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हार्वे तूफान से निपटने की अमेरिकी तैयारियों से क्या भारत कोई सबक लेगा!

अमेरिका में 889 मिमी बारिश होने पर भी लोगों को कोई परेशानी नहीं होती और भारत में 129 मिमी बारिश में शहर के शहर बहने लगते हैं

Vedam Jaishankar Updated On: Aug 26, 2017 08:29 PM IST

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हार्वे तूफान से निपटने की अमेरिकी तैयारियों से क्या भारत कोई सबक लेगा!

अमेरिका में भयंकर समुद्री तूफान हार्वे ने दस्तक दे दी है. अमेरिकी राज्य टेक्सस को इसकी पहली मार झेलनी पड़ी है. इस तूफान की आहट सुनते ही स्थानीय लोगों और सैलानियों ने सुरक्षित इलाकों की तरफ कूच करना शुरू कर दिया था.

दूर-दराज के लोग भी अपने घरों में जरूरत का सामान इकट्ठा कर रहे हैं. जब समुद्री तूफान हार्वे के आने की खबर अमेरिका के चौथे बड़े शहर ह्यूस्टन शहर तक पहुंची, तो बड़े पैमाने पर तैयारियां शुरू कर दी गई थीं.

समुद्री तूफान हार्वे पिछले 13 साल में अमेरिका में आया सबसे भयंकर समुद्री तूफान है. इससे भयंकर बारिश और बाढ़ आने की आशंका है.

एक दिन पहले ही टेक्सस के गवर्नर ग्रेग एबट ने कुदरती आफत को देखते हुए 30 गांवों के लिए इमरजेंसी का एलान कर दिया था. ब्लू वॉटर हाइवे जैसे इलाके, जहां हार्वे तूफान बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकता है, उसे पूरी तरह से खाली करा लिया गया. छह काउंटी तो ऐसी भी हैं जहां सख्ती से लोगों को घर खाली करने के लिए कहा गया है.

जिन इलाकों में इस तूफान का असर कम हो सकता है वहां भी लोगों को सलाह दी गई कि वो समय रहते सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं. एक काउंटी के मेयर ने हालात बयान करते हुए कहा कि लोगों से जबरन इलाका खाली करने को इसलिए कहा जा रहा है, कि अगर तूफान ने भयंकर रूप धर लिया, तो लोगों को बचाना एक बड़ी चुनौती होगा.

तूफान में फंसे लोगों को बचाने के लिए फायर ब्रिगेड कर्मचारियों और पुलिसकर्मियों की जान को जोखिम में नहीं डाला जा सकता. लिहाजा एहतियाती कदम उठाना जरूरी है.

क्या हैं तैयारियां?

काउंटी कॉर्पस क्रिस्टी के मेयर जो मैक्कॉम्ब का कहना है कि वो हर तरह के हालात से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. टेक्सस के मिलिट्री डिपार्टमेंट के अनुसार उन्हों ने स्टेट गार्ड और नेशनल गार्ड के 700 सदस्यों की टुकड़ियां साहिली इलाकों में तैनात कर दी हैं.

यही नहीं ब्लैक हॉक और डकोटा हेलीकॉप्टर समेत आवाजाही के सारे संसाधन एलर्ट पर रखे गए हैं. तूफान के बाद बाढ़ के हालात से निपटने की भी पूरी तैयारी है. पूरे देश की रेड क्रॉस सोसाइटियों को आदेश दिया गया है कि वो टेक्सस में अपनी सेवाओं के लिए तैयार रहें.

हार्वे तूफान की तस्वीर

हार्वे तूफान की तस्वीर

75 एंबुलेंस और 250 बसें तो पहले ही कॉर्पस क्रिस्टी के लिए रवाना कर दी गई हैं. समुद्री तूफान हार्वे ने यहीं सबसे पहले दस्तक दी. लिहाजा इस इलाके को लेकर खास तैयारी की गई थी. कई दिन पहले से ही लोगों को आगाह किया जा रहा था कि वो जल्दी से जल्द इलाका खाली कर दें.

जिन लोगों के पास दूसरे इलाकों में जाने का साधन नहीं थे, उनके लिए प्रशासन की ओर से बंदोबस्त किया गया. ऐसे सभी लोगों को बसों के जरिए सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाया जा रहा है. इलाके की यूनिवर्सिटी और स्कूलों में तो शुक्रवार से ही छुट्टी की घोषणा कर दी गई थी.

बहरहाल ये सब तो बुनियादी सावधानियां थीं जो प्रशासन की ओर से बरती जा रही थीं. प्रशासन के लिए सबसे बड़ा संकट तो वो हाइवे थे, जो लोगों की भीड़ के चलते खचाखच भर गए थे.

