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मलावी में गांधी प्रतिमा लगाने पर रोक, गांधी को 'रेसिस्ट' कह किया जा रहा विरोध

ब्लांटायर में प्रस्तावित गांधी की प्रतिमा के खिलाफ चल रहे विरोध पर वहां की हाईकोर्ट ने इस निर्माण पर रोक लगा दिया है

Updated On: Nov 01, 2018 11:07 AM IST

FP Staff

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मलावी में गांधी प्रतिमा लगाने पर रोक, गांधी को 'रेसिस्ट' कह किया जा रहा विरोध
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अफ्रीकी देश मलावी में महात्मा गांधी की प्रतिमा को लेकर बड़ा बवाल चल रहा है. यहां की आर्थिक राजधानी ब्लांटायर में प्रस्तावित गांधी की प्रतिमा के खिलाफ चल रहे विरोध पर वहां की हाईकोर्ट ने इस निर्माण पर रोक लगा दिया है.

बुधवार को वहां की कोर्ट ने इस निर्माण पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी. जस्टिस माइकल तेंबो ने आदेश दिया कि मुख्य मामले की सुनवाई तक या अदालत के इसके उलट आदेश आने तक प्रतिमा निर्माण का काम रोक दिया जाए.

बता दें कि ये प्रतिमा भारत के साथ एक करोड़ डॉलर के निर्माण समझौते के तहत बनाई जा रही थी.

इस प्रतिमा का विरोध 'गांधी मस्ट फॉल' नाम का एक समूह कर रहा था. हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इस समूह ने इस निर्माण को रोकने के 18 कारण बताए. इनमें से एक भारत के लिए काफी हैरानजनक हो सकता है. इस समूह ने महात्मा गांधी को नस्लवादी बताया है. इस समूह का कहना था कि ये जो प्रतिमा बनाई जा रही है, वो गांधी को महत्ता देती है, जबकि गांधी ने अपने जीवनकाल में कई नस्लवादी टिप्पणियां की थीं.

इस समूह ने कहा कि 'अश्वेत समाज होने के चलते गांधी की ऐसी टिप्पणियों ने हमारे प्रति घृणा का भाव पैदा किया है.' इस समूह की याचिका पर लगभग 3,000 मलावी लोगों ने हस्ताक्षर किए थे.

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, गांधी मस्ट फॉल' समूह ने कहा, 'महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता और आजादी के लिए मलावी के संघर्ष में कोई योगदान नहीं दिया. इसलिए हमें लगता है कि मलावी के लोगों पर यह प्रतिमा थोपी जा रही है और यह एक विदेशी ताकत का काम है जो मलावी के लोगों पर अपना दबदबा और उनके मन में अपनी बेहतर छवि बनाना चाहती है.'

गांधी के नाम पर बने एक रोड के साथ-साथ उनकी प्रतिमा बनाने का काम दो महीने पहले शुरू हुआ था. मलावी सरकार का कहना है कि यह प्रतिमा एक समझौते के तहत खड़ी की जा रही है जिसके तहत भारत ब्लांटायर में एक करोड़ डॉलर की लागत से एक सम्मेलन केंद्र का निर्माण करेगा.

कोर्ट के आदेश के बाद इस निर्माण स्थल को खाली करा दिया गया.

इस रिपोर्ट ने एएफपी न्यूज एजेंसी के हवाले से बताया कि मलावी के विदेश मंत्री आईजैक मुनलो ने इस प्रतिमा निर्माण का बचाव करते हुए कहा था कि गांधी ने सादगी के मूल्यों को बढ़ावा दिया था और सामाजिक बुराइयों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी. उन्होंने कहा कि गांधी भारत और अफ्रीका दोनों के लिए ही मानवाधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए ऊंचा स्थान रखते हैं.

बता दें कि भारत और मलावी में 1964 में सबसे पहले कूटनीतिक संबंध अस्तित्व में आए थे. भारत इस देश को सहायता प्रदान करता है.

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