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फर्जी खबरों से निपटने के लिए Whatsapp ने की बड़ी तैयारी, रिसर्च के लिए बनाई 20 टीमें

पिछले दिनों भारत सरकार ने वॉट्सऐप को निर्देश दिया था कि वो झूठी खबरों और कभी-कभी भड़का देने वाले मैसेजेज के खिलाफ उपाय ढूंढे.

Updated On: Nov 13, 2018 05:19 PM IST

FP Staff

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फर्जी खबरों से निपटने के लिए Whatsapp ने की बड़ी तैयारी, रिसर्च के लिए बनाई 20 टीमें

वॉट्सऐप नकली और फर्जी खबरों को रोकने की बड़ी तैयारी में लगे हैं. वाट्सऐप ने मंगलवार के दिन ऐलान किया कि उन्होंने दुनिया भर के रिसर्चर्स की 20 टीमें बनाई हैं. इनमें से कई भारत के हैं और कुछ भारत से जुड़े लोग हैं. ये सभी लोग इस विषय पर काम करेंगे कि कैसे फर्जी जानकारी फैलने लगती है और वॉट्सऐप को इन झूठी खबरों से लड़ने के लिए क्या-क्या कदम उठाने होंगे.

फर्जी खबरें रोकने के लिए रिसर्चर्स की ये टीम फिलहाल कई रिसर्च पेपर पर काम करेंगी. इस पेपर का नाम है 'WhatsApp Vigilantes? WhatsApp messages and mob violence in India'. इस रिसर्च पेपर पर काम करने के लिए लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस (LSE) के शकुंतला बानाजी और रामनाथ भट्ट और बेंगलुरु के Maraa (मीडिया संस्थान) के निहल पसंहा को चुना गया है.

इस पेपर में ये तीनों रिसर्चर इस बात पर रिसर्च करेंगे कि वॉट्सऐप पर आए मैसेज पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया रहती है? क्या वजह है कि लोग भीड़ बना कर किसी को मार-मार कर उसकी हत्या कर देते हैं? अभी तक 'वॉट्सऐप लिंचिंग' के चलते 30 लोगों की हत्या हो चुकी है. इन सभी लोगों को वॉट्सऐप पर फैली अफवाह की वजह से मार डाला गया.

पिछले दिनों भारत सरकार ने वॉट्सऐप को निर्देश दिया था कि वो झूठी खबरों और कभी-कभी भड़का देने वाले मैसेजेज के खिलाफ उपाय ढूंढे.

साइबर पीस फाउंडेशन के विनीत कुमार और आनंद राजे, और साइबर कैफे एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CCAOI) की प्रेसिडेंट अमृता चौधरी भी कुछ चुने हुए लोगों में से हैं. यह टीम जिस पेपर पर काम करेंगे वह है 'Digital literacy and impact of misinformation on emerging digital societies'.

द पेंसिलवेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के श्याम सुंदर और सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज के पी. एन. वसंती मिलकर 'Seeing is Believing: Is Video Modality More Powerful in Spreading Fake News' नाम के एक पेपर पर काम करेंगे. इस पेपर में इस बात का पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि क्या झूठी खबरें फैलाने का सबसे कारगर तरीका वीडियो है? क्योंकि देखे हुए पर व्यक्ति आसानी से भरोसा कर लेता है.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के अनुसार, इस साल जुलाई में वॉट्सऐप ने इसके लिए रिसर्च पेपर्स मांगे थे. जिसके बाद दुनिया भर से करीब 600 रिसर्चर्स की टीमें सामने आईं. जिसमें 20 टीमें बना दी गईं.

एक बयान में वॉट्सऐप ने कहा कि 'हर टीम को उनकी रिसर्च के लिए हम 50,000 डॉलर देंगे.'

भारत में रोज होने वाले राजनैतिक बयानें पर वॉट्सऐप की भूमिका पर ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की लिपिका कामरा, क्वीन्स मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन की फिलिपा विलियम्स साथ मिलकर रिसर्च करेंगे.

वॉट्सऐप की लीड रिसर्चर, मृणालिनी राव का कहना है कि वॉट्सऐप अपने यूजर्स की सुरक्षा के बारे में चिंता करता है. वॉट्सऐप के 150 करोड़ मासिक एक्टिव यूजर्स हैं, जिसमें से 20 करोड़ भारत के हैं.

राव ने कहा कि 'हमें खुशी है कि दुनिया भर के एक्सपर्ट से हम सीख पा रहे हैं कि इस तह की परेशानियों से कैसे निपटा जाए'.

ऐसे ही कई पेपर्स पर कई रिसर्चर्स काम करने वाले हैं. समय के साथ ये सभी कुछ अच्छे उपायों के साथ सामने आएंगे.

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