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अलविदा 2017 : बोपन्ना ने पहला ग्रैंडस्लैम अपने नाम किया और सानिया की नीचे खिसकने की हुई शुरुआत

युवाओं के जज्बे ने उम्मीदें कायम रखी, युकी भांबरी, रामकुमार रामनाथन और सुमित नागल ने इस साल सफलताएं अर्जित कीं

FP Staff Updated On: Dec 28, 2017 07:41 PM IST

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अलविदा 2017 : बोपन्ना ने पहला ग्रैंडस्लैम अपने नाम किया और सानिया की नीचे खिसकने की हुई शुरुआत

भारतीय टेनिस के लिए वर्ष 2017 मिला जुला रहा, जिसमें ना तो बुलंदियों के शिखर पर पहुंचे और ना ही नाकामी की गर्त में. भारत के युवा खिलाड़ियों ने  कुछ शीर्ष प्रतिद्वंद्वियों पर जीत दर्ज की, जबकि रोहन बोपन्ना ने पहला ग्रैंडस्लैम अपने नाम किया और सानिया मिर्जा के शीर्ष से नीचे की ओर खिसकने की शुरुआत हो गई.

युवाओं के जज्बे ने उम्मीदें कायम रखी. युकी भांबरी, रामकुमार रामनाथन और सुमित नागल ने इस साल सफलताएं अर्जित कीं. उन्हें अपनी क्षमता के सही इस्तेमाल और लगातार अच्छे प्रदर्शन के लिए देश में खेल के प्रशासकों से जिस समर्थन और हौसलाअफजाई की जरूरत है, वह उन्हें नहीं मिला.

बोपन्ना ने जीता फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स खिताब 

लिएंडर पेस और महेश भूपति की छत्रछाया में अक्सर दबे रहे रोहन बोपन्ना ने कनाडा की गैब्रियला डाबरोवस्की के साथ फ्रेंच ओपन मिक्स्ड डबल्स खिताब जीता. वह ग्रैंडस्लैम खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय हो गए और डबल्स रैंकिंग में लगातार शीर्ष 20 में रहे हैं. उन्होंने तीन एटीपी खिताब जीते जिनमें मोंटे कार्लो मास्टर्स शामिल था. दिविज शरण ने पूरव राजा से जोड़ी टूटने के बावजूद एटीपी यूरोपीय ओपन और चैलेंजर सर्किट पर दो खिताब जीते.

एक भी ग्रैंडस्लैम नहीं जीत सकीं सानिया

पिछले दो साल में शानदार प्रदर्शन करने वाली सानिया मिर्जा ने शीर्ष रैंकिंग गंवाई और शीर्ष दस में भी अब वह नहीं हैं. मार्टिना हिंगिस से अलग होने के बाद सानिया को सही जोड़ीदार नहीं मिल सका. शुआई पेंग के साथ वह अमेरिकी ओपन सेमीफाइनल तक पहुंचीं. इस साल आठ जोड़ीदार बदलने वाली सानिया एक भी ग्रैंडस्लैम नहीं जीत सकीं.

लगातार दो चैलेंजर खिताब जीते पेस ने

लिएंडर पेस ने इस साल लगातार दो चैलेंजर खिताब जीते. नए डेविस कप कप्तान महेश भूपति ने अप्रैल में उजबेकिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में हुए मुकाबले के लिए उन्हें टीम में शामिल नहीं किया. पेस को डेविस कप के इतिहास में सबसे ज्यादा डबल्स मैच जीतने वाला खिलाड़ी बनने के लिए एक जीत की जरूरत है. देखना यह है कि 2018 में वह निकोला पीट्रांजेली का रिकॉर्ड तोड़ पाते हैं या नहीं.

पूरे सत्र में सिर्फ दो चैलेंजर टूर्नामेंट

पूरे सत्र में भारत में सिर्फ दो चैलेंजर टूर्नामेंट पुणे और बेंगलुरु में खेले गए. युकी ने पुणे चैलेंजर जीता और नागल ने बेंगलुरु में जीत दर्ज की. इस नतीजे से दोनों की रैकिंग में काफी सुधार आया. पुणे में फाइनल देश के दो शीर्ष युवा खिलाड़ियों के बीच खेला गया जिसमें युकी ने रामकुमार को हराया. चोटों से प्रभावित रहे युकी ने इस साल की शुरुआत 500 से कम रैंकिंग अंकों के साथ की थी, लेकिन वह सिंगल्स रैंकिंग में 114वें स्थान पर पहुंचे. वही नागल 90 पायदान की छलांग लगाकर अब 223वें स्थान पर हैं

खिलाड़ियों की जरूरतों को लेकर एआईटीए मूक दर्शक

सवाल यह है कि अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) देश में कम से कम पांच चैलेंजर टूर्नामेंट भी क्यों नहीं करा पा रहा. भारत में पुरुषों के सिर्फ नौ आईटीएफ फ्यूचर्स टूर्नामेंट और महिलाओं के छह आईटीएफ टूर्नामेंट खेले गए. खिलाड़ियों की जरूरतों को लेकर एआईटीए मूक दर्शक बना रहा और धनराशि जुटाने के लिए खेल मंत्रालय में कुछ मुलाकातों के अलावा उसने कुछ नहीं किया. मंत्रालय ने यह कहकर उसकी मांग खारिज कर दी कि टेनिस की शीर्ष ईकाई होने के नाते टूर्नामेंटों की मेजबानी के लिए पैसा जुटाना एआईटीए की जिम्मेदारी है.

भारतीय युवाओं ने व्यवस्था से सहयोग नहीं मिलने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन किया. युकी भांबरी ने अमेरिका में एटीपी सिटी ओपन में दुनिया के 22वें नंबर के खिलाड़ी गाएल मोंफिल्स को हराया. वहीं रामकुमार ने दुनिया के आठवें नंबर के खिलाड़ी डोमिनिक थिएम को तुर्की में अंताल्या ओपन में मात दी.

एमएसएलटीए ने महिलाओं के छह टूर्नामेंटों का आयोजन किया 

भारत में टेनिस के लिए पैसा जुटाना कठिन है, लेकिन महाराष्ट्र राज्य लॉन टेनिस संघ (एमएसएलटीए) लगातार कारपोरेट और सरकारी सहयोग से इसका आयोजन कर रहा है. एमएसएलटीए ने महिलाओं के छह टूर्नामेंटों का आयोजन किया, जिनमें एक डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट शामिल था. इसके अलावा पुरुष चैलेंजर और फरवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ डेविस कप मुकाबला शामिल है.

 (एजेंसी इनपुट के साथ)

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