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अलविदा 2017: सराह का बचकानापन, ड्राइवरों का अंत और बिटकॉइन करोड़पति

इस साल कई ट्रेंड रहे जो बचकाने थे मगर आने वाले समय की कई गंभीर चेतावनियां भी इस साल दिखीं

Updated On: Dec 24, 2017 05:50 PM IST

FP Tech

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अलविदा 2017: सराह का बचकानापन, ड्राइवरों का अंत और बिटकॉइन करोड़पति

टेक्नॉलजी के लिए 2017 में कई बड़े पड़ाव रहे. इस साल कुछ ट्रेंड ऐसे थे जिनका चलन कुछ समय के लिए था, कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिनका असर दुनिया पर लंबे समय के लिए रहेगा. मोबाइल फोन और गैजेट के मॉडल तो हर साल आते जाते रहते हैं, इनसे अलग कुछ खास घटनाओं पर नज़र डालते हैं.

क्रिप्टो करेंसी

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2017 की शुरुआत में हम भारतीय नोटबंदी के असर से जूझ रहे थे. ऐसे में पेटीएम और तमाम दूसरे कैशलेस ट्रांजैक्शन के विकल्प अपनाए गए. इसी बीच आम भारतीयों ने पहली बार बिटकॉइन का नाम सुना. उस समय एक बिटकॉइन की कीमत 40,000 के आस-पास थी. साल खत्म होते-होते 10 लाख के ऊपर हो गई. इस बढ़त पर दुनिया दो हिस्सों में बंट गई. एक इसमें निवेश कर रातों-रात करोड़पति बनना चाहते हैं. दूसरे इसे बबल बताकर दूर रहना चाहते हैं. मगर बिटकॉइन पर अब गंभीर तरह से बहस हो रही है. आने वाले समय में इसपर और चर्चा होगी. साथ ही क्रिप्टोकरेंसी पर भी नए आयाम सामने आएंगे.

सराह

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आप किसी से सवाल पूछ सकते हैं. पूछने वाले को आपकी पहचान पता नहीं चलेगी. कहें कि इस साल का सबसे बचकाना बुखार सराह रहा. जितनी तेजी से ये चढ़ा उतनी ही जल्दी गायब भी हो गया. लोगों ने नौकरी मांगी, बॉस को गाली दी. इकतरफा प्रेमिकाओं को प्रस्ताव दिए. तमाम चुगलियां की और भी जाने क्या-क्या किया.

ड्राइवरलेस गाड़ियां

driver less car

दिल्ली मेट्रो की मेजेंटा लाइन में बिना ड्राइवर की गाड़ियां चलेंगी. हालांकि इसके ट्रायल के दौरान एक हादसा हुआ मगर उससे ड्राइवरलेस ट्रांसपोर्ट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. बिना ड्राइवर के ट्रक भी सड़कों पर टेस्ट किए जा रहे हैं. कहा जा रहा है कि आने वाले 2 दशकों में दुनिया से ड्राइवर की नौकरियां खत्म हो जाएंगी.

फेक न्यूज़

FakeNewsInternet

फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर तमाम फेक अकाउंट्स की बाढ़ है. इनके जरिए लोगों को बरगलाने और चुनाव जीतने का प्रोपोगैंडा खूब किया गया. भारत समेत इस तरह की घटनाएं अमेरिका और यूरोप में भी खूब हुईं. इसके बाद फेसबुक और तमाम दूसरी सिलिकॉन वैली कंपनियों ने इससे निपटने की बात कही है. इसके अलावा सोशल मीडिया के चलते लोगों के अंदर बीमारिया, अवसाद बढ़ना भी एक मुद्दा रहा.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस

bots

टेस्ला के सीईओ ने कहा था कि फेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना ठीक नहीं. इस पर फेसबुक की प्रतिक्रिया थी कि टेस्ला के सीईओ एलन मस्क को चीजों की समझ नहीं है.इसके एक ही दो हफ्तों बाद फेसबुक को अपना एक एआई प्रोग्राम बंद करना पड़ा. फेसबुक के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंट बॉट्स ने अपनी एक अलग भाषा विकसित कर ली थी. इसके बाद वो आपस में उसी भाषा में बात करने लगे. ये भाषा उस सिस्टम को बनाने वाले किसी इंजीनियर को न पता थी न समझ आ रही थी. आने वाले सालों में आईटी से लाखों नौकरियां कम होंगी. स्टोर पर डिलीवरी देने और होटल के वेटर की नौकरियां कुछ साल बाद खत्म हो जाएंगी.

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