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इतिहास फिदेल कास्त्रो को सही साबित करेगा

फिदेल कास्त्रो अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसियों का लगातार चकमा देते रहे

Updated On: Nov 27, 2016 08:49 AM IST

Saeed Naqvi

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इतिहास फिदेल कास्त्रो को सही साबित करेगा

अगर कोई मुझसे पूछे कि मैंने अपनी जिंदगी में सैंकड़ों नेताओं के जो इंटरव्यू लिए, उसमें किस इंटरव्यू को मैं सबसे अहम समझता हूं तो वह यकीनन फिदेल कास्त्रो का है. उस जमाने में पश्चिमी देशों के पत्रकारों की पहुंच फिदेल कास्त्रो तक नहीं थी. यह भी अजीब त्रासदी थी कि गुटनिरपेक्ष देशों का मीडिया जो खुद को स्वतंत्र मीडिया कहता था, उसे फिदेल कास्त्रो को कवर करने में कोई दिलचस्पी नहीं थी. क्योंकि उस मीडिया की आत्मा उस वक्त भी बुर्जुआ थी जैसी अब साफतौर पर दिखाई देती है. पश्चिमी मीडिया को फिदेल कास्त्रो फूटी आंख सुहाते नहीं थे. इस लिहाज से देखा जाए तो मेरा इंटरव्यू कई मामलों में ऐतिहासिक हो गया.

हमारे हिन्दुस्तानी मीडिया में बीबीसी, सीएनएन और फॉक्स जैसे चैनलों की तरह पूरी दुनिया में ब्यूरो नहीं हैं, इसलिए हमें उन दोस्तों के पास जाना पड़ता था जो विदेश मंत्रालय में होते थे. एक पूरी रणनीति तैयार करनी पड़ती थी. एबेंसडर से लेकर विदेश मंत्रालय के ज्वाइंट सेक्रेटरी और फिर सेक्रेटरी तक कई स्तरों पर बात करनी पड़ती थी. और अगर मामला फिदेल कास्त्रो जैसे किसी नेता का हो तो प्रधानमंत्री तक से संपर्क करना पड़ता था. वह अलग वक्त था जब हमारे जैसे पत्रकार भी प्रधानमंत्री तक पहुंच पाते थे.

इस मामले में मुझे अजय भवन (भरतीय कम्युनिस्ट पार्टी का मुख्यालय) के अपने दोस्तों की मदद लेनी पड़ी. तो यह तय हो गया कि इंटरव्यू होगा. उन दिनों में यह बड़े नेता न इंटरव्यू का दिन बताते थे और न वक्त. आपके भीतर एक सस्पेंस बना रहता था. मैं हवाना के किसी होटल में अपने कैमरामैन के साथ बैठा था. एक गाइड दे दिया गया था. आप कहीं जा भी नहीं सकते थे क्योंकि अचानक अगर हुक्म आ गया कि इंटरव्यू करना है तो दिक्कत हो जाएगी. हालांकि मुझे हवाना घूमने का बड़ा शौक था.

सब्र का फल मीठा

बहरहाल, मैं इतंजार करता रहा और सब्र का फल मीठा हुआ. हमें कहा गया कि ‘किसी जगह’ पर 7 बजे इंटरव्यू होगा. एक गाड़ी आई और गाइड के साथ हमें ‘उस जगह’ ले गई. जब 8 बज गए, तो हमें लगा कि अब यह टल गया. फिर 9, 10, 11 बज गए. सस्पेंस के मारे हमारी हालत खराब हो रही थी. 12 बजे के आसपास दरवाजों के आसपास कोई मूवमेंट हुई और अपनी पूरी वर्दी और तेवर में लंबे-चौड़े फिदेल कास्त्रो दाखिल हुए. उन्हें देखकर हम चकाचौंध थे. उन्होंने बहुत दोस्ताना तरीके से मेरे कंधे पर हाथ मारा और बैठने का इशारा किया.

‘सिगार पीना मैंने छोड़ दिया है’

मैंने समझा कि अब मुझे वे कोई अच्छा सा सिगार ऑफर करेंगे और जब उन्होंने ऐसा नहीं किया तो मैंने बेबाकी से पूछ लिया. ‘सिगार पीना मैंने छोड़ दिया है’, उनका जवाब था. वैसे वे इंग्लिश समझते थे, लेकिन दुभाषिये के तौर पर जो महिला थी वो इतनी तेजी से हमारी बातों का अनुवाद कर रही थी कि मैं दंग था. इसके बाद उन्होंने अपने और मेरे लिए ब्रांडी मंगाई. दो-तीन गिलास के बाद मुझे लगा कि मैं धुत हो जाउंगा तो इंटरव्यू क्या लूंगा.

March

खैर, रात के 1.30 के आसपास वे इंटरव्यू के लिए तैयार हुए. उन दिनों यह लोग पत्रकारों का पहले मूल्याकंन करते थे कि आखिर वे कितने पानी में हैं. उन्हें गंभीरता से लेते थे. मैं हिन्दुस्तान का था और कास्त्रो की नजर में इंदिरा गांधी की बहुत इज्जत थी. इंदिरा गांधी की इज्जत और सीपीआई की पहुंच की वजह से ही मुझे यह इंटरव्यू मिल पाया था.

दुनिया थी डावांडोल

बाहर के लॉन में यह इंटरव्यू हुआ और ढाई घंटे तक चला. सुबह के 4 बजे तक. सोवियत संघ अफ़गानिस्तान से बाहर निकल रहा था. एक डावांडोल दुनिया थी. लेकिन फिदेल कास्त्रो अपनी जगह पर डटे रहे. उन्होंने किसी तरह से सारी चीजों को मैंनेज किया और अमेरिका की इंटेलिजेंस एजेंसियों का लगातार चकमा देते रहे, इतिहास के लिए इस बात को भूलना मुश्किल होगा.

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एक मामले में फिदेल कास्त्रो ने क्यूबा में बड़ा कमाल किया. उन्होंने बहुत मेहनत से दुनिया में नायाब एक बेहतरीन वहां हेल्थ सर्विस खड़ी की. लेकिन एक तरह का कंट्रोल था और लिबरल वेस्ट वाली फ्रीडम नहीं थी. वे मानते थे कि अमेरिका एक साम्राज्यवादी ताकत है और यह उसके बुनियादी स्वभाव में है कि वो दूसरों का शोषण करे, इसी आधार पर वो मुल्क बना है. उनका कहना था कि हम वैसे नहीं हैं, लेकिन हम चाहते हैं कि उनके साथ हमारे संबंध ठीक रहें. हालांकि वे पश्चिमी मीडिया को ज्यादा अंदर तक घुसने देना नहीं चाहते थे और उन्हें डर था कि इससे उनकी संप्रभुता का नुकसान हो सकता है.

अभी भी जो क्यूबा ने अमेरिका के साथ जो समझौता किया है वो अपनी शर्तों पर किया है. ग्लोबलाइजेशन और इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी की वजह से दुनिया में अब कोई अलग रह के नहीं चल सकता. जेनरेशन ऑफ वेल्थ और डिस्ट्रीव्यूटिव जस्टिस की भी जरूरत है. जैसा कि फिदेल कहते थे कि इतिहास उन्हें सही साबित करेगा, निश्चित तौर पर इतिहास उन्हें सही साबित करेगा.

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