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भारतीय सैनिकों के साथ प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना ने किया था भेदभाव

उन्होंने दावा किया है कि 20वीं शताब्दी के इस युद्ध में ब्रिटेन की सेना के साथ लड़ने वाले भारतीय उपमहाद्वीप के सैनिकों के साथ पक्षतापूर्ण रवैया अपनाया गया था

Updated On: Sep 23, 2018 07:19 PM IST

Bhasha

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भारतीय सैनिकों के साथ प्रथम विश्वयुद्ध में ब्रिटिश सेना ने किया था भेदभाव

प्रथम विश्ववयुद्ध के सौ वर्ष पूरे होने पर ब्रिटेन में आयोजित कार्यक्रम में कई भारतीय कलाकार भी पहुंचे हैं. उन्होंने दावा किया है कि 20वीं शताब्दी के इस युद्ध में ब्रिटेन की सेना के साथ लड़ने वाले भारतीय उपमहाद्वीप के सैनिकों के साथ पक्षतापूर्ण रवैया अपनाया गया था. उनका कहना है कि इस बात का खुलासा युद्ध के दौरान के दस्तावेजों से हुआ है.

दिल्ली स्थित ‘रक्स मीडिया कलेक्टिव’ के कलाकारों ने ‘आब्जर्वर’ को बताया कि ब्रिटिश पुस्तकालय से प्राप्त दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है. उनके मुताबिक ब्रिटिश सशस्त्र बलों ने भारतीय सैनिकों के बीच मनोवैज्ञानिक समस्याओं के इलाज की उपेक्षा की. ब्रिटिश सशस्त्र बलों ने युद्धक्षेत्र में अनुभवों से सदमे में आए सैनिकों के इलाज में असामान व्यवहार अपनाया था.

रक्स के एस. सेनगुप्ता ने कहा, ‘बम गिरने से मानसिक आघात की स्थिति का सबसे पहले पता 1915 में अंग्रेज चिकित्सक चार्ल्स मेयर्स ने लगाया था. हालांकि हमें ब्रिटिश पुस्तकालय से जो दस्तावेज मिले हैं. उससे हमें पता चला कि मेयर्स ने यह शब्दावली तुरंत ही छोड़ दी क्योंकि उन्हें डर था कि सामान्य सैनिकों को यह समझने में आसान होगा और वे चिकित्सक से दिखाने के लिए कहेंगे.’

उन्होंने कहा, ‘इसके बजाय उन्होंने एक अधिक अस्पष्ट स्थिति एनवाईडी या ‘नॉट येट डायग्नास्ड सुझाया जिसे समझने में सामान्य सैनिकों को मुश्किल हो.’

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