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भारत ने श्रीलंका में बसे भारतीय मूल के लोगों को 404 घर सौंपे

60,000 घरों में से अब तक 47,000 के करीब पूरे हो चुके हैं. उम्मीद है कि अतिरिक्त 10000 घरों का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा: पीएम मोदी

Updated On: Aug 12, 2018 08:03 PM IST

FP Staff

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भारत ने श्रीलंका में बसे भारतीय मूल के लोगों को 404 घर सौंपे

भारत ने श्रीलंका के चाय बागान क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए 350 मिलियन अमरीकी डालर की लागत से बनाए गए घरों की पहली खेप सौंप दी है. इन भारतीयों में ज्यादातर तमिल नागरिक हैं. इस विशेष समारोह में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए. श्रीलंका के नुवारा एलिया शहर में स्थित ड्यूनसिनान एस्टेट में भारतीय आवास परियोजना के तहत बनाए गए घरों को सौंपा गया. ये भारत द्वारा किसी भी देश में बनाया गया सबसे बड़ा हाउसिंग प्रोजेक्ट है.

न्यूज़ 18 के मुताबिक भारतीय मूल के लोगों जिनमें से ज्यादातर तमिल हैं को लगभग 404 घर हस्तांतरित किए गए. भूमि के मालिकाना हक़ के साथ नए घरों को प्रधान मंत्री रानिल विक्रमासिंघे, भारत के उच्चायुक्त तरंजित सिंह संधू, मंत्री पलानी दिगांबरम, नवीन दीसानायक और गयंथा करुणथिलेक ने सौंपा. पीएम मोदी ने कहा कि,'भारत ने नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी के तहत् श्रीलंका को विशेष स्थान पर रखना जारी रखा है. उम्मीद है कि अतिरिक्त 10000 घरों का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा. 60,000 घरों में से अब तक 47,000 के करीब पूरे हो चुके हैं.'

प्रधानमंत्री ने कहा- 'ये सिर्फ भौतिक संरचनाएं नहीं हैं बल्कि ये आपके और हमारे सपने पूरे हुए हैं. हमने श्रीलंका के लिए शांतिपूर्ण और सुरक्षित भविष्य का सपना देखा है जहां विकास की आकांक्षाएं पूरी की जाती हैं.'

साथ ही उन्होंने कहा- 'घर बनाने के लिए 350 मिलियन अमरीकी डालर का अनुदान, किसी भी देश में भारत द्वारा सबसे बड़ा अनुदान है. श्रीलंका हमारे लिए स्पेशल था और रहेगा.'

विक्रमासिंघे ने विकास परियोजनाओं में श्रीलंका के साथ साझेदारी करने के लिए भारत की वचनबद्धता की सराहना की. विक्रमेसिंघे ने कहा, 'मैं प्रधान मंत्री मोदी का धन्यवाद करता हूं. उन्होंने पिछले साल किए गए अपने वादे को पूरा किया.'

भारतीय मूल के तमिल, जिनमें से ज्यादातर श्रीलंका के चाय और रबर बागानों में काम करते हैं उनके पास रहने के लिए घर तक नहीं होते. तमिलों को 19वीं शताब्दी के दौरान श्रीलंका में कॉफी बागानों में काम करने के लिए ब्रिटिश शासकों द्वारा भारत से यहां लाया गया था. आज भी दस लाख से अधिक लोग चाय और रबर बागानों से जुड़े हुए हैं. हालांकि उन्हें श्रीलंकाई नागरिकता दी गई है, लेकिन रोज़गार मजदूरों के रूप में कार्यरत इन श्रमिकों के लिए आवास आज भी एक प्रमुख मुद्दा बना हुआ है.

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