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आसमान में तीन 'आर्टिफिशयल चांद' लटकाएगा चीन, सड़कों को करेंगे रोशन

2022 तक चीन अंतरिक्ष में तीन कृत्रिम चांद लॉन्च करेगा. कृत्रिम चांद शीशे से बने उपग्रह होंगे, जिनसे टकराकर सूर्य की किरणें धरती पर पहुंचेंगी

Updated On: Oct 19, 2018 10:11 AM IST

FP Staff

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आसमान में तीन 'आर्टिफिशयल चांद' लटकाएगा चीन, सड़कों को करेंगे रोशन
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जब आप सोचते हैं कि दुनिया में बहुत सी ऐसी एडवांस तकनीक आ गई हैं, जो आज से कुछ सालों पहले तक सोची नहीं जा सकती थी, तब चीन कुछ ऐसे आइडिया के सामने आ जाता है, जो आपको लाजवाब कर सकती हैं.

खबर है कि चीन अब अपने आसमान में तीन नकली चांद लगाने वाला है. वो भी किसलिए, सड़कों को रोशन करने के लिए. चीन इससे अंतरिक्ष में बड़ी ऊंचाई पर पहुंचने की तैयारी में है. चीन इस प्रोजेक्ट को 2020 तक लॉन्च करना चाहता है. ये प्रोजेक्ट पहले ही चेंगदू एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम रिसर्च इंस्टीट्यूट कॉर्पोरेशन डेवल कर रहा है.

एक रिपोर्ट के अनुसार 2022 तक चीन अंतरिक्ष में तीन कृत्रिम चांद लॉन्च करेगा. कृत्रिम चांद शीशे से बने उपग्रह होंगे, जिनसे टकराकर सूर्य की किरणें धरती पर पहुंचेंगी.

बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, ये कृत्रिम चांद असली चांद से आठ गुना ज्यादा चमकदार होंगे. ये इतने चमकदार होंगे कि चीन को सड़कों और गलियों में स्ट्रीटलाइट लगाने की जरूरत नहीं होगी. ये चांद सड़कों को रोशन करके रखेंगे.

एक अधिकारी ने बताया कि इन कृत्रिम चांद की रोशनी स्ट्रीट लाइट्स को बदलने के लिए पर्याप्त होगी. कृत्रिम उपग्रहों को 2022 में लॉन्च किया जाएगा. इसके बाद तीनों उपग्रहों कों 360 डिग्री की कक्षा में इस तरह बांटा जाएगा कि प्रत्येक क्षेत्र को 24 घंटे रोशन रखा जा सके.

इन चांद से 8 से 10 किलोमीटर की दूरी तक के क्षेत्रों को देर शाम में होने वाली रोशनी जैसी रोशनी से रोशन किया जा सकेगा.

अधिकारी ने कहा, 'परिवर्तित सूर्य की किरणें 3600 वर्ग किलोमीटर से 6400 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर कर सकती है और इसकी रोशनी चंद्रमा की रोशनी से 8 गुना अधिक होने की संभावना है.'

चूंकि इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण पर बहुत तरीके से असर पड़ने की भी संभावना है. इस बारे में पूछे जाने पर कृत्रिम चांद जानवरों और पेड़-पौधों के सामान्य दिन-रात के चक्र में बाधा डालेगा तो अधिकारी ने कहा कि रोशनी की तीव्रता और समय को एडजस्ट किया जा सकेगा और रोशनी को मीटर की सटीकता से कंट्रोल किया जा सकता है. जब कृत्रिम चांद चक्कर लगा रहा होगा तो लोगों को केवल एक चमकदार तारा आकाश में दिखाई देगा.

बता दें कि यूएस और रूस ने मानव निर्मित चांद की खोज की थी ताकि रात के समय को सुविधाजनक बना सके. 1990 में रूस ने इसके लिए एक उपग्रह भी छोड़ा था लेकिन यह प्रयोग सफल नहीं हुआ.

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