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डोकलाम विवाद: भारत को मिला जापान का साथ तो चिढ़ गया चीन

जापान ने चीन को धमकाते हुए साफ कह दिया है कि ताकत के बल पर कोई देश जमीन नहीं हथिया सकता

FP Staff Updated On: Aug 18, 2017 04:00 PM IST

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डोकलाम विवाद: भारत को मिला जापान का साथ तो चिढ़ गया चीन

डोकलाम विवाद पर भारत के साथ जापान भी आ गया है. जापान ने  साफ कहा है कि ताकत के बल पर कोई देश जमीन नहीं हथिया सकता. युद्ध उन्मादी चीन को इशारो-इशारों में आगाह करते हुए जापान ने कहा है कि ताकत के जोर पर जमीनी यथास्थिति बदलने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए.

डोकलाम पर बढ़ते तनाव के बीच  जापान लगातार इस मामले में नजदीक से नजर रखे हुए है. जापान ने इस मुद्दे पर भारत के साथ खड़े होते हुए कहा है, 'जहां तक भारत की भूमिका का सवाल है, हम समझते हैं कि भूटान के साथ दि्वपक्षीय समझौते की वजह से भारत ने इस मामले में दखल दिया'.

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने साफ कर दिया कि भारत डिप्लोमैटिक चैनल्स के जरिए चीन के साथ बातचीत की कोशिश जारी रखेगा. सुषमा ने कहा कि 'हम मानते हैं कि मामले के शांतिपूर्ण हल के लिए यह रुख जरूरी है.'

जापान ने यह प्रतिक्रिया ऐसे वक्त में दी है, जब अमेरिका ने भी इस मुद्दे को हल करने के लिए जमीनी क्षेत्र में बिना एकतरफा बदलाव किए चीन और भारत को सीधी बातचीत करने की सलाह दी है. अमेरिका के इस रुख को भी एक्सपर्ट भारत के समर्थन में मानते हैं. अमेरिका का आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन का दर्जा देना भी पाकिस्तान और उसके हिमायती चीन के लिए किसी झटके से कम नहीं है.

उधर चीन ने जापान के बयान पर आपत्ति जताई है. न्यूज एजेंसी आईएएनस के मुताबिक चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, 'मैं जानती हूं कि जापान के राजदूत भारत को समर्थन देना चाहते हैं. मैं उन्हें याद दिलाना चाहती हूं कि उन्हें तथ्यों को जांचे बिना ऐसे ही टिप्पणी करने से बचना चाहिए.'

जापानी राजदूत द्वारा डोकलाम को विवादित क्षेत्र बताए जाने पर भी चीनी प्रवक्ता ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने कहा, 'डोकलाम को लेकर कोई क्षेत्रीय विवाद नहीं है. इस इलाके में सीमा की पहचान हो चुकी है और दोनों ही पक्षों ने इसकी पुष्टि की है. पूर्व की स्थिति को बदलने की कोशिश भारत कर रहा है, चीन नहीं.'

जापान दुनिया का पहला देश है जिसने डोकलाम विवाद पर भारत का खुलकर समर्थन किया है. इससे पहले अमेरिका ने इस मुद्दे को दोनों देशों को सीधी बातचीत के जरिए सुलझाने को कहा था.

जापान की तरफ से यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री शिंजो अबे के भारत दौरे से एक महीने पहले आई है. अबे 13 से 15 सितंबर तक भारत दौरे पर रहेंगे. ऐसे में भारतीय राजदूत हीरामत्सू ने साफ कर दिया है कि प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले जापान भी चीन पर नजर रखे हुए है.

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