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पाकिस्तान चुनाव: इस्लाम को मुख्य चुनावी एजेंडा बना रही हैं कट्टरपंथी पार्टियां

ये पार्टियां पश्चिमी संस्कृति के खिलाफ हैं और पाकिस्तान में शरिया कानून को कड़ाई से लागू करना चाहती हैं

Updated On: Jul 22, 2018 02:52 PM IST

FP Staff

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पाकिस्तान चुनाव: इस्लाम को मुख्य चुनावी एजेंडा बना रही हैं कट्टरपंथी पार्टियां

पाकिस्तान में मुस्लिम कट्टरपंथी पार्टियां ने धर्म को चुनाव में मुख्य मुद्दा बनाने की कोशिश में लगी हैं. मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद ने भी प्रतिबंध लगने के बावजूद अपनी एक राजनीतिक पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग बनाकर करीब 200 लोगों को चुनाव में उतारा है. हाफिज सईद की पार्टी सहित कई और कट्टरपंथी पार्टियों ने भी चुनावों में अपने उम्मीदवारों को उतारा है.

हाफिज सईद ने धुंआधार चुनाव प्रचार में लगा हुआ है और अपने भड़काऊ भाषणों से पाकिस्तान की पिछली सरकार पर लगातार हमले कर रहा है. वो पाकिस्तान की पिछली सरकार को 'गद्दार' और अमेरिका का पिट्ठू कह रहा है. हाफिज सईद की पार्टी सहित मुस्लिम कट्टरपंथी और अतिवादी पार्टियां अमेरिका को भी अपने चुनाव प्रचार में निशाना बना रही हैं. ये पार्टियां पश्चिमी संस्कृति के खिलाफ हैं और पाकिस्तान में शरिया कानून को कड़ाई से लागू करना चाहती हैं.

इस बार नेशनल असेंबली और प्रोवेंसियल चुनावों में धार्मिक कट्टरपंथी पार्टियों ने लगभग 1500 उम्मीदवार उतारे हैं जबकि 2013 के चुनावों में इन पार्टियों से लगभग 100 उम्मीदवार ही खड़े हुए थे.

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के चुनाव परिणाम त्रिशंकु रह सकते हैं और ऐसी स्थिति में कट्टरपंथी मुस्लिम दलों के जीते हुए उम्मीदवारों की नई सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

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