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MIT Research: सच्ची और फर्जी खबरों में फर्क करने आ रहा है ML

मेसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के कुछ रिसर्चर की एक टीम ने machine learning (ML) सिस्टम बनाया है जो फर्जी खबरों पर लगाम लगाएगी

Updated On: Oct 07, 2018 06:49 PM IST

FP Staff

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MIT Research: सच्ची और फर्जी खबरों में फर्क करने आ रहा है ML

इंटरनेट के इस्तेमाल से आज कुछ भी पता लगाया जा सकता है. इससे किसी भी जरूरी खबर को लोगों तक जल्दी और आसानी से पहुंचाया जा सकता है. इंटरनेट की मुश्किल यह है कि फर्जी और सच्ची खबर दोनों को बड़ी आसानी से फैलाया जा सकता है. अभी तक ऐसा कोई टूल नहीं है जिससे सिर्फ सच्ची खबरों को स्प्रेड किया जाए और फर्जी खबरों को रोक लिया जाए.

लेकिन अब यह मुश्किल आसान हो सकती है. मेसाच्यूसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के कुछ रिसर्चर की एक टीम ने एक machine learning (ML) सिस्टम बनाया है. यह मशीन असली और नकली खबर में आसानी से फर्क कर सकती है. रिसर्चर का मानना है कि खबर सही है या नहीं, इसका पता लगाने का तरीका बस यही है कि फैक्ट का पता लगाने के बजाय सीधे खबरों की जड़ तक पहुंचा जाए.

MIT की Computer Science and Artificial Intelligence Lab (CSAIL) के ऑथर ने कहा कि 'अगर किसी वेबसाइट ने कभी भी फर्जी खबर छापी है तो उसके ऐसा दोबारा करने के पूरे आसार हैं. इसलिए ऐसी वेबसाइटों के मौजूदा डाटा को निकल कर हम अपने सिस्टम से यह पता लगाएंगे की ऐसी कौन सी वेबसाइट्स हैं जो ऐसा आगे कर सकती हैं.'

फर्जी खबर छापने वाली वेबसाइट्स पर नकेल

ब्रुसेल्स में इस साल होने वाली Empirical Methods in Natural Language Processing (EMNLP) कॉन्फ्रेंस में पेश होने वाली एक रिपोर्ट के मुताबिक, machine learning (ML) सिस्टम को खबर के बारे में सही और गलत के बीच फर्क करने के लिए करीब 150 आर्टिकल्स की जरूरत पड़ेगी.

इस सिस्टम को तैयार करने के लिए MIT और Qatar Computing Research Institute (QCRI) ने मिलकर Media Bias/Fact Check (MBFC) से डाटा लिया है. MBFC एक ऐसी वेबसाइट है जिसमे कंप्यूटर नहीं बल्कि खुद इंसान दो हज़ार से ज्यादा वेबसाइटों पर पब्लिश फैक्ट की सच्चाई चेक करते हैं.

इस वेबसाइट से डाटा लेकर machine learing (ML) की algorithm- Support Vector Machine (SVM)- को दिया गया है. इस algorithm को इस तरीके से तैयार किया गया कि ये MBFC के दिए डाटा की मदद से गलत या फर्जी खबरें देने वाली वेबसाइटों का पता लगाएगा.

अभी तक की गई टेस्टिंग में इस सिस्टम को 65% तक सही देखा गया है. कुछ बार तो इस सिस्टम को 70% तक भी सही देखा गया. टीम ने कहा कि अक्सर झूठी ख़बरों में एकसमान भाषा का इस्तेमाल होता है. उदहारण के तौर पर देखे तो ऐसी खबरों में ऐसी भाषा का प्रयोग होता है जिसमे बातें बढ़ा-चढ़ा कर लिखी होती हैं. ये खबरें किसी एक तरफ ज्यादा झुकी हुई होती हैं और लोगों को भावुक करती हैं.

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