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ट्रंप की चेतावनी की अनदेखी पाक के वजूद को खतरे में डाल सकती है

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नए साल के ट्वीट ने पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से एक आतंकवादी देश की श्रेणी में रख दिया है

Updated On: Jan 03, 2018 09:39 PM IST

Prakash Katoch

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ट्रंप की चेतावनी की अनदेखी पाक के वजूद को खतरे में डाल सकती है
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पाकिस्तान के दोहरे रवैए पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए साल के ट्वीट की गूंज दुनिया भर में सुनाई दे रही है. अपने ट्वीट में ट्रंप ने लिखा है, ‘यूनाइटेड स्टेट्स ने पिछले 15 सालों में बेवकूफाना तरीके से पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की आर्थिक मदद दी है, और बदले में उन्होंने हमें झूठ और धोखे के सिवा कुछ भी नहीं दिया है. वह हमारे नेताओं को मूर्ख समझते हैं. जिन आतंकियों को हम उनकी मामूली मदद के सहारे अफगानिस्तान में तलाश रहे हैं, वह उन्हें अपनी जमीन पर ही सुरक्षित पनाह मुहैया कराते हैं. अब और नहीं.’

यह महज संयोग ही था कि जिस वक्त पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई जम्मू-कश्मीर में सीआरपीएफ कैंप पर आतंकी हमले की साजिश रच रही थी, उसी वक्त पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने ट्रंप के ट्वीट पर विरोध जताने के लिए पाकिस्तान में तैनात अमेरिकी राजदूत डेविड हेल को तलब कर रखा था.

पाकिस्तान ने कहने को तो हाफिज सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा को दान देने पर रोक लगा रखी है, लेकिन यह जग जाहिर है कि, जमात की आतंकी गतिविधियों के लिए आईएसआई के खजाने के दरवाजे हमेशा की तरह अब भी खुले हुए हैं. जमात-उद-दावा को संयुक्त राष्ट्र ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है, लिहाजा जमात-उद-दावा ने अब राजनीति का लबादा ओढ़ने की कवायद शुरू कर दी है.

अतीत में सईद काम आतंक फैलाना था और भविष्य में भी यही मंसूबे हैं

जमात ने मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) नाम के राजनीतिक दल का गठन करके फिर से दान लेना शुरू कर दिया है, ताकि भारत के खिलाफ अपने खतरनाक मंसूबों को अंजाम दे सके. दरअसल टेरर फंडिंग को महज नाम बदलने की जरूरत होती है, नाम और बैंकिंग कोड बदलने के बाद आतंकी संगठन फिर से अपनी पुरानी लीक पर चलने लगते हैं. जैसे, जमात-उद-दावा पहले लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) हुआ करता था और अब मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) हो गया है. नाम बदलने से इस जैसे आतंकी संगठनों का ईमान नहीं बदलता है. अतीत में भी इनका काम आतंक फैलाना था और भविष्य में भी यह वैसे ही मंसूबे पाले बैठे हैं.

आज से करीब साढ़े सात साल पहले जुलाई 2010 में, जियो-पॉलिटिकल एनालिस्ट (भू-राजनीतिक विश्लेषक) माइकल ह्यूजेस ने हफिंगटन पोस्ट के लिए एक लेख लिखा था. 'बाल्कनाइजेशन पाकिस्तान: ए कलेक्टिव नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी' शीर्षक वाले इस लेख में ह्यूजेस ने कहा था कि, ‘पाकिस्तानी सेना में 5,00,000 सक्रिय सैनिक और करीब 5,00,000 ही रिजर्व सैनिक हैं. अगर पाकिस्तान वास्तव में हक्कानी नेटवर्क को खत्म करना चाहता, तो वह कुछ दिनों के भीतर ही उन्हें उनकी दाढ़ी से पकड़कर गुफाओं से बाहर खींच लाता. नौ साल बीतने, लगभग 300 अरब डॉलर खर्च होने और गठबंधन सेना के 1900 सैनिक मारे जाने के बाद, अमेरिका आधिकारिक तौर पर यह पुष्टि करता है कि, आतंकियों के खिलाफ युद्ध अबतक गलत दिशा और गलत पहाड़ों पर केंद्रित था.’

