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47 हजार सालों बाद 'बर्फीली नींद' से जगे केंचुएं, उठते ही खाना ढूंढने लगे

नीमेटोड्स नाम से जाने जाने वाले ये केंचुएं रिसर्चर्स की एक टीम को एक साइबेरियन परमाफ्रॉस्ट (बर्फ,पत्थर और मिट्टी से बने जमीन का टुकड़ा) में जमे हुए मिले थे

Updated On: Jul 28, 2018 05:56 PM IST

FP Staff

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47 हजार सालों बाद 'बर्फीली नींद' से जगे केंचुएं, उठते ही खाना ढूंढने लगे

दुनिया को अब तक की सबसे पुराने जीवित ऑर्गेनिज्म मिले हैं और ये हैं दो राउंडवॉर्म यानी केंचुएं. आइस एज यानी हिमयुग के वक्त के ये केंचुएं 47,000 हजार सालों से बर्फ में जमे हुए थे. अब रिसर्चर्स के हाथ लगने के बाद जब वो नींद से जगे तो तुरंत उठकर ऐसे खाना ढूंढने और खाना खाने लगे जैसे, कुछ हुआ ही नहीं हो.

नीमेटोड्स नाम से जाने जाने वाले ये केंचुएं रिसर्चर्स की एक टीम को एक साइबेरियन परमाफ्रॉस्ट (बर्फ,पत्थर और मिट्टी से बने जमीन का टुकड़ा) में जमे हुए मिले थे. ये परमाफ्रॉस्ट 42,000 साल पहले जम गया रहा होगा. इस रिसर्च में प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक भी शामिल थे.

ये सैंपल रूस के सबसे ठंडे जगहों में से एक यकूतिया से लिए गए थे. इस बर्फ के टुकड़े में 300 के आसपास केंचुएं थे लेकिन उनमें से बस दो ही 'दोबारा जिंदा' हो पाई हैं. रिसर्चर्स ने इस घटना को ऐतिहासिक करार दिया है.

वैज्ञानिकों ने कहा कि ये साफ है कि प्लीस्टोसीन युग के नीमेटोड्स में एक अनुकूलन क्षमता है जो क्रायोमेडिसिन, क्रायोबायोलॉजी और एस्ट्रोबायोलॉजी जैसे क्षेत्रों के लिए व्यावहारिक और वैज्ञानिक महत्व रखता है.

यूं तो वैज्ञानिक इंसानों के लिए भी क्रायोजेनिक तकनीक की इस्तेमाल की संभावना की तलाश कर रहे हैं. लेकिन इस घटना के बाद ये सवाल फिर सामने आएगा कि अगर केंचुएं इतने सालों तक जमे रह सकते हैं और जिंदा हो सकते हैं तो क्या इंसान भी हो सकते हैं? अभी तक इंसानों को जमाने और दोबारा जिंदा किए जाने का कोई तरीका नहीं है लेकिन प्रयोग जारी हैं.

इस मामले में ऐसा पहला केस है. 2016 में इंग्लैंड की एक 14 साल की बच्ची को कैंसर था, जिस पर वहां के कोर्ट ने ये फैसला दिया कि उसकी बॉडी संरक्षित कर दिया जाए, ताकि जब उसकी बीमारी का इलाज ढूंढ लिया जाए, तब उसे दोबारा जिंदा किया जा सके. उस बच्ची की मौत के बाद उसे क्रायोजेनिक तकनीक से जमा दिया गया और अभी उसकी बॉडी अमेरिका के एक लैब में है.

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