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99 देशों पर हुआ बड़ा साइबर अटैक, मांगी जा रही है फिरौती

दुनिया भर में एक बड़ा साइबर अटैक फैल रहा है.

FP Staff Updated On: May 17, 2017 08:59 AM IST

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99 देशों पर हुआ बड़ा साइबर अटैक, मांगी जा रही है फिरौती

दुनिया भर में एक बड़ा साइबर अटैक फैल रहा है और इसके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा विकसित किए गए सॉफ्टवेयर को जिम्मदार ठहराया जा रहा है, क्योंकि ये अटैक एनएसए के टूल्स की मदद से ही डेवलप किया गया है.

बीबीसी पर छपी खबर के मुताबिक, रैनसमवेयर सॉफ्टवेयर (ऐसा सॉफ्टवेयर डिजाइन जो कंप्यूटर एक्सेस को ब्लॉक कर देता है और तब तक नहीं खुलता जब तक इसके लिए पैसे नहीं जमा हो जाते) यूनाइटेड किंग्डम, अमेरिका, चीन, रूस, स्पेन, इटली को मिलाकर कुल 99 देशों में फैल गया है.

इन पर हुआ है इसका असर ब्रिटेन के अस्पतालों पर एक साथ साइबर अटैक हुए. इसके तहत अस्पतालों में नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) से जुड़े कंप्यूटरों को हैक कर लिया गया. इन कंप्यूटर्स को हैकर्स ने रैनसमवेयर के जरिए हैक किया. ब्रिटेन के नेशनल हेल्थ सर्विस को जिस रैनसमवेयर ने निशाना बनाया है उसका नाम WanaCrypt0r 2.0 है.

Cyber Hacker

बताया जा रहा है कि शुक्रवार दोपहर इन अस्पतालों के कंप्यूटर अचानक लॉक हो गए हैं. राजधानी लंदन, नॉर्थवेस्ट इंग्लैंड और देश के दूसरे हिस्सों में मौजूद अस्पतालों के कंप्यूटर हैक कर लिये गए हैं. इसकी वजह से देश की राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा पर असर पड़ा है. साइबर अटैक की आशंका को देखते हुए मरीजों से केवल इमरजेंसी की स्थिति में ही अस्पताल आने को कहा गया है.

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अस्पताल के कंप्यूटर लॉक हो गए हैं. कथित तौर पर जो भी कंप्यूटर साइबर अटैक के शिकार हुए हैं, उसे खोलने पर पॉप अप मैसेज आ रहा है जिसमें कहा जा रहा है कि फाइल डिलीट नहीं करने के लिए 300 डॉलर बिटक्वाइन चुकाने होंगे. पैसे देने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है.

कौन है इस हमले के पीछे

Hacking

एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये अटैक माइक्रो सॉफ्ट की कमजोरी का फायदा उठाने के लिए जा रहा है, जिसकी पहचान एनएसए ने की थी और उसे 'इटरनलब्लू' का नाम दिया था. वहीं कुछ साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स ने कहा है कि मैलवेयर असली है लेकिन पुरान है.

अप्रैल में 'द शैडो ब्रोकर्स' नाम के हैकर्स के एक ग्रुप ने एनएसए के टूल्स चुराने और उन्हे्ं ऑनलाइन जारी करने का दावा किया था. इस ग्रुप ने इन टूल्स को एक ऑनलाइन ऑक्शन में बेचने का प्रयास किया था. हालांकि ऐसा नहीं हुआ बल्कि इसकी बजाए 8 अप्रैल को इन्क्रिप्शन का पासवर्ड जारी कर टूल्स को फ्री में उपलब्ध करा दिया गया.

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