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माइकल ह्यूजेस के लेख से स्पष्ट होता है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने ट्वीट में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद का जिक्र किया है. पाकिस्तान जब से अमेरिका के ग्लोबल वॉर अगेन्स्ट टेररिज्म (जीडब्लूओटी) अभियान में शामिल हुआ है, तब से पाकिस्तान को अमेरिका की तरफ से 300 अरब डॉलर से ज्यादा की आर्थिक मदद मिल चुकी है.

अफगानिस्तान में अपने 1900 से ज्यादा सैनिकों की मौत और अमेरिकी और नाटो के सैन्य कमांडरों की मौजूदगी के बावजूद अमेरिका ने आतंकियों से लड़ने के लिए पाकिस्तान को वित्तीय मदद देना जारी रखा, लेकिन पाकिस्तान अबतक एक तरफ तो आतंकियों से लड़ाई का ढोंग करता रहा और दूसरी तरफ आतंकियों को अपने यहां पनाह देता रहा. अमेरिका को दिखाने के लिए पाकिस्तान कभी अफगानिस्तान तो कभी भारत के खिलाफ छद्म युद्ध का सहारा भी लेता रहा, लेकिन लगता है कि अब अमेरिका को पाकिस्तान और उसके झूठ से मोह भंग हो गया है.

ट्रंप की तरह किसी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के असली चेहरे को इस तरह से कभी बेनकाब नहीं किया है. अगस्त 2017 में नई अफगान-पाक नीति का अनावरण करते हुए ट्रंप ने अपने भाषण में कहा था- पाकिस्तान अक्सर अराजकता, हिंसा और आतंक फैलाने वाले लोगों को सुरक्षित पनाह देता है, हम अब तालिबान और उस जैसे अन्य आतंकी संगठनों को पाकिस्तान की तरफ से मुहैया कराए जा रहे सुरक्षित ठिकानों के बारे में और चुप नहीं रह सकते हैं. यह आतंकी संगठन उस क्षेत्र विशेष और बाकी दुनिया के लिए खतरा बने हुए हैं.

U.S. President Donald Trump delivers remarks to U.S. and Japanese business leaders at the U.S. ambassador's residence in Tokyo, Japan, November 6, 2017. REUTERS/Jonathan Ernst - RC110C37E700

दुनिया के असफल देशों में एक है पाकिस्तान

आतंकवाद और अतिवाद से पाकिस्तानी जनता का काफी नुकसान हुआ है, लेकिन पाकिस्तान ने उन आतंकियों को पनाह दी है, जो लगभग रोजाना ही हमारे लोगों को मारने की कोशिश करते हैं. हम पाकिस्तान को अरबों डॉलर का भुगतान उस वक्त कर रहे हैं, जब वह बहुत से ऐसे आतंकियों को पनाह दे रहा है, जिनके खिलाफ हम लड़ रहे हैं, लेकिन अब यह और नहीं चलेगा, इस नीति को बदलना बेहद जरूरी है. इसे तुरंत बदला जाएगा.

किसी भी देश के साथ ऐसी कोई भी साझेदारी ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती है, जो अपने यहां उन आतंकियों को शरण देता है, जो अमेरिकी सैनिकों, अधिकारियों और नागरिकों को निशाना बनाते हैं. लिहाजा समय आ गया है कि पाकिस्तान अब मानव सभ्यता और विश्व शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जाहिर करे. लेकिन, जैसा कि पहले से अपेक्षित था, अमेरिका के आंखें तरेरने के बाद पाकिस्तान अब चीन की गोद में बैठने की जुगत में लग गया है. ट्रंप के ट्वीट को नकारते हुए पाकिस्तान उल्टे अमेरिका को आतंकवाद के खिलाफ अपनी उपलब्धियां गिना रहा है.

