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अमेरिका में भ्रष्ट्राचार केस में फंसा AIRBUS, नौ प्रतिशत शेयर गिरे

फ्रांस के बड़े अखबार ल्यॅ मॅन्द ने कंपनी के एक अरबों डॉलर के अमेरिकी घोटाले जांच में कंपनी के फंसने की जानकारी दी थी

Updated On: Dec 21, 2018 02:55 PM IST

FP Staff

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अमेरिका में भ्रष्ट्राचार केस में फंसा AIRBUS, नौ प्रतिशत शेयर गिरे

एयरक्राफ्ट बनाने वाली यूरोपियन कंपनी एयरबस बड़े भ्रष्टाचार में फंसती दिखाई दे रही है. फ्रांस के बड़े अखबार ल्यॅ मॅन्द ने गुरुवार को कंपनी के एक अरबों डॉलर के अमेरिकी घोटाले जांच में कंपनी के फंसने की जानकारी दी थी, जिसके बाद कंपनी का शेयर नौ प्रतिशत तक नीचे आ गया है.

अखबार ने बताया है कि इस मामले में एयरबस को बहुत बड़ा हर्जाना भरना पड़ सकता है. कंपनी ने अपना एक बयान जारी कर कहा है कि वो अमेरिकी अधिकारियों के साथ जांच में सहयोग कर रही है.

गुरुवार को एयरबस के शेयर 82.34 यूरो के आसपास पांच प्रतिशत तक कम थे. पेरिस स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी ने 9.6 प्रतिशत शेयर खो दिए.

न्यूज एजेंसी AFP की खबर के मुताबिक, फ्रेंच अखबार ने कहा था कि अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने साल 2017 के अंत में एक अनियमितता के केस में एयरबस के खिलाफ एक जांच शुरू की थी और कंपनी को इस केस की जानकारी इस साल गर्मियों के अंत के आसपास दी गई थी.

ये जांच तब शुरू हुई थी, जब 2016 में ये सामने आया था कि कंपनी ने संबंधित अधिकारियों को अपने कई कॉन्ट्रैक्ट्स को बनाने में मध्यस्थों को दिए गए पेमेंट की जानकारी नहीं दी थी.

इसके कुछ महीनों बाद ब्रिटेन के सीरियस फ्रॉड ऑफिस ने थर्ड पार्टी कंसल्टेंट्स को भी लेकर कुछ अनियमितताओं के आरोप में एक धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की जांच शुरू की. इसमें फ्रांस के फाइनेंशियल प्रॉसिक्यूटर ऑफिस भी सहयोग कर रहा था, बाद में उसने भी एयरबस के खिलाफ एक जांच शुरू की थी.

इन सारी जांचों के बीच एयरबस ने 2017 में ही कहा था कि उसके कंपनी पर इसका नकारात्मक आर्थिक प्रभाव पड़ने वाला है और अब फ्रेंच डेली की खबर के बाद उसके शेयर में नौ प्रतिशत की गिरावट आ गई है.

ल्यॅ मॅन्द ने अपनी खबर में लिखा कि अगर अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की जांच क्रिमिनल कोर्ट केस बनती है और एयरबस को अपराधी पाया जाता है तो इसे पांच सालों तक इंटरनेशनल कॉन्ट्रैक्ट्स में शामिल होने से रोक दिया जाएगा.

साथ ही उसे डिफेंस और सिविल एविएशन के कॉन्ट्रैक्ट्स खरीदने के हक से सालों तक बेदखल कर दिया जाएगा और इसका सीधा फायदा बोइंग और चीन को होगा क्योंकि वो अमेरिकी मार्केट में अपनी मौजूदगी बनाना चाहते हैं.

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