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कल लॉन्च किया जाएगा भारत का सबसे वजनी सैटेलाइट GSAT-11, जानिए क्या है खासियत

करीब 5,854 किलोग्राम वजन का जीसैट-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा

Updated On: Dec 04, 2018 01:10 PM IST

FP Staff

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कल लॉन्च किया जाएगा भारत का सबसे वजनी सैटेलाइट GSAT-11, जानिए क्या है खासियत

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो बुधवार को अपने अब तक के सबसे वजनी सैटेलाइट का प्रक्षेपण करने के लिए बिल्कुल तैयार है. बुधवार यानी कल दक्षिणी अमेरिका के फ्रेंच गयाना के एरियानेस्पेस के एरियाने-5 रॉकेट से ‘सबसे अधिक वजनी’ उपग्रह जीसैट-11 को लॉन्च किया जाएगा. ये सैटेलाइट बुधवार की तड़के सुबह 2 से साढ़े तीन बजे के आसपास लॉन्च किया जाएगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि करीब 5,854 किलोग्राम वजन का जीसैट-11 देशभर में ब्रॉडबैंड सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा. यह इसरो का बनाया अब तक का ‘सबसे अधिक वजन’ वाला उपग्रह है.

जीसैट-11 अगली पीढ़ी का ‘हाई थ्रोपुट’ संचार उपग्रह है और इसका जीवनकाल 15 साल से अधिक का है. इसे पहले 25 मई को प्रक्षेपित किया जाना था लेकिन इसरो ने अतिरिक्त तकनीकी जांच का हवाला देते हुए इसके प्रक्षेपण का कार्यक्रम बदल दिया.

शुरुआत में उपग्रह भू-समतुल्यकालिक स्थानांतरण कक्षा में ले जाया जाएगा और उसके बाद उसे भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा. अगर ये सेटैलाइट सही सलामत अपनी कक्षा में स्थापित हो जाता है, तो ये देश के टेलीकॉम सेक्टर के लिए काफी अहम साबित होगा.

एरियाने-5 रॉकेट जीसैट-11 के साथ कोरिया एयरोस्पेस अनुसंधान संस्थान (केएआरआई) के लिए जियो-कोम्पसैट-2ए उपग्रह भी लेकर जाएगा. यह उपग्रह मौसम विज्ञान से संबंधित है.

पिछले सप्‍ताह इसरो ने पोलर सैटलाइट लॉन्च वीइकल (पीएसएलवी) सी-43 के जरिए अतंरिक्ष में बड़ी उड़ान भरी थी. पीएसएलवीसी-43 के जरिए 31 सैटलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था. पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) की इस साल में यह छठी उड़ान है. PSLV-C 43 पृथ्वी का निरीक्षण करने वाले भारतीय उपग्रह एचवाईएसआईएस और 30 अन्य सैटेलाइट को अपने साथ अंतरिक्ष में लेकर गया है. इनमें से 23 सैटेलाइट अमेरिका के हैं.

ये हैं खासियतें-

- ये इसरो का अभी तक का सबसे वजनी उपग्रह है. इसका वजन 5,854 किलोग्राम है.

-  इस सैटेलाइट को बनाने में लगभग 500 करोड़ की लागत आई है.

- इसकी आयु यानी कि जीवनकाल 15 साल से अधिक की है.

- इसका हर सोलर पैनल चार मीटर से बड़ा है. ये 11 किलोवाट की ऊर्जा का उत्पादन करेगा.

- उच्च क्षमता वाला यह थ्रोपुट संचार उपग्रह हर सेकंड 100 गीगाबाइट से ऊपर की ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी देगा. साथ ही हाई क्वालिटी टेलीकॉम और डीटीएच सेवाओं में भी अहम भूमिका निभाएगा.

- ये पहले से मौजूद इनसैट या जीसैट सैटेलाइट्स से ज्यादा स्पीड देगा.

बता दें कि इसी क्रम में अगले साल इसरो GSAT-20 भी लॉन्च करेगा.

(एजेंसी से इनपुट के साथ)

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