दिलचस्प बात यह है कि, साल 2010 में फॉरेन पॉलिसी पत्रिका ने पाकिस्तान को दुनिया के सबसे असफल देशों की सूची में 10वें नंबर पर रखा था, लेकिन इन सब तथ्यों के बावजूद अमेरिका, सऊदी अरब और चीन जैसे देश पाकिस्तान को किसी भी हाल में डूबने नहीं देना चाहते हैं. सब जानते हैं कि, पाकिस्तान आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक और रक्षक है, लेकिन अपने-अपने हितों के चलते कई देश पाकिस्तान की तरफ से अपनी आंखें मूंदे रहते हैं.

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पाकिस्तान में चीनी सेना (पीएलए) के दखल और चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) ने अब इस क्षेत्र के भू-राजनीतिक जटिलताओं को और बढ़ा दिया है. अमेरिका यकीनन हिंद महासागर और अफगानिस्तान में चीन की महत्वकांक्षाओं से चिंतित होगा.

वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान में करीब 10,000 ISIS लड़ाकों के उदय ने अमेरिका की चिंताएं और बढ़ा दी होंगी, लेकिन इन सब बातों से बेपरवाह पाकिस्तानी सेना अब भी आतंकवादी रूपी शेर की सवारी कर रही है. कई आतंकवादी संगठनों और निजी सेनाओं को आईएसआई का समर्थन जारी है. पाकिस्तान के खतरनाक खेल में चीन भी उसका साथ दे रहा है. यही वजह है कि पाकिस्तान सरकार को हाफिज सईद जैसे आतंकी को रिहा करना पड़ा.

हाल ही में, 26 नवंबर, 2017 को पाकिस्तानी सरकार ने पाकिस्तानी सेना के इशारे पर फैजाबाद के प्रदर्शनकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. यही नहीं पाक सरकार को प्रदर्शनकारियों के साथ छह महत्वपूर्ण मुद्दों पर समझौते के लिए भी मजबूर होना पड़ा था. उधर बलूचिस्तान में हिंसा के मामले में काफी इजाफा हुआ है. पाकिस्तान सेना द्वारा बलूची जनता का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया जा रहा है. इस नरसंहार का एक दुखद पहलू यह भी है कि बलूचिस्तान में नरसंहार के लिए चीन ने पाकिस्तान को गनशिप हेलीकॉप्टर तोहफे में दिए हैं.

वहीं सीरिया से संबंध रखने वाले फ्रांसीसी और अल्जीरियाई मूल आईएसआईएस लड़ाकों के अफगानिस्तान में सक्रिय और युद्धरत होने की पुष्टि हुई है. अफगानिस्तान में लगभग 10,000 आईएसआईएस लड़ाके के सामने आए हैं. वहीं रूस ने सीएसटीओ समझौते के तहत टैंकों और बख्तरबंद गाड़ियों के साथ ताजिकिस्तान में अपनी ताकत बढ़ा दी है.

भारत को निशाना बनाने की फिराक में है आतंकी हाफिज सईद

अफगानिस्तान धीरे-धीरे आईएसआईएस लड़ाकों का गढ़ बनता जा रहा है. ऐसे में आईएसआईएस और अलकायदा के लड़ाके गठबंधन करके दक्षिण एशिया को निशाना बनाने की कोशिश कर सकते हैं. भारत के पूर्व में स्थित म्यांमार में पाकिस्तानी नागरिक अता उल्लाह 'अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी' (एआरएसए) का प्रमुख है. खतरे की बात यह है कि, एआरएसए को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) जैसे कई आतंकी संगठनों का सक्रिय रूप से समर्थन हासिल है.

हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी हाफिज सईद और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेएएम) के चीफ मसूद अजहर ने भारत को निशाना बनाने के मकसद से हाथ मिला लिया है. आतंकी मसूद अजहर के मामले चीन के दुर्भावनापूर्ण इरादों और आतंकवाद के प्रति उसके दोहरे मानदंड कई बार उजागर हो चुके हैं. मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र में बतौर आतंकी नामित करने की भारत की कोशिशों को चीन कई बार नाकाम कर चुका है.

