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गूगल डूडल: चाचा ने जीता नोबेल पुरस्कार तो चंद्रशेखर क्यों पीछे रहते

चंद्रशेखर ने अपने जीवन के दूसरे दशक में ही अपना पहला साइंटिफिक पेपर लिख दिया था

Updated On: Oct 19, 2017 03:25 PM IST

FP Staff

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गूगल डूडल: चाचा ने जीता नोबेल पुरस्कार तो चंद्रशेखर क्यों पीछे रहते

गुरुवार को गूगल डूडल ने एस. चंद्रशेखर का 107वां जन्मदिन मनाया. एस चंद्रशेखर भारत में जन्मे अमेरिकी एस्ट्रोफिजिसिस्ट थे जो अपने थ्योरी ऑफ वाइट ड्वार्फ्स के लिए जाने जाते थे.

उन्हें 'इवॉल्यूशन ऑफ़ स्टार्स' (सितारों का जन्म) पर अपने सिद्धांत के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनका जन्म 1910 में लाहौर में एक तमिल परिवार में हुआ था.

उन्हें 12 साल की आयु तक घर पर शिक्षक आ कर पढ़ाते थे. उन्होंने मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढाई की थी जिसके बाद आगे की शिक्षा के लिए वो कैंब्रिज चले गए. 1936 में वह वहां से अमेरिका चले गए.

चंद्रशेखर जिन्हें उनके करीबी 'चंद्र' कह कर बुलाते थे, ने अपने जीवन के दूसरे दशक में ही अपना पहला साइंटिफिक पेपर लिख दिया था. खास बात यह है कि उनके चाचा और महान वैज्ञानिक सी. वी. रमण ने भी भौतिकी के लिए 1930 में नोबेल पुरस्कार जीता था.

देर से मिली काम को पहचान

कैंब्रिज में रहने के दौरान ही उन्होंने ज्यादातर वैज्ञानिक खोज किए (जैसे कि चंद्रशेखर लिमिट) पर उन्हें इसका श्रेय देर से मिला क्योंकि उनके साथी उनकी खोजों को शंका की दृष्टि से देखते थे और उन्हें श्रेय नहीं देते थे.

1935 में एक अंग्रेज़ खगोलविद सर आर्थर एडिंगटन ने उन्हें रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी, लंदन में अपनी खोजों को प्रस्तुत करने के लिए बुलाया पर वहां उनकी खोजों को बेकार बताते हुए उन्हें अपमानित किया.

लेकिन इसके 31 साल बाद 1966 में उनके काम को मान्यता मिल गई. उनकी खोजों में जो चीज केंद्र में थी वह थी 'ब्लैक होल'. वह भी 1972 में ढूंढ लिया गया. शिकागो में 1995 में 85 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया.

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