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ताइवान के तराजू में चीन की दुश्मनी तौल रहे हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप की 'ताइवान नीति" क्या बदल डालेगी 'वन-चाइना पॉलिसी' ?

Updated On: Dec 13, 2016 11:00 AM IST

Kinshuk Praval Kinshuk Praval

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ताइवान के तराजू में चीन की दुश्मनी तौल रहे हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप की 'ताइवान नीति' क्या बदल डालेगी 'वन-चाइना पॉलिसी'?  ये सवाल दुनिया में उथल-पुथल करने के लिये काफी है. अमेरिका के अगले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन को लेकर अपनाई गई सख्ती से यही सामने आ रहा है.

फॉक्स न्यूज के साथ इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने  कहा है कि अमेरिका को 'वन चाइना पॉलिसी' से बंधकर रहने की जरूरत नहीं है. ट्रंप का कहना है कि चीन की तरफ से रियायतें मिले बगैर इस नीति को जारी रखने का कोई मतलब नहीं है.

दरअसल 'वन चाइना पॉलिसी' के तहत अमेरिका ये मानता आया है कि ताइवान चीन का हिस्सा है. दोनों देशों के बीच आपसी संबंधों की बुनियाद भी 'वन चाइना पॉलिसी' पर ही टिकी है. 'वन चाइना पॉलिसी' के तहत चीन नाम का एक ही राष्ट्र है. ताइवान अलग देश नहीं बल्कि उसका एक प्रांत है. इस नीति के तहत अमेरिका ताइवान के बजाए चीन से आधिकारिक रिश्ते रखता है.

Former U.S. President Jimmy Carter delivers a lecture on the eradication of the Guinea worm, at the House of Lords in London

जिमी कार्टर. (रायटर इमेज)

1979 में जिमी कार्टर ने खत्म किए थे रिश्ते

1979 में अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर ने ताइवान के साथ कूटनीतिक संबंध खत्म कर लिए थे.अमेरिका का कहना था कि वो ताइवान को चीन के हिस्से के रूप में देखता है. इसी के बाद अमेरिका-चीन रिश्तों में गर्माहट बढ़ी.

लेकिन चीन की इस कूटनीतिक चाल की वजह से ताइवान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया. दुनिया के ज्यादातर देश उसे स्वतंत्र देश नहीं मानते हैं. जबकि चीन को ये यकीन है कि एक दिन ताइवान उसकी सरपरस्ती के सामने घुटने टेक देगा और उसका हिस्सा बन जाएगा.

चीन ने ताइवान को 'वन कंट्री टू सिस्टम' का प्रस्ताव भी दिया था जिसके तहत स्वायत्तता की कीमत पर ताइवान को चीन का हिस्सा बनना था. लेकिन ताइवान ने प्रस्ताव ठुकरा दिया जिसके बाद दोनों के रिश्ते तनावपूर्ण होते चले गए.

लेकिन बदलते दौर के साथ अमेरिका ताइवान का बड़ा दोस्त बनता चला गया. अमेरिकी कांग्रेस ने 'ताइवान रिलेशन एक्ट' पास कर ताइवान के लिये हथियारों की मदद का दरवाजा खोल दिया. साथ ही ये भी तय हुआ कि ताइवान पर चीन के किसी भी हमले को अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा.

U.S. President-elect Donald Trump speaks at a "Thank You USA" tour rally in Grand Rapids

डोनाल्ड ट्रंप (रायटर इमेज)

ट्रंप ने बदला है रुख

अब ताइवान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के फायदे के तराजू में चीन की दुश्मनी तौल रहे हैं. खास बात ये है कि अमेरिका की मौजूदा सरकार ने भी ट्रंप के बयान पर विरोध जताया है.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जॉश एर्नेस्ट का कहना है कि ताइवान को लेकर बयान अमेरिका और चीन के बीच हुई संबंधों की प्रगति पर असर डाल सकते हैं.

