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भारत-रूस S-400 डील पर पाक मीडिया में चर्चा, अब कैसे करेंगे मुकाबला?

भारत को युद्धोन्माद का शिकार बताते हुए पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में रूस को भी खूब कोसा जा रहा है

Updated On: Oct 08, 2018 10:48 AM IST

Seema Tanwar

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भारत-रूस S-400 डील पर पाक मीडिया में चर्चा, अब कैसे करेंगे मुकाबला?

भारत और रूस के बीच 5 अरब डॉलर के रक्षा समझौतों पर पाकिस्तानी उर्दू मीडिया छाती पीट रहा है. पाकिस्तानी अखबार इसे अपने देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती मान रहे हैं, लेकिन इस बात का अहसास भी उन्हें है कि पाकिस्तान कर भी क्या सकता है क्योंकि उसका खजाना खाली है. मजेदार बात यह है कि पाकिस्तानी उर्दू अखबारों को सिर्फ पाकिस्तान की नहीं, बल्कि चीन की सुरक्षा की चिंता भी हो रही है.

भारत को युद्धोन्माद का शिकार बताते हुए पाकिस्तानी उर्दू मीडिया में रूस को भी खूब कोसा जा रहा है. कुछ अखबारों का कहना है कि पाकिस्तान और रूस के रिश्ते हाल में कुछ सुधरे थे, लेकिन भारत के साथ उसकी हालिया डील से अविश्वास बढ़ेगा.

पाकिस्तान की बिन मांगी नसीहत

दैनिक ‘एक्सप्रेस’ लिखता है कि भारत और रूस के बीच रक्षा, व्यापार और अंतरिक्ष शोध के क्षेत्र से जुड़े समझौतों के अलावा इसी साल सैन्य अभ्यास करने समेत कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी. अखबार ने इस बात पर खासी तवज्जो दी है कि अमेरिका की तरह से प्रतिबंधों की परवाह किए बिना भारत लगभग 400 किलोमीटर तक हवा से हवा में मार करने वाला अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 खरीद रहा है.

जहां कई पाकिस्तानी अखबार एयर डिफेंस सिस्टम मिलने के बाद भारत की बढ़ी ताकत से सहमे दिखते हैं, वहीं ‘एक्सप्रेस’ ने इसे फिजूल खर्ची बताते हुए भारत को बिन मांगी सलाह दी है. अखबार कहता है कि पांच अरब डॉलर का मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदते हुए भारत को अपने उन 27 करोड़ लोगों के बारे में सोचना चाहिए, जो अत्यंत गरीबी में जीने को मजबूर हैं.

रोजनामा दुनिया’ लिखता है कि भारत और रूस के बीच सैन्य समझौता पाकिस्तान को यह याद दिलाने के लिए काफी है कि क्षेत्रीय राजनीति और रणनीति का क्या भविष्य होगा. अखबार ने लिखा है कि भारत को अक्टूबर 2020 में मिसाइल रक्षा प्रणाली मिलनी शुरू हो सकती है, इसलिए पाकिस्तान को इससे पहले इसका तोड़ निकालना होगा. हालांकि अखबार पाकिस्तान के खस्ताहाल आर्थिक हालात का भी जिक्र करता है, लेकिन फिर भी पाकिस्तान के लिए बड़े फैसले करने की जरूरत पर जोर देता है.

अखबार के संपादकीय की आखिरी लाइन है: भारत और रूस के रक्षा समझौते बड़े बदलावों की तरफ इशारा करते हैं लेकिन इन बड़ी तब्दिलियों से अनजान पाकिस्तान को अपने अंदरूनी हालात से ही फुर्सत नहीं, कि वह विदेशी मोर्चे पर ध्यान दें.

New Delhi: Prime Minister Narendra Modi  shakes hands with Russian President Vladimir Putin before their meeting at Hyderabad House, in New Delhi, Friday, Oct 5, 2018. (PTI Photo/Vijay Verma) (PTI10_5_2018_000051B)

पड़ोस में आग के खतरे

रोजनामा जंग’ लिखता है कि पाकिस्तान और रूस के रिश्ते बेहतर हुए हैं लेकिन भारत पर रूस की नवाजिशों ने हालात को फिर से अविश्वास के दलदल में धकेल दिया है.

अखबार ने भारत को चेतावनी देते हुए लिखा है कि आप अपने पड़ोसी नहीं बदल सकते हैं और अगर पड़ोस में आग लगेगी तो आप भी अपने दामन को भी लपटों से नहीं बचा सकते.

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अखबार की राय में, यह हकीकत किससे छिपी है कि अमेरिका भी भारत को अरबों डॉलर के हथियार, युद्धपोत और अत्याधुनिक सैन्य साजो सामान मुहैया कराकर उसके ‘जंगी जूनून में इजाफा’ कर रहा है, जिसका निशाना सिर्फ पाकिस्तान है. अखबार के मुताबिक, इसका अंदाजा भारतीय नेताओं और सेना प्रमुख की धमकियों से बखूबी लगाया जा सकता है.

नवा ए वक्त’ ने भारत के साथ साथ रूस को भी अपने संपादकीय में निशाना बनाया है. अखबार लिखता है कि ‘भारत के युद्धोन्माद’ का तो कोई इलाज नहीं, लेकिन अफसोस उन देशों की कारोबारी सोच पर भी होता है, जो भारत को धड़ाधड़ हथियार बेच रहे हैं. अखबार कहता है कि पाकिस्तान को तो छोड़िए, रूस के चीन से भी करीबी रिश्ते हैं, लेकिन उसने भारत को सबसे खतरनाक अत्याधुनिक हथियार बेचते वक्त इतनी गारंटी भी नहीं ली कि इनका इस्तेमाल चीन के खिलाफ नहीं किया जाएगा.

अखबार लिखता है कि रूस के ताजा कदम से पाकिस्तान की संप्रभुता खतरे में पड़ गई है, इसलिए 'हमें भी अपनी रक्षा क्षमताओं में इस हद तक जाना होगा कि किसी भी आक्रमणकारी को मुहंतोड़ जवाब दे सकें.'

क्रिकेट में भी बेहाल

रोजनामा पाकिस्तान’ ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के हालिया खस्ताहाल प्रदर्शन पर संपादकीय लिखा है: क्रिकेट का इम्तिहान फिर शुरू. अखबार कहता है कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम एशिया कप में अपने बदतरीन प्रदर्शन के बाद अब ऑस्ट्रेलिया के सामने उतरेगी. अखबार के मुताबिक, 'हम तो पहले भी दुआ करते थे और अब भी करेंगे लेकिन एशिया कप में जो कुछ हुआ, उसने बहुत मायूस किया.'

अखबार कहता है कि अफसोस की बात यह है कि तमाम खिलाड़ियों की आलोचना की गई, बॉलिंग और बैटिंग की नाकामी का जिक्र किया गया लेकिन कप्तान सरफराज अहमद को माफ कर दिया गया. अखबार की राय में बाकी खिलाड़ियों के साथ कप्तान सरफराज अहमद का प्रदर्शन भी बड़ा सवालिया निशान बना कि विकेट कीपिंग भी स्तरीय नहीं थी, लेकिन आलोचना करने की बजाय उसकी हिमायत की गई.

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