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फिर दिखा ‘डोकलाम का ड्रैगन’, किस 'सड़क' की तैयारी में जुटा हुआ है चीन?

डोकलाम में चीनी सैनिकों की गतिविधि और मिसाइल-टैंकों की मौजूदगी से सवाल उठता है कि चीन किस "सड़क' पर चलने की तैयारी कर रहा है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Jan 18, 2018 10:49 PM IST

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फिर दिखा ‘डोकलाम का ड्रैगन’, किस 'सड़क' की तैयारी में जुटा हुआ है चीन?

हाल ही में सैटेलाइट इमेज के हवाले से एक रिपोर्ट ने चौंकाने वाला दावा किया है. रिपोर्ट के मुताबिक डोकलाम के उत्तरी हिस्से में चीन ने सैन्य प्रतिष्ठान बना लिया है. जहां न सिर्फ दो मंजिला वॉच-टावर और 7 हैलीपैड बना लिए बल्कि टैंक, मिसाइल, आर्म्ड व्हीकल्स और आर्टिलरी तक इकट्ठे कर रखे हैं.

आखिर जिस डोकलाम को लेकर भारत और चीन में शांति की आपसी सहमति बन चुकी थी तो वहां सैन्य साजो-सामान इकट्ठा करने के पीछे चीन की मंशा क्या है?  क्या एक बार फिर चीन डोकलाम को लेकर भारत के साथ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ने की फिराक में है या फिर वो डोकलाम में एक सीमित और छोटा युद्ध छेड़कर दुनिया में अपनी ताकत  दिखाना चाहता है?

डोकलाम में डरा नहीं पाया था ड्रैगन

डोकलाम पर सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन की सेना ने आमने-सामने रह कर 73 दिन बिता दिए थे. ये माना जा रहा था कि चीन डोकलाम में एक सीमित युद्ध छेड़ सकता है ताकि वो एशियाई प्रभुत्व को लेकर अपने दावे को पुख्ता कर सके लेकिन पहली दफे उसे भारत से ऐसी चुनौती मिली जिसकी उसे कल्पना नहीं थी.

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चीन की सेना ने भारत का मनोबल तोड़ने के लिए हर बड़ी धमकी का इस्तेमाल किया. ये तक कहा कि भारत साल 1962 की जंग को न भूले. लेकिन जंग की धमकियों के बावजूद भारतीय सेना ने कदम पीछे नहीं हटाए और मोर्चे पर सीना तान कर डटी रही. एक तरफ सीमा पर भारत लगातार चीन पर दबाव बनाता रहा तो कूटनीतिक रास्तों के जरिए भारत सरकार चीन के साथ बातचीत भी करती रही. आखिरकार 16 जून 2017 से शुरू हुई डोकलाम पर तनातनी तकरीबन ढाई महीने बाद खत्म हुई. दोनों देश सेना पीछे हटाने के लिए राजी हो गए. चीन ने भी विवादित क्षेत्र में सड़क बनाना बंद कर दिया और साजो सामान के साथ वापस लौट गई.

pm modi china

सड़क बनाने को लेकर ही विवाद शुरू हुआ था जो बाद में सहमति के रास्ते वापस लौट गया. इसे भारत की कूटनीतिक जीत भी माना गया तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये भी संदेश गया कि एशिया में चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने का केवल भारत के पास माद्दा है. डोकलाम के बाद ही ब्रिक्स देशों का सम्मेलन भी शुरू हो गया. चीन के दौरे पर भारत और चीन ने मजबूत संबंधों की वकालत की. बदलते घटनाक्रम से डोकलाम गुजरा हुआ कल बन गया.

डोकलाम पार्ट टू के लिए तैयार है भारतीय सेना

लेकिन चीन की इस हरकत से एक बार फिर 'डोकलाम का ड्रैगन' सामने आता दिख रहा है. हालांकि भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत डोकलाम के पठार पर चीन की संदिग्ध गतिविधियों को गंभीर नहीं मानते हैं. वो ये जरूर मानते हैं कि चीन की सेना डोकलाम पर मौजूद है लेकिन उनकी तादाद ज्यादा नहीं हैं. साथ ही उनका ये भी कहना है कि अब भारत और चीन के संबंध डोकलाम को पीछे छोड़ चुके हैं.