वहीं अमेरिकी अखबार गार्डियन  के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ताइवान पर चीन की नसों का परीक्षण कर बीजिंग के साथ अमेरिका के संबंधों में अनिश्चितता और अप्रत्याशित माहौल पैदा कर रहे हैं. ये ठीक उन अमेरिकी राष्ट्रपतियों के विपरीत है जो कि आमतौर पर प्रतिकूल प्रतिद्वंद्वी महाशक्तियों के साथ काम करने के लिए करते थे.

गार्डियन की रिपोर्ट  

लेकिन अब ट्रंप भला किसकी परवाह करने वाले. ट्रंप अपने जिस बेबाक अंदाज को लेकर चुनाव लड़े और जीते,अब उसी छवि का ब्रांड वो इंटरनेशनल रिलेशन पर भी आजमा रहे हैं. ड्रैगन को घेरने के लिये ताइवान अब ट्रंप के लिये 'ट्रंप कार्ड' है.

ताइवान पर अपने इंटरव्यू से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने ताइवान की राष्ट्रपति सांई इंग वेन से फोन पर बात कर चीन की त्योरियां चढ़ा दी थीं.

ड्रैगन अब नाराज है. गुस्साए चीन ने पलटवार करते हुए कहा है कि अगर अमेरिका ताइवान के नाम पर सौदेबाजी करेगा तो चीन भी अमेरिका के दुश्मन देशों को सैन्य सहायता देने में पीछे नहीं हटेगा.

China's President Xi Jinping speaks to the media after a signing bilateral agreements with Chile's President Michelle Bachelet during a meeting at the government house in Santiago

शी जिनपिंग (रायटर इमेज)

चीन ने दी अमेरिका को धमकी

ग्लोबल टाइम्स में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक 'अगर ट्रंप वन चाइना' पॉलिसी को छोड़ते हैं और सार्वजनिक तौर पर ताइवान की आजादी का समर्थन करते हैं और ताइवान को हथियार बेचते हैं तो चीन के पास वॉशिंगटन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझेदारी रखने की कोई वजह नहीं बचेगी.'

ग्लोबल टाइम्स का संपादकीय

संपादकीय में लिखा गया कि जब फॉक्स न्यूज नेटवर्क ने ताइवान के बारे में सवाल किया तब ट्रंप ने कहा कि, 'मैं वन चाइना पॉलिसी पूरी तरह समझता हूं. लेकिन मुझे नहीं मालूम कि अगर हम व्यापार समेत अन्य चीजों के लिए चीन के साथ सौदा नहीं कर पाते है तो फिर हम 'वन चाइना पॉलिसी' से क्यों बंधे हैं.'

ग्लोबल टाइम्स ने साथ ही ट्रंप के ताइवान की राष्ट्रपति साइ इंग वेन को फोन करने पर सवाल उठाए. उसने लिखा कि फोन पर 'ताइवानी राष्ट्रपति' कह कर संबोधन करना संदेह पैदा करता है कि बिजनेसमैन से राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप 'वन चाइना पॉलिसी' की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगे.

लेकिन डोनाल्ड ट्रंप चीन को लेकर अपनी आक्रमक पॉलिसी के साथ तैयार हैं. उनका कहना है कि चीन हुक्म नहीं चला सकता. ट्रंप के पास चीन को जवाब देने के लिए दक्षिण चीन सागर है तो ट्रंप को चीन को चुप कराने के लिये उत्तरी कोरिया की बढ़ती परमाणु ताकत है जिसके पीछे चीन का खुला हाथ है.

डोनाल्ड ट्रंप अभी व्हाइट हाउस में नहीं पहुंचे हैं लेकिन उसके पहले उनके इरादों की धमक दुनिया में सुनाई देने लगी है. दुनिया ने अब ये सोचना शुरू कर दिया है कि अमेरिकी और चीन के बीच अगर रिश्ते खराब होते हैं तो फिर नतीजे क्या सामने आएंगे?

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