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आंकड़े बोलते हैं, अमेरिकी नागरिकता लेने में भारतीय दूसरे नंबर पर

अमेरिका में साल 2016 में 46,100 भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता दी गई है. भारत अमेरिकी नागरिकता हासिल करने में दूसरे नंबर पर है

Updated On: Dec 01, 2017 11:54 AM IST

FP Staff

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आंकड़े बोलते हैं, अमेरिकी नागरिकता लेने में भारतीय दूसरे नंबर पर

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने के बाद से ही वहां रह रहे एनआरआई, शरणार्थियों या अमेरिकी नागरिक बन चुके भारतीय, मेक्सिकन या अन्य किसी दूसरे देश के लोगों को लेकर बहसें तेज हुई हैं. वहीं अमेरिका ने वीजा के नियम भी कड़े किए हैं. लेकिन इस बीच एक रिपोर्ट आई है, जो इन बहसों को दरकिनार कर सकती है. अमेरिका में साल 2016 में 46,100 भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता दी गई है.

भारत अमेरिकी नागरिकता हासिल करने में दूसरे नंबर पर है. साल 2016 में अमेरिका ने जितने लोगों को नागरिकता दी है, उसमें 6 फीसदी भारतीय हैं. मेक्सिको अभी भी पहले नंबर पर बना हुआ है. वैसे मेक्सिकन नागरिकों की संख्या कम जरूर हुई है.

अमेरिका के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की ओर से जारी रिपोर्ट में ये आंकडे़ं सामने आए हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अब तक उसने कितने लोगों को नागरिकता दी है. इस डेटा के मुताबिक, 1 अक्टूबर, 2015 से 30 सितंबर 2016 के दौरान कुल 46,100 भारतीयों ने अमेरिका की नागरिकता ली है. वहीं, मेक्सिको से कुल 7.53 लाख लोगों को अमेरिका की नागरिकता मिली है.

इस वित्त वर्ष में करीब 9.72 लाख लोगों ने अमेरिकी नागरिकता हासिल करने के लिए आवेदन किया था. पिछले साल की तुलना में यह 24 फीसदी ज्यादा है.

हैरानी की बात है कि अमेरिका ने अपने वीजा नियमों को और कड़े किए हैं, फिर भी यहां की नागरिकता लेने वालों की संख्या में उछाल आया है. आमतौर पर यहां ग्रीन कार्ड हासिल कर चुके दूसरे देशों के नागरिक ही नागरिकता लेने के लिए आवदेन करते हैं. किसी भी देश के ग्रीनकार्ड होल्डर अमेरिका में रहकर लंबे समय तक काम कर सकते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका की नौकरियां दूसरे देशों से वापस लाने के जिस वादे पर सत्ता में आए थे, उसी मोटो के साथ वो अभी भी काम कर रहे हैं. वो नौकरी देने में अमेरिकी लोगों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं. फिर भी ग्रीन कार्ड ले चुके दूसरे देशों के नागरिक यहीं की नागरिकता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

नॉन-प्रॉफिट संगठन एशियन अमेरिकन्स एडवासिंग जस्टिस के अध्यक्ष जॉन सी यांग के मुताबिक, 'भारतीय यहां की नागरिकता की कीमत को सबसे ज्यादा समझते हैं. यहां की नागरिकता पाने के बाद इन लोगों को सुरक्षा के कुछ अधिकार मिलते हैं. उन्हें वोट देने का अधिकार भी मिलता है. यही वजह है कि भारतीय अच्छे मौके, ज्यादा कमाई और तरक्की के लिए यहां बसना चाहते हैं.'

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