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‘फैटमेन’ और ‘लिटिल बॉय’ से नहीं डरेगा नॉर्थ कोरिया, ‘फादर ऑफ ऑल बम’ बन गया है ‘रॉकेट मैन’

ट्रंप को इतिहास से सीख लेने की जरूरत है क्योंकि बिल क्लिंटन ने भी नॉर्थ कोरिया पर हमले की तैयारी की थी लेकिन ऐन मौके पर रुक गए

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Oct 03, 2017 12:11 AM IST

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‘फैटमेन’ और ‘लिटिल बॉय’ से नहीं डरेगा नॉर्थ कोरिया, ‘फादर ऑफ ऑल बम’ बन गया है ‘रॉकेट मैन’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेहद जल्दबाजी में हैं. वो दुनिया के नक्शे से नॉर्थ कोरिया को जल्द मिटाना चाहते हैं. उनको अब ये मानने में कोई हिचक नहीं है कि नॉर्थ कोरिया से बात करना समय की बर्बादी है. दरअसल डोनाल्ड ट्रंप की नीति अमेरिका की विदेश नीति से अलग ही चलती है और अब उनकी रक्षा नीति अमेरिका के पुराने राष्ट्रपतियों के कामों को समय की बर्बादी बता रही है.

ट्रंप ने कहा कि नॉर्थ कोरिया से निपटने में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, बिल क्लिंटन और बराक ओबामा नाकाम साबित हुए हैं. लेकिन वो जरूर कामयाब होंगे. उन्होंने अपने ‘वंडरफुल’ विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन को ‘तैयारी’ करने का आदेश दे दिया है. खुद विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन का कहना है कि इस वक्त अमेरिका और नॉर्थ कोरिया के बीच अब तक का सबसे तनावपूर्ण दौर चल रहा है.

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि ‘रॉकेट मैन के साथ अच्छा व्यवहार पिछले 25 साल में काम नहीं आया, तो अब कैसे काम आएगा? क्लिंटन नाकाम रहे, बुश असफल रहे और ओबामा फेल रहे. मैं नाकामयाब नहीं होऊंगा.’

लेकिन ट्रंप को इतिहास के राष्ट्रपतियों से सीख लेने की भी जरूरत है. नब्बे के दशक में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने भी नॉर्थ कोरिया पर हमले की तैयारी पूरी कर ली थी. लेकिन ऐन मौके पर हमले को टालना पड़ गया था.

जिस तरह से क्लिंटन के पास साल 1994 में नॉर्थ कोरिया पर हमला करने और फिर हमला टालने की वजह थी उसी तरह आज भी अमेरिका के पास अगर हमला करने की वजह है तो हमला टालने की बड़ी वजह आज तक टली नहीं है.

नॉर्थ पर खतरा मंडराया तो दक्षिण कोरिया पर होगा हमला

नॉर्थ कोरिया के ऊपर अगर अमेरिका बम बरसाता है तो उसके परमाणु प्रतिष्ठानों से लीक होने वाला रेडियोएक्टिव पदार्थ पड़ोसी मुल्कों के लिए तबाही का सबब बन जाएगा. जबकि साथ ही हमले की सूरत में  नॉर्थ कोरिया सबसे पहले दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में परमाणु बम गिराने में देर नहीं करेगा. इसी रणनीति से नॉर्थ कोरिया लगातार अमेरिका और पश्चिमी देशों को ब्लैकमेल करता आ रहा है.

Kim Jong Yun

नब्बे के दशक के मुकाबले नॉर्थ कोरिया आज अमेरिका के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है. दावा किया जाता है कि नॉर्थ कोरिया की मिसाइलें अमेरिकी शहरों तक मार कर सकती हैं.

अब ट्रंप के ट्वीट बम के बाद सबकी नज़रें ट्रंप के ‘लिटिल रॉकेट मैन’ यानी नॉर्थ कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन पर टिकी हैं. किम जोंग ने संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप की धमकी के बाद उन्हें सनकी बुड्ढा और मैडमैन कह कर अपने इरादे जता दिए थे. वहीं नॉर्थ कोरिया के प्रतिनिधि ने ट्रंप के बयान को कुत्ते के भौंकने के बराबर बताया था.

