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वैलेंटाइन वीक: क्या आप भी पार्टनर की जगह स्मार्ट फोन चुन रहे हैं

अगर आप को लगता है कि आप अगर अपने पार्टनर के सामने फोन बंद रखते या रखती हैं और सब ठीक है तो ये गलतफहमी है

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee Updated On: Feb 13, 2018 05:36 PM IST

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वैलेंटाइन वीक: क्या आप भी पार्टनर की जगह स्मार्ट फोन चुन रहे हैं

क्या आप वैलेंटाइन वीक में मजबूरी में सिंगल हैं? क्या आपके रिलेशनशिप बहुत जल्दी टूट रहे हैं या टूटने की कगार पर हैं? हो सकता है कि ऐसा आपके जेब में रखे मोबाइल फोन के चक्कर में हो रहा हो. तमाम रिपोर्ट्स ये कन्फर्म कर चुकी हैं कि जीवन से रोमांस खत्म करने का सबसे बड़ा कारण लोगों का स्मार्ट फोन है.

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स्मार्ट फोन की बात करें तो ये रिश्तों को कई तरह से प्रभावित कर रहा है. सबसे पहला असर है कि रिलेशनशिप में पड़ना बहुत आसान हो गया है. इसे निभाना भी आसाना हुआ है. इस आसानी ने बहुता सारी चीजें बदल दी हैं. तमाम तरह के मैसेज के चलते लोग एक दूसरे के करीब जल्दी आ जाते हैं.

इस जल्दबाजी की नजदीकियों में एक समस्या है. स्मार्ट फोन रिलेशन शिप लोग रियल लाइफ इंट्रैक्शन बहुत कम करते हैं. जब साथ होते हैं तब भी फोन में बिज़ी होते हैं या फोन से जुड़ी (इसमें सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप भी जोड़ लें) बातें करते हैं. जिसके चलते रिश्तों में तमाम बातों के बाद भी परिपक्वता नहीं आ पाती है.

समय ही एक समस्या नहीं

अगर आप को लगता है कि आप अगर अपने पार्टनर के सामने फोन बंद रखते या रखती हैं तो सब ठीक है. ये गलतफहमी है स्मार्टफोन आपके रिश्ते में से सिर्फ समय नहीं चुराते हैं. दरअसल आप फोन पर कितना समय बिताते हैं से ज्यादा खतरनाक है कि आप फोन पर कितना निर्भर हैं. आसानी से समझें, हो सकता है कि आप अपने साथी के साथ होने पर फोन कम इस्तेमाल करते हों लेकिन हो सकता है कि आप अपने फोन को लेकर उससे ज्यादा पज़ेज़िव हों.

अगर आपको समय पर साथी के पास पहुंचना हो और आधे रास्ते में याद आए कि आप फोन घर पर भूल आए हैं तो आप क्या चुनेंगे? हो सकता है कि जवाब से पहले ही आप कई अगर मगर लगा दें. ये एक काल्पनिक उदाहरण हैं मगर ऐसा कई बार होता है जब आपके साथी को लगता है कि उसकी अहमियत थोड़ी कम है.

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अगर ऐसा एक से ज्यादा बार होता है तो आपके साथी को लगता है कि आप अपने आपको, अपनी चीज़ों को ज्यादा तवज्जो देते हैं. कुल मिलाकर समस्या फोन पर समय बिताना नहीं, फोन पर निर्भरता है. अगर आपको अभी भी न समझ आया हो तो इस सवाल का जवाब सोचिए. अगर आपको जिंदगी भर 'उसके' बिना और रहने, या जिंदगी भर मोबाइल, फेसबुक और व्हॉट्सऐप के बिना रहने में से एक ऑप्शन चुनना हो तो क्या चुनेंगे?

इन सबके बीच एक और समस्या है. साथी का फोन चेक करना या चेक करने का शक करना. कई बार ऐसा भी होता है कि कोई एक अपना फोन देकर दूसरे से उम्मीद करता है कि वो भी ऐसा करे. मगर इससे अक्सर झगड़े शुरू हो जाते हैं. किसी भी दूसरी चीज़ से अलग फोन व्यक्ति की निजी भावनाओं का फिजिकल रूप बनते जा रहे हैं. ऐसे में दूसरे के इनबॉक्स में दिखने पर कोई एक सामान्य सी चीज़ भी आपत्तिजनक लग सकती है.

ऐसा नहीं है कि फोन का इस्तेमाल किसी भी रिलेशनशिप के लिए पूरी तरह से खराब है. लेकिन इसके नकारात्मक पहलू ज्यादा हैं और किसी भी दूसरे पहलू से ज्यादा प्रभावी हैं. बस इतना करिए कि फोन पर जरूरत भर का समय बिताइए मगर उससे इमोश्नल जुड़ाव मत महसूस करिए. उसमें रखी तस्वीरें, एसएमएस, गाने, ऐसी कोई भी चीज़ नहीं है जो खो जाएगी तो इंटरनेट पर दोबारा नहीं मिलेगी. मगर नीरज के गीत की पंक्ति याद रखिए. कनुप्रिया पढ़ता न वो गीतांजली गाता नहीं है, प्यार का मौसम शुभे, हर रोज तो आता नहीं है...

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