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3 अप्रैल 2018 को मोबाइल फोन की पहली कॉल हुए 45 साल हो गए हैं. ये पहली कॉल मोटोरोला के फोन से लगाई गई थी. ये फोन आज के फोन की तरह नहीं थे. एक किलो से ज्यादा भारी इस फोन को कार की बैटरी से चार्ज करना पड़ता था. 8 इंच के इस फोन की बैटरी फुल चार्ज होने पर आधा घंटा चलती थी. इसके बाद इसका पब्लिक वर्जन निकाला गया. ये फोन 8 घंटे का बैकअप देता था और तब करीब 2.5 लाख का था. चलिए इस मौके पर नजर डालते हैं कुछ आइकॉनिक मोबाइल फोन मॉडल पर.

नोकिया 1100

नोकिया का 1100 दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले गैजेट्स में एक है. इसमें टॉर्च थी. 50 एसएसएस सेव हो जाते थे. स्नेक वाला गेम था. एक फोन में और क्या चाहिए.
नोकिया 3310

3310 के फीचर एक तरफ रख दीजिए. फोन को किसी पर फेंक कर मारिए. छत से गिरा दीजिए. सेल्फ डिफेंस के औजार की तरह इस्तेमाल कर लीजिए. 3310 ने आपको कभी धोखा नहीं दिया होगा.
एचटीसी ड्रीम

एचटीसी ड्रीम पहला एंड्रॉएड फोन था. इस फोन में छिपा हुआ स्लाइडर की पैड और टच था. एक बॉल थी जिसे घुमाने पर मेन्यू इधर-उधर होता था. ये फोन बेहद खूबसूरत और स्टाइलिश था. इसके बाद ऐंड्रॉएड का जो सफर शुरू हुआ उसने सबको पीछे छोड़ दिया.
ब्लैकबेरी क्वार्क

ब्लैकबेरी क्वार्क में एसएमएस थे. स्पीकर था. लेकिन सबसे खास बाद क्वार्टी की बोर्ड था. इससे ज्यादा टेक्निकल और हेप कुछ नहीं होता.
नोकिया 6600

नोकिया का ये फोन भारी तो था मगर इसमें कई फीचर थे. 64 से 512 एमबी तक के मेमोरीकार्ड लगते थे. इंटरनेट चलता था कैमरा था.
मोटो रेजर

नोकिया के मोबाइल फोन भारी, मोटे और मजबूत होते थे. लेकिन मोटोरोला ने इन्हें खूबसूरत बनाया. एल्यूमिनियम की बॉडी और झटके के साथ खुलने वाला क्लैमशेल ऐसा स्वैग बनाता था जिसने फोन को फैशन से जोड़ा
नोकिया 8110

ये नोकिया का सबसे स्टाइलिश फोन था. इतना स्टाइलिश कि मैट्रिक्स में कियानू रीव्स के पास भी ये फोन था. इसके अलावा भी ये फोन काफी फिल्मों में दिखा. इसका नया वर्जन भी नोकिया ला रही है.
नोकिया कम्युनिकेटर

इस फोन को बड़े-बड़े लोग इस्तेमाल करते थे. ऊपर सामान्य फोन, ज्यॉमेट्री बॉक्स की तरह खोलने पर अंदर पूरा कंप्यूटर का की बोर्ड. उस दौर की फिल्मों में सेटेलाइट जैसी चीजें भी इस फोन से हैक हो जाती थीं.
सैमसंग गैलेक्सी नोट

जब ये फोन लॉन्च हुआ तो 5 इंच के आकार को देखकर सबने कहा कि बहुत बड़ा है. इसके लिए नया शब्द ईजाद हुआ फैब्लेट (फोन+टैब्लेट). शुरुआती मजाक एक तरफ रहे बाद में साबित हो गया कि साइज़ डज़ मैटर.
आईफोन

दुनिया को (सिर्फ मोबाइल की नहीं पूरी दुनिया) दो हिस्सों में बांट सकते हैं. एक आईफोन के पहले और दूसरी आईफोन के बाद. आईफोन आने से पहले टेक्नॉलजी का मतलब था मुश्किल और जटिल होना. जितनी हाईफाई तकनीक उतने सारे बटन. आईफोन में सिर्फ एक बटन था और सबकुछ होता था. सिंपल स्लीक डिज़ाइन और दमदार काम. अभी तक मोबाइल फोन आईफोन के प्रभाव से निकल नहीं पाए हैं. अगला ट्रेंड सेटर क्या होगा देखते हैं.




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