General Bipin Rawat Chief of Army Staff

रावत का कहना है कि डोकलाम के तनाव के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने की प्रक्रिया में बड़ी सफलता मिली है. इसके बावजूद अगर चीनी सैनिक दोबारा डोकलाम के विवादित क्षेत्र में आते हैं तो उनका सामना करने के लिए भारतीय सेना तैयार है.

हाल ही में रावत के बयान को लेकर चीन की तल्खी भी सामने आई थी. सेना प्रमुख ने कहा था कि इस वक्त जरूरत चीन से सटी सीमाओं पर ध्यान देने की है. चीन ने इसे सीमा पर शांति कायम रखने के लिए बनी आम सहमति के खिलाफ बताया था. लेकिन आर्मी चीफ का बयान चीन के आक्रमणकारी विस्तारवादी तरीकों को लेकर साफ था. डोकलाम विवाद के बाद अरुणाचल प्रदेश में ट्यूटिंग और लद्दाख में पेंगोंग झील के पास जिस तरह से चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की थी उसे देखते हुए चीन से जुड़ी सीमा के हर इलाके पर सघन गश्त और फोकस की सख्त जरूरत है. लेकिन चीन ने जानबूझकर बात का बतंगड़ बनाने की कोशिश की ताकि हालात को बिगाड़ने का काम शुरू किया जा सके. अब डोकलाम पर जिस तरह से चीन सैनिकों और हथियारों की तैनाती कर रहा है वो उसके किसी नए षडयंत्र की तरफ इशारा करता है.

पाकिस्तान के इशारे पर डोकलाम पर दांव?

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदलते रिश्तों के घटनाक्रम को देखते हुए इसे चीन की नई चाल माना जा सकता है. जिस तरह से अमेरिका ने पाकिस्तान की आर्थिक मदद रोक कर फटकार लगाई है तो पाकिस्तान को खुश करने के लिए चीन डोकलाम के जरिए भारत को परेशान करने की कोशिश कर सकता है.

china support pak

कई अरब डॉलरों की योजनाओं के चलते चीन की जान पाकिस्तान में अटकी हुई है. अकेले पड़े पाकिस्तान के सबसे बड़े मददगार के रूप में चीन साथ है. पाकिस्तान ये जानता है कि अमेरिका के बदलते रुख के पीछे भारत का ही बड़ा हाथ है. भारत ने ही पाकिस्तान को आंतक के मुद्दे पर घेर कर अलग-थलग कर दिया है. पाकिस्तान लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन कर सीमा पर फायरिंग कर रहा है. ऐसे में बहुत मुमकिन है कि भारत को दो मोर्चों पर घेरने के लिए पाकिस्तान चीन के साथ डोकलाम को लेकर सौदेबाजी कर सकता है. उधर चीन भी भारत के साथ अमेरिका, जापान और इजरायल की बढ़ती दोस्ती को तौलने के लिए डोकलाम पर दांव खेल सकता है. इसके जरिए वो इशारों इशारों में अमेरिका को अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर सकता है. चीन ये जानता है कि डोकलाम पर भारत लंबा युद्ध करने की स्थिति में नहीं होगा.

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बेशक चीन ताकतवर है लेकिन भारत अब कमजोर नहीं. ये कहना है आर्मी चीफ का. आर्मी चीफ के इस बयान को समझने की कोशिश करें तो साफ है कि अबकि अगर 'डोकलाम का ड्रैगन' फिर लौटा तो हिसाब नए सिरे से होगा. फिलहाल आर्मी चीफ के उस बयान को ही सच होते देखना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है कि डोकलाम में मौजूद चीनी सैनिक सर्दियों के बाद वापस लौट जाएंगे.

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