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चीन: कम्युनिस्ट पार्टी के वफादार होंगे तभी डोनेट कर सकेंगे स्पर्म

पेकिंग यूनिवर्सिटी के अस्पताल ने 6 अप्रैल को स्पर्म डोनेशन कैंपेन लॉन्च किया है. इस कैंपेन में डोनर्स के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं. ये कैंपेन 23 मई तक चलेगा

FP Staff Updated On: Apr 09, 2018 04:31 PM IST

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चीन: कम्युनिस्ट पार्टी के वफादार होंगे तभी डोनेट कर सकेंगे स्पर्म

अब तक स्पर्म डोनर्स से सुंदर होने, बुद्धिमान होने जैसे शारीरिक और मानसिक गुणों की अपेक्षा ही की जाती रही है लेकिन अब चीन में स्पर्म बैंकों ने एक नई मांग ही रख दी है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजिंग के स्पर्म बैंक्स ने शर्त रखी है कि स्पर्म डोनर्स में चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति वफादारी होनी चाहिए. जीवन के हर पहलू पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश में कम्युनिस्ट पार्टी का ये अगला कदम है.

पेकिंग यूनिवर्सिटी के अस्पताल ने 6 अप्रैल को स्पर्म डोनेशन कैंपेन लॉन्च किया है. इस कैंपेन में डोनर्स के लिए कुछ शर्तें रखी गई हैं. ये कैंपेन 23 मई तक चलेगा.

डॉक्टरों ने कहा कि डोनर्स का अच्छा स्वास्थ्य होने के साथ-साथ उनमें अनुकूल राजनीतिक गुण भी होने चाहिए. डोनर्स को समाजवादी मातृभूमि से प्यार होना चाहिए और उन्हें सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी को स्वीकार करना चाहिए.

डोनर्स के सामने ये शर्त भी रखी गई है कि उन्हें पार्टी के कामों के प्रति वफादार और ईमानदार होना होगा. उन्हें नियम-कानून का पालन करने वाला होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक समस्या से दूर रहना चाहिए.

स्पर्म बैंकों ने ये राजनीतिक शर्तें रखने के इतर कुछ ऐसी शर्त रखी हैं- डोनर्स को 20 साल से ऊपर का होना चाहिए. उनमें बाल झड़ने, कलर ब्लाइंडनेस और वजन से जुड़ूी समस्याएं नहीं होनी चाहिए.

स्पर्म डोनेट करने से पहले स्पर्म डोनर्स को 2 राउंड में टेस्ट पास करना होगा. एक टेस्ट में उनके सीमन की जांच की जाएगी तो दूसरे में स्वास्थ्य और फिटनेस की. दोनों टेस्ट पास कर लेने वालों 200 युआन यानी लगभग 2,000 रूपए दिए जाएंगे. वहीं उन डोनर्स को जिन्होंने जो स्पर्म डोनेट करने में सफल होंगे, उन्हें 5,500 युआन यानी लगभग 56,000 रुपए दिए जाएंगे.

हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि डोनर की राजनीतिक रुचि के लिए अलग से कोई टेस्ट नहीं लिया जाएगा. अगर आपको लगता है कि आप इन शर्तों पर खरे उतरते हैं तो आप डोनेट करने के योग्य हैं.

हालांकि, इस कदम ने एक सवाल जरूर उठा दिया है हमारी आदतें, रहन-सहन का ढंग और शारीरिक गुण-अवगुण तो हमारी जीन में इवॉल्व होकर ट्रांसफर होते रहते हैं. लेकिन क्या हमारी राजनीतिक रुचि में हमारे जीन्स को प्रभावित करती है? क्या जीन्स में ऐसे बदलाव करके किसी राजनीतिक पार्टी या विचारधारा के प्रति रुचि पैदा किया जा सकता है? अगर ऐसा हो सकता है तो ये खतरनाक होगा.

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