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क्या तेजी से स्मार्ट होते रोबोट हम सबकी नौकरियां खा जाएंगे

भारत जैसी आउटसोर्स और सर्विस सेक्टर पर आधारित अर्थव्यवस्था के लिए ऑटोमेशन बड़ी चिंता का विषय है

FP Tech Updated On: Nov 20, 2017 05:54 PM IST

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क्या तेजी से स्मार्ट होते रोबोट हम सबकी नौकरियां खा जाएंगे

दुनिया भर की सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री में भारी चिंता है. जिस तरह से ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से विकसित हो रही है, कई लोगों की नौकरियां जाने की आशंका है. भारत जैसे देश में जहां हमारी अर्थव्यवस्था सर्विस सेक्टर और आउटसोर्सिंग पर निर्भर करती है, ये एक बड़ी चिंता का विषय है. आंकड़ों के खेल से अलग एक बुनियादी सवाल पूछा जा सकता है कि क्या रोबोट और बॉट्स के चक्कर में हमारी नौकरियां जाने वाली हैं?

सीधा जवाब है ऐसा होता रहता है

19वीं शताब्दी के अंत में और 20वीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में तेजी से मशीनीकरण हुआ था. कन्वेयर बेल्ट बनीं, बिजली से चलने वाली मशीनें आईं. इमारतों के बनने में सीमेंट मिलाने के लिए ऑटोमैटिक मिक्सचर आया. मजदूरों की जरूरत खत्म हो गई. मगर क्या दुनिया से नौकरियां खत्म हो गईं? जवाब है नहीं.

1980-90 के दशक में कंप्यूटर के भारत में प्रवेश करते समय बड़ा हल्ला हुआ कि नौकरियां नहीं रहेंगी. दस क्लर्क का काम एक कंप्यूटर कर देगा. मगर क्या ऐसा हुआ? जवाब है नहीं.

दरअसल दुनिया में समय-समय पर तकनीक बदलती रहती है. इसके साथ ही मजदूरी के नियम भी. ऐसे में नौकरियों की जरूरत और उनकी उपलब्धता में एक निश्चित अनुपात बना रहता है.

मगर ये राहत की बात नहीं है

90 के दशक तक टेलिफोन ऑपरेटर, स्टेनो, फोटो स्टूडियो, टायपिस्ट लोगों के लिए रोजगार पाने का अच्छा जरिया थे. इसी तरह से पीसीओ घर में रहते हुए कमाई का बड़ा साधन बनते थे. कंप्यूटरीकरण और मोबाइल आने के बाद ये सारे मौके खत्म हो गए. पीसीओ वालों ने सायबर कैफे, रीचार्ज शॉप में खुद को बदलकर अपडेट कर लिया मगर कुछ सालों में वो भी अप्रासंगिक हो गए.

कहने का मतलब ये है कि तकनीक बदलने के लिए एक निश्चित समय लगता है साथ ही कीमत भी, पीसीओ से साइबर कैफे में बदलने में जो लागत और समय लगता है उसे हर कोई नहीं कर सकता. इसके चलते समय-समय पर नौकरियां जाती हैं और मंदी आती हैं.

कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि आने वाला समय मुश्किल तो होगा मगर दुनिया से रोजगार के अवसर हमेशा के लिए खत्म नहीं होंगे. अगर तकनीक सस्ती होगी तो प्रोडक्शन बढ़ेगा और ज्यादा लोग उपभोगता बनेंगे. जब नए उपभोगता बनेंगे तो रोजगार के बिलकुल नए मौके सामने आएंगे. जैसे मोबाइल फोन सस्ते होने के बाद उन्हें बेचने वाले, रिपेयर करने वाले और ऐसे तमाम दूसरे अवसर पैदा हुए.

इसके साथ ही एक बात हमेंशा ध्यान रखिए, अगर किसी के पास नौकरी नहीं होगी तो दुनिया में तमाम कंपनियां किसके लिए प्रोडक्ट बनाएंगी. इसलिए नौकरियां न जाएं इसकी चिंता आपके अलावा दुनिया के बड़े लोगों को भी है. इस पूरे विषय को अच्छे से समझने के लिए आप ये वीडियो भी देख सकते हैं.

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