जुबानी जंग बढ़ते-बढ़ते अब मिसाइलों और परमाणु हथियारों की जंग की तरफ बढ़ती जा रही है. अब अगर नॉर्थ कोरिया एक भी उकसाने वाला कदम उठाता है तो फिर ट्रंप की मजबूरी ही होगी कि उन्हें अमेरिकी बादशाहत को कायम रखने के लिए जंग का महाऐलान करना होगा.

हालांकि चीन और रूस नॉर्थ कोरिया पर हमले के सख्त खिलाफ हैं. रूस ने तो यहां तक कह दिया कि अमेरिका और नॉर्थ कोरिया बच्चों की तरह लड़ रहे हैं. रूस और चीन जैसे परमाणु राष्ट्रों का कोरियाई प्रायद्वीप पर युद्ध का विरोध भविष्य के महायुद्ध की पहली दस्तक माना जा सकता है.

कहा जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र में नॉर्थ कोरिया को दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा बताकर ट्रंप ने एक तरह से नष्ट करने की धमकी दे दी है और सबसे बड़े युद्ध अपराध और मानव नरसंहार का लाइसेंस ले लिया है. हालांकि अमेरिका का युद्ध इतिहास गवाही देता है कि उसके एकतरफा फैसलों के आगे संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता बेमानी ही साबित हुई है.

खुद को इतिहास में दर्ज कराना चाहते हैं ट्रंप

लेकिन इस बार नॉर्थ कोरिया पर सिर्फ हमले की ज़िद की वजह से हमला करना ट्रंप की रणनीतिक भूल साबित हो सकता है. ट्रंप के बयान से झलक रहा है कि वो ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ के बहाने खुद को इतिहास पुरुष साबित करना चाहते हैं. वो पूर्वर्ती अमेरिकी राष्ट्रपतियों से अलग खुद को कड़े कदम उठाने वाला प्रेसिडेंट साबित करना चाहते हैं. खास बात ये है कि ट्रंप से पहले क्लिंटन, बुश और ओबामा ने नॉर्थ कोरिया पर आग बरसाने की धमकी नहीं दी थी. अमेरिका में एक सर्वे के मुताबिक 51 फीसदी लोगों का ये मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप नॉर्थ कोरिया के मामले को ठीक से हैंडल नहीं कर पाए हैं. जबकि ट्रंप अपने पूर्व राष्ट्रपतियों पर ये आरोप लगा रहे हैं.

North Korea Missile Test

साल 2008 में अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश ने नॉर्थ कोरिया को आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों की ब्लैक लिस्ट से बाहर कर दिया था. बुश को उम्मीद थी कि इसके जरिए परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर नॉर्थ कोरिया तैयार हो जाएगा. लेकिन नॉर्थ कोरिया तब भी परमाणु परीक्षण करने से बाज नहीं आया था जबकि उस वक्त नॉर्थ कोरिया पर युद्ध का कोई खतरा नहीं मंडरा रहा था. केवल संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का ही दबाव था.

जाहिर तौर पर नॉर्थ कोरिया अब फिदायीन रोल में आ चुका है. वह संयुक्त राष्ट्र में लगे प्रतिबंधों के न तो झुका और न ही किसी लालच में आकर अमेरिका से हाथ मिलाने को तैयार हुआ.

अमेरिकी धमकी के बाद अब नॉर्थ कोरिया में मिसाइलों का मूवमेंट तेज हो गया है. दस अक्टूबर को नॉर्थ कोरिया कम्यूनिस्ट पार्टी का स्थापना दिवस मनाएगा. ऐसे में आशंका है कि कहीं एक बार फिर नॉर्थ कोरिया कोई बड़ा परमाणु परीक्षण न कर डाले.

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