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जानिए क्यों खास है शी जिनपिंग का आजीवन राष्ट्रपति बनना!

1982 में चीन के संविधान में बदलाव के द्वारा चीन के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद के लिए अधिकतम 2 बार ही चुने जाने का प्रावधान किया गया था

Updated On: Mar 11, 2018 06:45 PM IST

FP Staff

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जानिए क्यों खास है शी जिनपिंग का आजीवन राष्ट्रपति बनना!

चीनी कम्युनिस्ट के नेशनल पीपुल्स कांग्रेस में करीब 3000 सदस्यों ने सर्वसम्मति से चीन के राष्ट्रपति पद के लिए 2 टर्म की अवधि की पाबंदी को खत्म कर दिया. चीन में राष्ट्रपति का पद चीन के तीन प्रमुख पदों में से एक है. इस प्रस्ताव के पास होने से शी जिनपिंग के लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया है.

आखिर यह पाबंदी क्यों थी?

1982 में चीन के संविधान में बदलाव के द्वारा चीन के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पद के लिए अधिकतम 2 बार ही चुने जाने का प्रावधान किया गया था. यह डेन जियाओपिंग के समय किया गया था. वे माओ के बाद चीन के प्रमुख बने थे. कई लोगों का मानना है कि डेन जियाओपिंग ने यह बदलाव इसलिए किया था क्योंकि उनका मानना था कि इससे को भी नेता बहुत अधिक शक्तिशाली हो सकता है.

न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार यह अधूरी सच्चाई है क्योंकि तब चीन में राष्ट्रपति का पद अपने आपमें बहुत अधिक शक्तिशाली नहीं था. चीन में सेना का प्रमुख और पार्टी के प्रमुख का पद भी काफी शक्तिशाली होता है. डेन जियाओपिंग ने चीन के राष्ट्रपति पद के लिए चुने जाने के टर्म में तो पाबंदी लगाई लेकिन चीनी राष्ट्रपति को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और चीनी सेना का प्रमुख भी बना दिया. इससे चीन में राष्ट्रपति की ताकत में काफी इजाफा हो गया.

1982 में संविधान में बदलाव करने वाले कहते हैं कि ऐसा करना जरूरी था. संविधान बनाने वालों में से एक फांग यी कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति 15 साल तक सत्ता में रह जाता है तो लोग उससे विरोध या असहमति जताने में डर सकते थे.

1990 के दशक में चीनी राष्ट्रपति का पद तब बहुत महत्वपूर्ण हो गया जब 1993 में डेन जियाओपिंग ने अपने जियांग जेमिन को राष्ट्रपति पद के साथ-साथ, कम्युनिस्ट पार्टी का महासचिव और कमीशन इन चार्ज ऑफ मिलेट्री का चेयरमैन बनाकर अपना उत्तराधिकार सौंपा.

डेन यह भी चाहते थी कि जियांग अनिश्चितकाल तक राष्ट्रपति न बने रहें, इस वजह से उन्होंने हु जिनताओ को भी उनके उत्तराधिकारी के रूप में प्रमोट किया था. 2002 में जियांग के बाद हु जिनताओ चीन के राष्ट्रपति बने.

चीन में वैसे कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव का पद राजनीतिक रूप से अधिक महत्वपूर्ण होता है. पार्टी ही सेना और आंतरिक सुरक्षा बलों पर नियंत्रण रखती है. चीन में चीनी राष्ट्रपति को ‘झूशी’ कहा जाता है, जिसका मतलब चेयरमैन होता है. विदेशी राष्ट्रपतियों को चीन में ‘जोंगटोंग’ कहा जाता है.

वैसे चीनी राष्ट्रपति का पद दिखावे का पद नहीं है. उसके पास कानून बनाने की, इमरजेंसी लगाने और किसी देश के साथ युद्ध घोषित करने की शक्ति है. संकट के समय में पार्टी नेता के साथ मतभेद होने की स्थिति में चीनी राष्ट्रपति संकट में पड़ सकता है. इस वजह से शी जिनपिंग तीनों पद को तब तक अपने पास रखना चाहते हैं, जब तक कि वे चीन को सबसे बड़ी वैश्विक ताकत में न बदल दें. हालांकि शी जिनपिंग को इस वजह से अपना उत्तराधिकारी तय करने में भविष्य में दिक्कत आ सकती है.

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