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पाक मीडिया ने खुद को दिया गुजरात में बीजेपी की जीत का श्रेय

इन चुनाव नतीजों की चर्चा भारत में हुई ही साथ ही विदेशी मीडिया ने भी इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की, फिर वो चाहे पाकिस्तान का डॉन हो या अमेरिका का हफिंगटन पोस्ट

Updated On: Dec 19, 2017 04:59 PM IST

FP Staff

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पाक मीडिया ने खुद को दिया गुजरात में बीजेपी की जीत का श्रेय

सोमवार को हिमाचल-गुजरात के नतीजे आने के बाद हर तरफ चर्चा का बाजार गर्म है. एक तरफ गुजरात में बीजेपी ने लगातार छठी बार सरकार बनाने में कामयाबी हासिल की है तो वहीं हिमाचल में 5 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है. इन चुनाव नतीजों की चर्चा भारत में हुई ही साथ ही विदेशी मीडिया ने भी इस मुद्दे पर खुलकर चर्चा की फिर वो चाहे पाकिस्तान का डॉन हो या अमेरिकी हफिंगटन पोस्ट या फिर चीन के ग्लोबल टाइम्स, हर जगह केवल चुनावों का शोर ही गूंज रहा है.

आइए बताते हैं विदेशी मीडिया ने चुनावों पर क्या-क्या चर्चाएं की हैं.

पाकिस्तानी अखबार डॉन

पाकिस्तान अखबार डॉन ने अपने आर्टिकल में नरेंद्र मोदी के उस बयान की चर्चा की है जिसमें उन्होनें कांग्रेस पर पाकिस्तान के साथ मिलकर उनके खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया था. अखबार डॉन ने लिखा, 'फरवरी 2002 में गोधरा में ट्रेन जलाने की घटना पर नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान पर दोष मढ़ा और चुनाव जीत लिया. इसी तरह इस बार भी चुनाव प्रचार के अंतिम समय में उन्होंने पाकिस्तान को बीच में घसीट लिया, जो उनकी जीत में आंशिक रूप से मददगार रहा.'

आर्टिकल में लिखा, 'नरेंद्र मोदी ने फिर पाकिस्तान का जिक्र किया. राहुल गांधी की सभाओं में उमड़ती भीड़ को देख उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पूर्व सेना प्रमुख दीपक कपूर की पाकिस्तान के पूर्व हाई कमिश्नर के साथ मीटिंग पर कमेंट किया. उन्होंने कहा कि इस मीटिंग में बीजेपी को गुजरात में हराने पर बात हुई.' इसी के साथ डॉन ने हिमाचल में जीत पर टिप्पणी करते हुए राष्ट्रवादी कार्ड खेलने का जिक्र किया साथ ही हार्दिक, ईवीएम जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की है.

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हफिंगटन पोस्ट

हफिंगटन पोस्ट अपने आर्टिकल में मोदी की जमकर तारिफ करते हुए दिखाई दिया. हफिंगटन पोस्ट ने लिखा, मोदी और हिंदुत्व की वजह से गुजरात में बीजेपी को जीत मिली. आर्टिकल में गुजरात के कुछ क्षेत्रीय युवाओं का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वे नरेंद्र मोदी से कितना प्यार करते हैं और उनके द्वारा किए गए काम को गर्व के रूप में देखते हैं. ऑर्टिकल में बताया गया है कि युवा जीएसटी से हुई परेशानी से इसलिए समझौता कर रहे हैं कि उन्हें लगता है कि नरेंद्र मोदी के इस फैसले से दूरगामी फायदा होगा.

इस आर्टिकल में नरेंद्र मोदी की 34 रैलियों में विकास, भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और हिंदुत्व पर उठाए गए मुद्दे का जिक्र किया गया. हालांकि, इसमें ये भी कहा गया है कि उन्होंने व्यक्तिगत हमले का मास्टरस्ट्रोक के रूप में प्रयोग किया. रैली-दर-रैली नरेंद्र मोदी ने गुजरात गौरव की बात की. उन्होंने साबित करने की कोशिश की कि वह गुजरात की मिट्टी के ही हैं और गुजराती उनके विरोध को समर्थन नहीं देंगे.

हफिंगटन पोस्ट में कहा गया, बीजेपी को गुजरात में साल 1995 के बाद सबसे कम सीटें मिली हैं. मोदी अचूक नहीं रह गए हैं. अब ऐसा नहीं है कि वह खुद के सेट किए ट्रेंड पर ही चल रहे होते हैं. आर्टिकल में हार्दिक, जिग्नेश और अल्पेश को मोदी के लिए चुनौती के रूप में भी बताया गया. इसमें राहुल गांधी के भी नए और परिपक्व अवतार का जिक्र किया गया.

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चीन का ग्लोबल चाइम्स

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने चुनाव प्रचार के दौरान चली बयानबाजी और प्रचार के तरीकों पर चर्चा की. इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह जनपद में किस तरह चुनाव प्रचार किया गया. बीजेपी के सभी शीर्ष नेता और कैबिनेट मंत्रियों ने वहां एक महीने तक डेरा जमाए रखा.

इसमें कहा गया कि गुजरात और हिमाचल में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के कारण ही बीजेपी को जीत मिली है. वहां बीजेपी के राज्य के नेताओं की उतनी भूमिका देखने को नहीं मिली. वहीं, हिमाचल में बीजेपी के मुख्यमंत्री उम्मीदवार की हार का भी जिक्र किया गया.

लंदन का टेलीग्रॉफ

लंदन के टेलीग्राफ ने चुनाव नतीजों की चर्चा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश में बीजेपी तीन अंकों का आंकड़ा नहीं छू पाई. केवल 99 सीटों पर सिमट गई. ये कहा गया कि साल 2014 की तुलना में बीजेपी की पकड़ कमजोर हुई है.

अखबार लिखता है, प्रधानमंत्री के गृहक्षेत्र वडनगर में बीजेपी की हार हुई. मोदी अजेय नहीं हैं. यहां तक कि अपने गृह प्रदेश में भी. नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी की राजनीति का जिक्र किया गया.ये बताने की कोशिश की गई है कि कैसे राहुल लोगों को आकर्षित किया. अखबार का मानना है कि राहुल अब मजबूत नेता के रूप में भी उभर आए हैं.

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