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि, पाकिस्तान की तरफ से आतंकी हमले जारी रहेंगे, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि, पाकिस्तान में सेना की पकड़ दिन ब दिन और मजबूत होती जा रही है. पाकिस्तानी सेना ने अपने यहां हर क्षेत्र में घुसपैठ कर ली है. सरकार संगठनों के बाद अब पाकिस्तानी सेना धीरे-धीरे गैर सरकारी क्षेत्रों में भी अपना दबदबा कायम करती जा रही है. ऐसे में, अपनी ताकत को बनाए रखने, आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और सैन्य कुशलताओं को सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान अपने पड़ोसी देशों भारत और अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी आतंक की नीति जारी रखेगा.

Masood Azhar

मसूद अजहर

अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं के चलते चीन हर हाल में पाकिस्तान का साथ देने के लिए बाध्य नजर आ रहा है. पाकिस्तान ने अपने कुछ महत्वपूर्ण इलाके चीन को तोहफे में देकर उसका मुंह बंद करा रखा है. लेकिन सीमाओं को लेकर अफगानिस्तान के साथ पाकिस्तान का विवाद फिर से गर्मा रहा है. दरअसल 1947 में पाकिस्तान के आजाद होने के साथ ही सीमाओं को लेकर अफगानिस्तान के साथ उसका विवाद शुरू हो गया था.

उस समय ब्रिटेन ने पाकिस्तान को अफगानिस्तान के नॉर्थ-वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविंस (एनडब्ल्यूएफपी) और फेडररली एडमिनिस्ट्रेटिव ट्राइबल एरियाज (एफएटीए) को अपने कब्जे में लेने की इजाजत दे दी थी. अब अफगानिस्तान में इन इलाकों को पाकिस्तान से आजाद कराने की मांग बुलंद होने लगी है. खास बात यह है कि, इन इलाकों में सबसे ज्यादा आबादी पश्तून कबीले के लोगों की है. लिहाजा इस उद्देश्य के लिए वह एकजुट होना शुरू हो गए हैं.

इस क्षेत्र का भविष्य क्या होगा फिलहाल यह अनुमान लगाना मुश्किल है, लेकिन एक बात निश्चित है कि अंग्रेजों द्वारा खींची गई विवादास्पद डूरंड रेखा और अफगानिस्तान द्वारा उसे न मानने की स्थिति में जबरदस्त हिंसा की संभावना है. यानी भविष्य में सीमाओं को लेकर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच खूनी संघर्ष हो सकता है. वहीं सीपीईसी को अफगानिस्तान से जोड़ने की योजना के चलते भी इस क्षेत्र में आतंकवाद और हिंसा की घटनाएं और बढ़ सकती हैं. पाकिस्तान अगर इसी तरह से आतंकवाद का निर्यात जारी रखता है, तो क्या वह आतंकियों से खुद को सुरक्षित रख पाएगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के नए साल के ट्वीट ने पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से एक आतंकवादी देश की श्रेणी में रख दिया है. फिलहाल इस बात की संभावना न के बराबर है कि भारत की तरफ से पाकिस्तान को बतौर आतंकवादी देश नामित किया जाएगा. ऐसा इसलिए क्योंकि भारत ने पाकिस्तान को पिछले कई वर्षों से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा दे रखा है. लेकिन अब पाकिस्तान के आतंरिक हालात के मद्देनजर भारत को बहुत सचेत रहने की जरूरत है.

भारत को इस तथ्य पर खास गौर करना होगा कि, पाकिस्तानी सेना अपने देश की आंतरिक घटनाओं से ध्यान हटाने के लिए भारत पर आतंकी हमले तेज करवा सकती है. हमें भूलना नहीं चाहिए कि पाकिस्तान ने हमारे खिलाफ युद्ध छेड़ रखा है. लिहाजा हमें पूरी तरह से तैयार रहना चाहिए. भारत को सिर्फ रक्षात्मक ही नहीं होना है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके में घुसकर कार्रवाई करने को भी मुस्तैद रहना है.

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