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खेल-खेल में बच्चों को विज्ञान समझाने की पहल

विज्ञान दिवस पर ऐसे कई लोगों को सम्मानित किया जाता है जो आम जन को विज्ञान से जोड़ते हैं

Navneet kumar Gupta Updated On: Mar 04, 2018 03:28 PM IST

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खेल-खेल में बच्चों को विज्ञान समझाने की पहल

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निरंतर विकास हो रहा है और नई तकनीकें भी बड़ी संख्या में विकसित हो रही हैं. इन तकनीकों के विकास से जुड़े बुनियादी वैज्ञानिक सिद्धांतों के समाज को परिचित कराना जरूरी होता है. इस उद्देश्य के साथ विज्ञान संचार के क्षेत्र में कार्यरत लोगों एवं संस्थाओं को प्रोत्साहन के लिए राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा प्रतिवर्ष विज्ञान संचार की विभिन्न विधाओं, जैसे- प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, नवप्रवर्तक प्रणालियों सहित छह क्षेत्रों में राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं.

बच्चों को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े मूलभूत सिद्धांतों से परिचित कराने और विज्ञान को बच्चों के बीच लोकप्रिय बनाने के उत्कृष्ट प्रयास के लिए इस वर्ष दो महिलाओं डॉ ज्योतिर्मई मोहंती एवं सुश्री सारिका घारू को पुरस्कार प्रदान किए गया है.

ओडिशा के जगतसिंहपुर की डॉ ज्योतिर्मई मोहंती ने विज्ञान लेखन के माध्यम से विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है, वहीं सारिका घारू ने विभिन्न प्रदर्शनों एवं प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान को बच्चों में लोकप्रिय बनाया है. ज्योतिर्मई मोहंती पिछले चार दशकों से विज्ञान से संबंधित कहानियां, कविताएं और नाटकों के माध्यम से बच्चों को विज्ञान की गूढ़ जानकारियों को रोचक तरीके से प्रस्तुत करती रही हैं.

विज्ञान को समझाने के लिए सारिका रोजमर्रा के विषयों को उठाती हैं. उन्होंने कृत्रिम बारिश से इंद्रधनुष बनाकर बच्चों को प्रकाश के वर्णक्रम के बारे में समझाया. उनके द्वारा वृक्षों की छाया के नीचे तापमान में कमी को मापने संबंधी प्रयोग बच्चों को वृक्षों के महत्व को समझाते हैं. चंद्रग्रहण और सुपर मून जैसी घटनाओं के दौरान सारिका खगोलीय जानकारियों को बच्चों से साझा करती हैं. वह कहती हैं कि बच्चों को खेल-खेल में विज्ञान से जोड़ा जाए तो जटिल विषय भी उनके लिए आसान बन जाता है. बच्चों को भी ऐसे प्रयोग खूब लुभाते हैं.

उनकी गतिविधियां समाज के विभिन्न वर्गों के लिए होती हैं. कभी-कभार विज्ञान गतिविधियों के आयोजन के दौरान अनेक महत्वपूर्ण जानकारीयां मिल जाती हैं. इसी तरह की एक घटना के दौरान सारिका ने देखा के चंद्रग्रहण के दौरान मध्यप्रदेश क्षेत्र के आदिवासियों की दैनिक दिनचर्या में कोई परिवर्तन नहीं आता है.

मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत सारिका घारू एक विज्ञान शिक्षिका हैं. इंडिया साइंस वायर को उन्होंने बताया कि “बचपन से ही उन्हें विज्ञान आकर्षित करता रहा है. विज्ञान की ओर उनका झुकाव एक विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी से अधिक हुआ, जिसमें उन्होंने भी विज्ञान के मॉडल बनाए थे. तब से लेकर वह विद्यालय स्तर पर विज्ञान संबंधी कार्यक्रमों में भाग लेती रही हैं. विज्ञान शिक्षक बनने के बाद उन्होंने विज्ञान न केवल अपनी कक्षा में पढ़ाया, बल्कि विद्यालय की चारदीवारी से बाहर जाकर भी उन्होंने मोहल्लों, गांवों के बच्चों को विभिन्न प्रयोगों के माध्यम से विज्ञान की जानकारियों से परिचित कराया.”

सारिका बताती हैं कि उन्हें सबसे अधिक आनंद आदिवासी क्षेत्र के बच्चों में विज्ञान के प्रति अभिरुचि जगाने में आता है. एक समर्पित विज्ञान संचारक के तौर पर कार्यरत सारिका अनेक प्राकृतिक एवं खगोलीय घटनाओं से जुड़े अंधविश्वासों के पीछे छिपे वैज्ञानिक तथ्यों को उजागर करती हैं. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विज्ञान संबंधी दिवसों के मौके पर वह खासतौर पर विज्ञान के सिद्धांतों से बच्चों को अवगत कराती हैं.

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सारिका अपने स्कूल के साथ-साथ जिला एवं राज्य मुख्यालय पर जाकर आम लोगों तथा बच्चों में वैज्ञानिक समझ के लिए अनेक गतिविधियां, जैसे- पोस्टर प्रदर्शनी, नाटक, वैज्ञानिक प्रयोग आदि आयोजित करती हैं. इन गतिविधियों की सबसे खास बात यह है कि इनमें बच्चे भी भाग लेते हैं. बच्चे भी विज्ञान गतिविधियों में भाग लेते हैं और उनका आनंद भी उठाते हैं. इन गतिविधियों में शामिल प्रशिक्षक भी अपने अनूठे प्रयोगों के जरिये विज्ञान को कुछ इस तरह खेल-खेल में समझाते हैं कि लोगों की रुचि उसमें जागृत होने लगती है.

इस प्रकार देश में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों के द्वारा बच्चों के साथ ही आम लोगों में भी वैज्ञानिक सोच को विकसित करने के प्रयास देश को विकास की राह में अग्रसर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. इन प्रयासों में वैज्ञानिकों सहित, विज्ञान संचारकों और विज्ञान के प्रति समर्पित व्यक्तियों का योगदान अहम है.

(इंडिया साइंस वायर)

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