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H-1B वीजा में नया मोड़, भारतीय कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ीं

अगर कंपनी एच-1बी या एल-1 वीजाधारी कर्मचारी का कार्यकाल बढ़ाती भी है, तो भी डॉक्यूमेंट्स प्रूफ की पूरी जिम्मेदारी कर्मचारी की होगी.

FP Staff Updated On: Oct 25, 2017 04:25 PM IST

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H-1B वीजा में नया मोड़, भारतीय कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ीं

अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों के लिए स्थिति थोड़ी और मुश्किल हो सकती है. एक नए निर्देश पत्र में ट्रंप प्रशासन ने गैर-आप्रावासी वीजा जैसे एच-1बी और एल-1 वीजा के रिन्युअल को और जटिल बना दिया है.

23 अक्टूबर को जारी नए डायरेक्टिव में कहा गया है कि अगर कंपनी एच-1बी या एल-1 वीजाधारी कर्मचारी का कार्यकाल बढ़ाती भी है, तो भी डॉक्यूमेंट्स प्रूफ की पूरी जिम्मेदारी कर्मचारी की होगी.

दरअसल, एच-1बी वीजा भारत से अमेरिका काम करने वाले लोगों को उनकी कंपनियां दिलवाती हैं.  एच-1बी और एल-1 भारतीय प्रोफेशनल्स के बीच में काफी पॉपुलर है.

अपनी 13 साल पुरानी पॉलिसी को रद्द करते हुए यूएस सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज ने कहा कि अब वीजा के लिए अप्लाई करने पर अपनी योग्यता खुद साबित करनी होगी. 2004, 23 अप्रैल को आए पिछले मेमोरेंडम में पहले ये जिम्मेदारी फेडरल एजेंसी की होती थी लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

पिछली नीति के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को एक बार वर्क वीजा की अनुमति मिल गई, तो उसे वीजा की अवधि बढ़वाने में कोई मुश्किल नहीं होती थी. लेकिन अब उसे अवधि खत्म होने पर फिर से अप्लाई करने के साथ अपनी आईडी प्रूव करनी पड़ेगी.

अमेरिकन इमिग्रेशन लॉयर्स असोसिएशन के अध्यक्ष विलियम स्टॉक ने साफ किया कि ये नई पॉलिसी बस नए वीजा एप्लीकेंट्स के लिए ही नहीं पहले से ही अमेरिका में रह रहे लोगों के लिए भी लागू होगा. नई पॉलिसी से ये सुनिश्चित किया जाएगा कि केवल एच-1बी वीजाधारी ही अमेरिका में रुककर काम कर सकें.

ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में एच-1बी वीजा पर अपनी नजरें गड़ाई हैं. अब इस दिशा में लिए गए नए फैसले भारतीय प्रोफेशनलों की मुसीबतें बढ़ा रहे हैं. ये पॉलिसी इसलिए बदली जा रही है क्योंकि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी नागरिकों के साथ नौकरी के मामले में भेदभाव और फॉरेन लेबर की स्थिति में रिप्लेसमेंट से बचाना चाहती है.

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