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करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में इमरान खान और पाक विदेश मंत्री के साथ बैठे सिद्धू

पहले इमरान खान बैठे थे, फिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मुहम्मद कुरैशी और उनके बाद बैठे थे सिद्धू

Updated On: Nov 28, 2018 04:36 PM IST

FP Staff

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करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन में इमरान खान और पाक विदेश मंत्री के साथ बैठे सिद्धू

बुधवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बहुचर्चित करतारपुर कॉरिडोर की आधारशिला रखी. इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए भारत की तरफ से केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर और हरदीप सिंह पुरी पहुंचे थे. पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू इमरान खान के न्यौते पर पहले ही यहां पहुंचे हुए थे.

यहां सिद्धू ने करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन पर बोला कि दोनों देशों को एक दूसरे को लेकर अपना नजरिया बदलना होगा. उन्होंने बोला कि इसकी शुरुआत हो चुकी है. अब खूनखराबा बहुत हुआ, अब भाईचारे का वक्त है.

इमरान खान ने भी अपने भाषण में दोनों देशों की दोस्ती की वकालत की और कहा कि दोनों देशों की अवाम दोस्ती चाहती है, बस लीडरशिप को एक पेज पर आना होगा.

इस कार्यक्रम में एक जो बात नजर में आई वो ये कि सिद्धू को पहली पंक्ति में इमरान खान के करीब जगह मिली थी. पहले इमरान खान बैठे थे, फिर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह मुहम्मद कुरैशी और उनके बाद बैठे थे सिद्धू. वहीं, भारत की ओर से गए दोनों मंत्रियों को थोड़ी दूर सीट मिली थी.

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम में एक और चेहरा था, जिसके शरीक होने पर सवाल उठ रहे हैं. वो हैं पाकिस्तानी सेना के जनरल कमर जावेद बाजवा. बाजवा इस सिविलयन कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे, इस पर सवाल उठे हैं. इसके अलावा इस कार्यक्रम में खलिस्तान की ओर झुकाव रखने वाले नेता गोपाल सिंह चावला को भी बाजवा से हाथ मिलाते हुए देखा गया.

पाकिस्तान के करतापुर साहिब में बन रहा ये कॉरिडोर करतारपुर के गुरद्वारा दरबार सिंह को भारत के गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक से जोड़ेगा. इससे सिख तीर्थयात्रियों को बिना वीजा के पाकिस्तान जाने में सुविधा होगी. ये कॉरिडोर अगले छह महीनों में पूरा हो जाएगा.

भारत ने पाकिस्तान से इस कॉरिडोर को शुरू करने के लिए 20 साल पहले आग्रह किया था. अब पिछले हफ्ते ही दोनों देशों ने इस योजना के शुरुआत की घोषणा की थी.

दोनों देशों की इस पहल के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत-पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता शुरू होगी? लेकिन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इन अनुमानों पर विराम लगा दिया है. उन्होंने कहा है कि दोनों देश कॉरिडोर के लिए साथ में काम कर रहे हैं, इसका मतलब ये नहीं है कि दोनों देशों के बीच में बातचीत शुरू होगी. दोनों देशों के बीच के मसले अभी सुलझे नहीं है और आतंकवाद के साथ-साथ बातचीत नहीं चल सकती.

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