लिए हालात और भी खराब हो जाएंगे. ऐसे में शरीफ ने खुद को बचाने के लिए पाकिस्तान पहुंच कर बड़ा दांव खेला है. इमरान खान अगर पीएम नहीं बन सके तो फिर शरीफ और उनके परिवार के लिए हालात थोड़े बेहतर हो सकते हैं.

4. पाकिस्तान के आम चुनाव के बारे में किए गए एक सर्वे के मुताबिक इस बार फिर वहां त्रिशंकु संसद बनने की संभावना है. पीएमएल-एन और पीटीआई के बीच कांटे की टक्कर है, लेकिन किसी पार्टी को स्पष्ट जीत मिलती नजर नहीं आ रही है. ऐसे में अगर चुनाव के बाद जोड़-तोड़ के हालात सामने आते हैं और नवाज़ शरीफ की पार्टी सरकार बनाने में कामयाब रही या फिर उनकी पार्टी ने किसी को समर्थन दिया तो चीजें बदल सकती हैं. शरीफ को खुद को बेगुनाह साबित करने का एक अच्छा मौका मिल सकता है.

5. नवाज़ शरीफ की बेटी मरियम शरीफ ने देश लौट कर ये साबित करने की कोशिश की है कि वो ही एकमात्र नेता हैं जो वहां की सेना के खिलाफ आवाज़ उठा सकती है.

6. पाकिस्तान में कानून के जानकार ये भी कह रहे हैं कि नवाज़ शरीफ को हर हाल में नेशनल एकॉन्टब्लिटी ब्यूरो (NAB) के सामने सरेंडर करना था. जहां वो सजा के खिलाफ अपील कर सकते हैं और साथ ही जमानत के लिए भी अर्जी दे सकते हैं. ऐसे में नवाज़ शरीफ के पास पाकिस्तान लौटने के अलावा कोई और चारा नहीं था.

7. वापसी से पहले नवाज ने मीडिया को बताया कि वो अपनी पत्नी बेगम कुलसुम नवाज को अल्लाह के भरोसे छोड़कर पाकिस्तान जा रहे हैं. बेगम कुलसुम नवाज़ को कैंसर है. वो इतनी बीमार हैं कि पिछले एक महीने में पहली बार उन्होंने आंख खोली. इतना ही नहीं कुलसुम नवाज किसी से बात तक नहीं कर रही हैं. फिलहाल वह वेंटिलेटर पर हैं. ऐसे में ये भी कहा जा रहा है कि शरीफ को अपनी बेगम से मिलने का परमिशन मिल सकता है. ऐसे में अगर उनकी पार्टी को चुनाव में कुछ खास हासिल नहीं होता है तो चुनाव के बाद वो लंदन लौटते सकते हैं और संभावनाएं यह भी हैं कि फिर वो दोबारा पाकिस्तान नहीं  लौटें.

(न्यूज 18 के लिए मनीष कुमार का लेख)

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