समुद्री तूफान को हवा की तेजी के आधार पर एक से पांच की श्रेणी में रखा जाता है. अगर हवाओं की रफ्तार 120 किलो मीटर प्रति घंटा है, तो ये एक नंबर का तूफान माना जाता है. अगर हवाओं की रफ्तार 248 किलो मीटर प्रति घंटे से ज्यादा होती है, तो इसे पांच नंबर यानी सबसे खतरनाक दर्जे में रखा जाता है. अभी तक हवाओं की रफ्तार 176 से 200 किलो मीटर प्रति घंटा है. लिहाजा हार्वे को तीसरे दर्जे का तूफान कहा जा रहा है.

तूफान आने की चेतावनी के बाद टेक्सस में बुनियादी चीजों के लिए हाहाकार मचा हुआ है. सुपर मार्केट में पानी के कैन, बैटरी, टॉर्च, पेट्रोल, डब्बा बंद खानों के लिए मारामारी हो रही है. ह्यूस्टन, शुगरलैंड, केटी, वुडलैंड जैसे इलाकों में खास एहतियात बरती जा रही हैं. लोगों को सलाह दी जा रही है कि वो अंडरपास सड़कों के जरिए जाने से बचें.

अमेरिका के नेशनल हरिकेन सेंटर ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि सभी को किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहना है. हर आदमी के लिए एक इमरजेंसी किट तैयार रखनी होगी, जिसमें हर आदमी को प्रति दिन एक गैलन पानी, तीन दिन का खाना, फुल बैटरी के साथ रेडियो, फर्स्ट एड किट, एक सीटी, टॉर्च, बैकअप बैटरी,पेपर कप, वॉटरप्रूफ कंटेनर जैसी बुनियादी चीजों का इंतजाम करना होगा.

हार्वे तूफान के आगे बढ़ने की सैटेलाइट से ली गई तस्वीर (पीटीआई)

हार्वे तूफान के आगे बढ़ने की सैटेलाइट से ली गई तस्वीर (पीटीआई)

पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए रेत की बोरियों को सभी जगह रखा गया है. तूफानी बारिश से जमा होने वाले पानी के बहाव को कंट्रोल करने के बाद उसे धीरे धीरे बड़ी नदियों, नालों में शिफ्ट कर दिया जाएगा.

मौसम के जानकारों ने पहले ही आगाह कर दिया था कि हार्वे अपने साथ जबरदस्त बारिश लेकर आने वाला है. इतनी बारिश कि इतिहास में कभी किसी ने नहीं देखी होगी. अमेरिका का चौथा बड़ा शहर ह्यूस्टन इस से सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति भी पैदा होगी. लेकिन हालात चाहे जो हों इनसे निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है.

क्या होता है भारत में?

एक तरफ अमेरिका है जहां आपदा आने की चेतावनी मिलते ही निपटने की जबरदस्त तैयारी शुरू हो जाती है. यहां 889 मिलीमीटर बारिश होने पर भी लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. दूसरी तरफ भारत है जहां हर साल बाढ़ की चपेट में आकर ना जाने कितने लोग जान गंवा देते हैं. 129 मिली मीटर बारिश में ही यहां शहर के शहर बहने लगते हैं.

इसी साल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जब बंगलुरु में 129 मिली मीटर बारिश हुई, तो बंगलुरु के स्मार्ट शहर होने की पोल खुल गई. चेन्नई और मुंबई जैसे बड़े शहरों का भी यही हाल होता है. अगर अचानक बहुत तेज बारिश हो जाए तो हाहाकार मच जाता है.

भारत में हालात से निपटने की तैयारी नहीं की जाती. खुद कर्नाटक की सरकार ने इस बात को स्वीकार किया है कि वो बहुत ज्यादा बारिश के हालात से निपटने के लिए तैयार नहीं रहते. यही वजह है कि तेज बारिश होने की सूरत में कोरामंगला जैसे हाई-प्रोफाइल इलाके भी गंदी बस्तियों की तरह से नजर आने लगते हैं.

हालांकि प्रशासन की ओर से दावा किया जाता है कि पानी निकालने के लिए करोड़ों की रकम खर्च की जा रही है. लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही होती है. पिछले साल जुलाई में तो सिर्फ 90 मिली मीटर बारिश में ही पूरा बंगलुरु पानी में डूब गया था. और इस साल भी हालात कुछ इसी तरह रहे.

बाढ़ के पानी की निकासी के लिए बंगलुरु में भी टेक्सास की तर्ज पर इंतजाम किए गए हैं. लेकिन यहां नेताओं, भू-माफियाओं और सरकारी बाबुओं की मिलीभगत के चलते टैंकों और नहरों पर कब्जा कर लिया जाता है. यही वजह है कि 90 मिली मीटर बारिश होने पर ही शहर डूबने लगता है. अगर टेक्सस पहले से इंतजाम करके 800 मिली मीटर की बारिश के प्रकोप को झेल सकता है. अपने नागरिकों और शहरों को बचा सकता है, तो फिर बंगलुरु या कोई अन्य राज्य क्यों नहीं.

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