S M L

सोशल मीडिया बोट्स और ट्रोल्स का इस्तेमाल करती हैं सरकारें

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल में कम से कम 18 देशों के चुनाव में ऑनलाइन तोड़ मरोड़ और गलत बयानी के तरीकों ने अहम किरदार अदा किया है. इन देशों में अमेरिका भी शामिल है.

Updated On: Nov 14, 2017 07:24 PM IST

Bhasha

0
सोशल मीडिया बोट्स और ट्रोल्स का इस्तेमाल करती हैं सरकारें

एक मानवाधिकार संगठन ने आज कहा कि रूस और चीन के साथ-साथ कई अन्य सरकारें भी सोशल मीडिया को अपने हित के लिए इस्तेमाल करने के काम में शुमार हो गईं हैं . वे असंतोष को ऑनलाइन दबा रही हैं जोकि लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है.

मानवाधिकार समूह फ्रीडम हाउस ने आज कहा कि 65 देशों में इंटरनेट आजादी पर एक अध्ययन किया गया था जिसमें पाया गया कि 30 सरकारें ऑनलाइन सूचना को विकृत करने के लिए किसी ना किसी तरह से सूचना से छेड़छाड़ करती हैं. पिछले साल ऐसी सरकारों की संख्या 23 थी.

मानवाधिकार समूह की ‘फ्रीडम ऑन नेट’ रिपोर्ट के मुताबिक, इन प्रयासों में पेड टिप्पणी करने वाले, ट्रोल्स, बोट्स, फर्जी खबरिया वेबसाइट, प्रचार एजेंसियां शामिल हैं.

18 देशों के चुनाव में अपनाए गई ऑनलाइन तोड़ मरोड़ और गलत बयानी 

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल में कम से कम 18 देशों के चुनाव में ऑनलाइन तोड़ मरोड़ और गलत बयानी के तरीकों ने अहम किरदार अदा किया है. इन देशों में अमेरिका भी शामिल है.

फ्रीडम हाउस के अध्यक्ष माइकल अब्रामोवित्ज़ ने कहा कि सरकार का प्रचार करने के लिए पैसा देकर टिप्पणी करने वालों और राजनीति बोट्स का इस्तेमाल करने में चीन और रूस सबसे आगे थे लेकिन अब यह वैश्विक तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

ये तकनीकें लोकतंत्र और सिविल एक्टिविजम के लिए हो सकती है खतरा

उन्होंने कहा कि तेजी से फैलती ये तकनीकें लोकतंत्र और सिविल एक्टिविजम के लिए संभावित खतरा है.

फ्रीडम ऑन नेट परियोजना की निदेशक संजा कैली ने बताया कि इस तरह के तोड़ मरोड़ करने के तरीके को पकड़ना अक्सर मुश्किल होता है. इसके अलावा सेंसिरशिप और वेबसाइट ब्लॉक करने की तुलना में इसका मुकाबला करना भी कठिन है . संगठन ने कहा कि वर्ष 2017 लगातार सातवां साल है जब इंटरनेट आजादी में कुल मिलाकर कमी देखी गई है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi