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बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी BNP लड़ेगी चुनाव, गड़बड़ी के डर से नहीं करेगी बहिष्कार

बांग्लादेश की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की अगुवाई वाली मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी ने कहा कि वह अगले महीने होने वाले आम चुनाव का गड़बड़ी के डर से बहिष्कार नहीं करेगी.

Updated On: Nov 11, 2018 09:54 PM IST

Bhasha

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बांग्लादेश की विपक्षी पार्टी BNP लड़ेगी चुनाव, गड़बड़ी के डर से नहीं करेगी बहिष्कार

बांग्लादेश की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की अगुवाई वाली मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी ने कहा कि वह अगले महीने होने वाले आम चुनाव का गड़बड़ी के डर से बहिष्कार नहीं करेगी. उसने 2014 के चुनाव में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया था और तब प्रधानमंत्री शेख हसीना की आवामी लीग सत्ता में लौटी थी.

विपक्षी दलों ने चिंता प्रकट की है कि चुनाव लोकतांत्रिक नहीं होंगे और उन्होंने प्रदर्शन की धमकी दी है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) नव गठित विपक्षी गठबंधन-नेशनल यूनिटी फ्रंट (एनयूएफ) का हिस्सा है. एनयूएफ मांग कर चुका है कि 23 दिसंबर को होने वाले चुनाव को एक महीने के लिए टाला जाए.

बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कहा, 'हमने अपने आंदोलन के तहत चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया है.' प्रधानमंत्री हसीना ने तत्काल विपक्षी पार्टी के फैसले का यह कहते हुए स्वागत किया कि, 'इससे लोकतंत्र मजबूत होगा. हम जनादेश को परलक्षित करने के लिए साथ चुनाव लड़ेंगे.' आवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर ने कहा कि यदि चुनाव आयोग चुनाव की तारीख टालता है तो उनकी पार्टी को कोई ऐतराज नहीं होगा.

23 दिसंबर को मतदान

एनयूएफ ने चुनाव टालने की मांग करते हुए चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा है. मुख्य चुनाव आयुक्त नुरु हुदा ने कहा कि आयोग कल इस मामले पर निर्णय लेगा. बीएनपी की घोषणा ऐसे समय आई है जब महज तीन दिन पहले चुनाव आयोग ने सरकार और मुख्य विपक्ष गठबंधन के बीच चुनाव के समय को लेकर जारी गतिरोध के बीच चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की थी और कहा था कि 23 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे.

एनयूएफ के संयोजक मशहूर वकील कमल हुसैन ने चुनाव में विपक्ष के भाग लेने पर चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा, 'बिल्कुल प्रतिकूल स्थिति होने के बाद भी जातिया ओकया फ्रंट ने लोकतंत्र बहाल करने के अपने आंदोलन के तहत चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया है.'

बीएनपी ने चुनाव पर निगरानी के लिए अंतरिम सरकार की योजना पर आवामी लीग से विवाद के चलते 2014 के चुनाव का बहिष्कार किया था. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विपक्ष अंतरिम सरकार का मार्ग प्रशस्त करने के लिए चुनाव टालने की मांग कर रहा है. प्रधानमंत्री हसीना ने पहले कहा था कि गैर निर्वाचित सरकार से ‘तीसरे पक्ष की दखल’ की स्थिति पैदा होती है जैसा कि 2007 में राजनीतिक रिक्तिता की स्थिति में सेना समर्थित अंतरिम सरकार आने से सेना ने एक तरह से कमान संभाल ली थी.

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