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इंकम टैक्स डिपार्टमेंट की दुबई में महंगे घर खरीदने वाले 7,500 लोगों पर नजर

भारतीय कानूनों के तहत, भारतीयों द्वारा दुबई में संपत्ति का स्वामित्व गैरकानूनी नहीं है. 1999 के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के अनुसार, निवासी और अनिवासी भारतीयों को विदेशों में अचल संपत्तियों रखने की अनुमति है

Updated On: Oct 19, 2018 04:03 PM IST

FP Staff

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इंकम टैक्स डिपार्टमेंट की दुबई में महंगे घर खरीदने वाले 7,500 लोगों पर नजर
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इंकम टैक्स डिपार्टमेंट ने पिछले कुछ वर्षों में दुबई में महंगी संपत्तियां खरीदने वाले कम से कम 7,500 भारतीयों के खिलाफ जांच शुरू की है. इंकम टैक्स डिपार्टमेंट की खुफिया और आपराधिक जांच (आई एंड सीआई) शाखा ने ऐसे भारतीय नागरिकों का डेटा प्राप्त किया है जिन्होंने दुबई में रियल एस्टेट में निवेश किया है. साथ ही विदेशों में ऐसे निवेश किए गए धन के स्रोतों की भी जांच कर रहे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक टैक्स ऑथोरिटी इसकी भी जांच कर रही है कि क्या उन भारतीयों द्वारा अधिग्रहित इन रियल एस्टेट परिसंपत्तियों को अपने टैक्स एजेंसी को घोषित किया गया है या नहीं.

दुबई लैंड डेवलेपमेंट के अनुसार, 2018 के पहले तीन महीनों में दुबई में कम से कम 1,387 भारतीय नागरिकों ने निवेश किया है. इन्होंने दुबई में 1,550 अचल संपत्ति का लेनदेन कर करीब 3 अरब दिनार का निवेश किया है. सिर्फ 2017 में ही भारतीय निवेशकों ने दुबई में 15.6 बिलियन दिनार का निवेश किया था. दुबई लैंड डेवलेपमेंट के आंकड़ों के अनुसार, 2013 और 2017 के बीच पांच वर्षों में, भारतीय नागरिकों ने दुबई में 83.65 बिलियन दिनार की संपत्ति खरीदी है.

विदेशों में संपत्ति रखना गैरकानूनी नहीं:

भारतीय कानूनों के तहत, भारतीयों द्वारा दुबई में संपत्ति का स्वामित्व गैरकानूनी नहीं है. 1999 के विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के अनुसार, निवासी और अनिवासी भारतीयों को विदेशों में अचल संपत्तियों रखने की अनुमति है. भारतीय रिजर्व बैंक एक व्यक्ति को विदेशों में संपत्तियों और प्रतिभूतियों के रुप में सालाना $250,000 तक के निवेश की इजाजत देता है. हालांकि, भारतीय कर नियम के अनुसार भारत के निवासियों और सामान्य निवासियों को वित्तीय वर्ष 2011-12 के बाद से विदेशी संपत्ति अनुसूची के तहत आईटी रिटर्न में अपनी विदेशी संपत्तियों का खुलासा करना भी जरूरी है.

2015 में काला धन (अनजान विदेशी आय और परिसंपत्तियों) कर अधिनियम (ब्लैक मनी एक्ट) लागू होने के साथ, विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं करने पर टैक्स और जुर्माना लगाने का प्रावधान है.

 

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