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गूगल डूडल: जब इस लेखिका की कहानी ने किया संसद को मजबूर

मीना कांथ की याद में फिनलैंड में 19 मार्च को सामाजिक समानता दिवस के रूप में मनाते हैं.

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha Updated On: Mar 19, 2017 09:07 AM IST

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गूगल डूडल: जब इस लेखिका की कहानी ने किया संसद को मजबूर

गूगल डूडल आज फिनिश राइटर, जर्नलिस्ट और सोशल एक्टिविस्ट मीना कांथ का 173 जन्मदिवस मना रहा है. उलरिका विल्हेल्मिना कांथ का जन्म 1844 में 19 मार्च को हुआ था. कांथ महिला अधिकारों की दिशा में किए गए काम और लिखे गए नाटकों के लिए जानी जाती हैं.

कांथ ने अपना करियर फैमिली बिजनेस संभालने के साथ-साथ शुरू किया था. जब वो ये सब कर रही थी, तब तक उनके पति की मृत्यु हो चुकी थी और उनको 7 बच्चों की देखभाल भी करनी थी.

1880-1890 की वो यथार्थवादी और प्रकृतिवादी लेखकों में से एक थीं. उनकी लेखनी में महिला अधिकारों, अभिव्यक्ति और इच्छाओं को पाने की चाह झलकती है. यही बात उनकी लेखनी को उस दौर से अलग बनाती है.

उनकी लेखनी की ही वजह से वो 19वीं सदी की विवादस्पद शख्सियतों में से एक रहीं. लेकिन फिर भी वो अपने विचारों के साथ मजबूती के साथ खड़ी रहीं.

उनका नाटक 'द पेस्टर्स फैमिली' सबसे ज्यादा मशहूर है. इसके अलावा, 'द वर्कर्स वाइफ' (1885) और 'एना लीजा' (1895) उनकी अन्य बेहतरीन कृतियां हैं.

'द वर्कर्स वाइफ' इतनी चर्चित हुई कि इसके प्रीमियर के बाद संसद को संपत्ति में हिस्सेदारी से संबंधित एक नया कानून लाना पड़ गया था. दरअसल ये कहानी जोहाना नाम की महिला की थी. जोहाना की शादी रिस्तो नाम के पियक्कड़ से हो जाती है. वो जोहाना की मेहनत के सारे पैसे अपने शराब में उड़ाता है लेकिन जोहाना कुछ नहीं कर पाती क्योंकि कानूनन उसके पैसों पर उसके पति का अधिकार होता है.

मीना कांथ पर ल्यूसिना हैगमैन ने 1906 में पहली जीवनी लिखी. कांथ की कृतियों को थिएटरों में खेला जाता है साथ ही स्कूलों के सिलेबस में भी पढ़ाया जाता है. कांथ की याद में 2007 से हर साल 19 मार्च को सामाजिक समानता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

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