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यूरोपीय संघ: हिजाब पहनने से रोक सकती है कंपनियां

यूरोप में प्रवासियों और शरणार्थी नीतियों को लेकर काफी चर्चा हो रही है

Updated On: Mar 14, 2017 09:15 PM IST

FP Staff

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यूरोपीय संघ: हिजाब पहनने से रोक सकती है कंपनियां

यूरोपीय संघ की शीर्ष अदालत ने एक ऐतिहासिक मामले में व्यवस्था की है कि इस संघ की कंपनियां अपने कर्मचारियों को इस्लामिक हिजाब जैसे धार्मिक एवं राजनीतिक प्रतीकों को पहनने से रोक सकती हैं.

यूरोपीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (ईसीजे) ने कहा कि यदि कोई कंपनी अपने यहां किसी राजनीतिक, दार्शनिक या धार्मिक प्रतीक के पहनने पर रोक लगाती है तो यह कोई प्रत्यक्ष भेदभाव नहीं है.

यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस ने मंगलवार को फैसला दिया है कि यूरोप में कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को अपने यहां काम करने से रोक सकती हैं जो धर्म से जुड़े किसी भी संकेत को इस तरह से पहनकर आते हैं कि वह साफ तौर पर दिखे. हिजाब पहनकर दफ्तर आने वाली महिला कर्मचारियों से जुड़े मामले पर कोर्ट ने यह अपना पहला फैसला दिया है.

muslim women

दरअसल, यह फैसला फ्रांस और बेल्जियम की उन दो महिलाओं से जुड़े मामले में संयुक्त रूप से  दिया गया है जिसमें महिलाओं को इसलिए नौकरी से निकाल दिया गया था क्योंकि उन्होंने अपना हिजाब उतारने से इनकार कर दिया था.

यह नियम सीधा भेदभाव नहीं

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, किसी कंपनी का अंदरूनी नियम जो किसी भी राजनीतिक, दार्शनिक और धार्मिक संकेत को पहनने रोक देता है, उसे सीधा भेदभाव नहीं माना जा सकता.

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि किसी कस्टमर की इच्छा पर कंपनी ऐसे फैसले नहीं कर सकती. फैसले के अनुसार अगर कंपनी किसी भी प्रकार की ऐसी चीजों के पहनने पर पाबंदी लगाती है तो इसे भेदभाव नहीं माना जा सकता.

कोर्ट का यह फैसला ऐसे वक्त में आया है जब नीदरलैंड में होने वाले चुनाव में मुस्लिम प्रवासियों का मसला काफी पुरजोर तरीके से उठाया जा रहा है. और पूरे यूरोप में प्रवासियों और शरणार्थी नीतियों को लेकर काफी चर्चा हो रही है.

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