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गूगल डूडल: शरणार्थियों को बसाने वाले नोबल प्राइज विनर फ्रित्जॉफ नानसेन

गूगल ने इस डूडल में फ्रित्जॉफ को आइस स्कीइंग करते हुए दिखाया है. साथ ही डूडल में किनारे नानसेन पासपोर्ट भी देखा जा सकता है.

Updated On: Oct 10, 2017 12:12 PM IST

FP Tech

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गूगल डूडल: शरणार्थियों को बसाने वाले नोबल प्राइज विनर फ्रित्जॉफ नानसेन

गूगल डूडल मंगलवार को फ्रित्जॉफ नानसेन का 156वां जन्मदिन मना रहा है. क्या आप जानते हैं फ्रित्जॉफ नानसेन कौन थे? फ्रित्जॉफ एक्सप्लोरिंग की दुनिया के लीजेंड थे. वो ग्रीनलैंड के बर्फीले इलाकों तक पहुंचे, जहां उसके पहले कोई नहीं पहुंच सका था.

गूगल ने इस डूडल में फ्रित्जॉफ को आइस स्कीइंग करते हुए दिखाया है. साथ ही डूडल में किनारे नानसेन पासपोर्ट भी देखा जा सकता है, जिसके लिए फ्रित्जॉफ को नोबल पुरस्कार दिया गया है.

फ्रित्जॉफ का जन्म नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में 10 अक्टूबर, 1861 में हुआ था. बचपन से ही वो रोमांच की तलाश में रहते थे. उन्होंने स्कीइंग करना शुरू किया. वो लगभग पचासों मील तक स्कीइंग करते थे. इस दौरान उनके पास ज्यादा सप्लाई भी नहीं होती थी.

उन्होंने रॉयल फ्रेडरिक यूनिवर्सिटी से जूलॉजी का अध्ययन किया. वो इस फील्ड में भी टॉप पर थे लेकिन बाहरी दुनिया के प्यार ने उन्हें फिर वापस अपनी ओर खींच लिया.

1888 में उन्होंने ग्रीनलैंड के बर्फीले इलाकों तक पहुंचने के लिए अपना सफर शुरू किया. इसके कुछ सालों बाद ही उन्होंने नॉर्थ पोल तक पहुंचने वाले पहले इंसान बनने की कोशिश की लेकिन उनकी ये कोशिश नाकाम रही. हालांकि, वो इस कोशिश में उत्तरी अक्षांश तक पहुंचने वाले पहले यात्री जरूर बने.

1914 में शुरू हुए पहले विश्वयुद्ध ने फ्रित्जहॉफ के पांव रोक लिए लेकिन इस वक्त ही उनके अंदर का मानवतावादी बाहर निकलकर आया. 1920 के दौरान उन्होंने इस वक्त हजारों कैदियों और शरणार्थियों को मुक्त कराने की दिशा में काम किया.

उन्होंने शरणार्थियों के लिए ट्रैवल डॉक्यूमेंट नानसेन पासपोर्ट बनाया. इस पासपोर्ट को दुनियाभर की 52 सरकारों ने अपनी मंजूरी दी और विस्थापित लोगों को दुबारा बसाने की प्रक्रिया शुरू हुई.

नानसेन को बेघरों और बेआवाजों को दुबारा बसाने के लिए 1922 में नोबल प्राइज दिया गया.

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