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माना खिलाड़ी भी होते हैं इंसान लेकिन गुस्से पर कंट्रोल भी तो आना चाहिए

वायरल हुई वीडियो के बाद अंबाती रायडू को मिल रहे हैं एंगर मैनेंजमेंट करने की राय

G. Rajaraman Updated On: Sep 03, 2017 04:50 PM IST

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माना खिलाड़ी भी होते हैं इंसान लेकिन गुस्से पर कंट्रोल भी तो आना चाहिए

मैदान पर क्रिकेटरों के बीच कहासुनी और गाली-गलौच के किस्से तो आपने कई सुने होंगे. दिल्ली में एक मैच के दौरान भारतीय क्रिकेटर मनोज प्रभाकर और मनिंदर सिंह के बीच हुई झड़प की चर्चा तो लंबे वक्त तक रही थी. हालांकि उनके इस झगड़े का कोई सचित्र प्रमाण कभी किसी को नहीं मिला. वहीं जमशेदपुर में दलीप ट्रॉफी के एक मैच के दौरान राशिद लतीफ और रमन लांबा के बीच हुई भिड़ंत को कौन भूल सकता है. लतीफ ने हाथ में स्टंप थामकर और लांबा ने बल्ला दिखाकर बीच मैदान में एक दूसरे को मारने की धमकी दी थी. दोनों के झगड़े की तस्वीर लोगों को अब भी याद है.

इसके अलावा पाकिस्तानी बल्लेबाज जावेद मियांदाद भी क्रिकेट के इतिहास में झगड़े की अपनी एक तस्वीर से खासे बदनाम हैं. इस तस्वीर में मियांदाद हाथ में बल्ला उठाए ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज डेनिस लिली को मारने की धमकी देते नजर आ रहे हैं. जबकि मैदान पर अपना आपा खोते इंजमाम-उल-हक का तो बाकायदा वीडियो मौजूद है, जिसमें वो विज्ञापन बोर्ड और दर्शक दीर्घा की बाढ़ फांदते हुए गैलरी में बैठे एक प्रशंसक को पीटते दिखाई दे रहे हैं. इंजमाम प्रशंसक द्वारा उन्हें "आलू" कहे जाने से भड़के हुए थे.

सोशल मीडिया पर रायडू की वीडियो हुई वायरल

मैदान पर किसी वजह से आग बबूला होने वाले क्रिकेटरों की ऐसी हरकतें अब आम बात हो गई हैं. लेकिन लगता है कि क्रिकेटरों का गुस्सा अब मैदान से निकलकर सड़कों पर भी आ गया है. ये बात कम से कम अंबाती रायडू पर तो फिट बैठती ही है.

इन दिनों जब जरा जरा सी घटनाओं पर सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिलती है, क्रिकेटर अंबाती रायडू के हैदराबाद में एक बुजुर्ग शख्स के साथ सड़क पर हुए झगड़े का वीडियो खासा चर्चित हो रहा है. ये वीडियो सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वीडियोज की लिस्ट में शामिल हो चुका है.

गायक मीका सिंह और अभिनेत्री राखी सावंत के कुख्यात प्रकरण का वीडियो महज चंद सेकंड का ही था, लेकिन लूप बनाकर उस वीडियो को इतना चलाया गया कि वो लोगों के जहन पर नक्श हो गया. रायडू के वीडियो की नियति भी ऐसी हो सकती है.

ट्विटर पर लोगों के गुस्से का शिकार हुए रायडू

ताजा विवाद और अपने बेलगाम गुस्से के लिए रायडू को लोगों की भारी नाराजगी झेलनी पड़ रही है. ज्यादातर लोग इस दुखद घटना के लिए रायडू को ही कसूरवार ठहरा रहे हैं. ऐसे लोगों की तादाद बहुत कम है जो रायडू को निर्दोष मानने को तैयार हों. लोगों की ऐसी प्रतिक्रियाएं एक क्रिकेटर की प्रतिष्ठा पर बहुत बुरा असर डाल सकती हैं. वैसे रायडू अपने गुस्से की वजह से पहले ही से बदनाम हैं, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि, इन सब के बावजूद, क्रिकेट अधिकारियों ने उन्हें अबतक एंगर मैनेजमेंट (गुस्से पर काबू पाना) का अभ्यास करने की सलाह क्यों नहीं दी है.

बेशक, इस विशिष्ट घटना में रायडू के रवैए पर फैसला करना आसान नहीं. क्योंकि ये कहना मुश्किल है कि अपनी मां के बारे में अपशब्द सुनकर कोई व्यक्ति कैसी प्रतिक्रिया देगा. वैसे अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि खराब भाषा और अपशब्दों का प्रयोग किसने किया. लेकिन अपनी गुस्सैल छवि के चलते रायडू सबकी नजरों में चढ़ गए और उनकी नाराजगी का निशाना बने. ये रायडू की खराब छवि का ही असर है कि बहुत से लोग चाहकर भी उनका बचाव नहीं कर पा रहे हैं. यही नहीं, एंगर मैनेजमेंट की काउंसलिंग के लिए न जाने पर रायडू की जमकर खिल्ली भी उड़ाई जा रही है.

रायडू के गुस्से ने पहले भी खड़े किए हैं विवाद

करीब एक दशक पहले,रायडू की  पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर शिवलाल यादव के बेटे एन अर्जुन यादव से तगड़ी तकरार हुई थी. दरअसल आंध्र प्रदेश और हैदराबाद के बीच अनंतपुर में खेले गए रणजी ट्रॉफी के एक मैच के दौरान रायडू ने हैदराबाद के कप्तान अर्जुन यादव को इतना उकसाया, कि उन्होंने एक स्टंप उखाड़ कर रायडू पर हमला बोल दिया था. उस वक्त रायडू आंध्र के उभरते हुए क्रिकेटर हुआ करते थे.

ये घटना रायडू के हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों के साथ मनमुटाव और फिर उनके आंध्र प्रदेश की टीम में स्थानांतरित होने के कुछ साल बाद घटी थी. इस सब कवायद से बतौर क्रिकेटर रायडू का जरा सा भी भला नहीं हुआ. लेकिन इन घटनाओं और इंडियन क्रिकेट लीग में शामिल होने के फैसले ने रायडू की छवि को एक ऐसे चुके हुए खिलाड़ी के रूप में पेश किया, जो अपनी नाकामी और निराशा को गुस्से के जरिए व्यक्त करता है.

कई लोगों को याद होगा कि, एक आईपीएल मैच के दौरान रायडू के खराब क्षेत्ररक्षण के चलते बाउंड्री निकल जाने से नाराज ऑफिस स्पिनर हरभजन सिंह उनपर कैसे गला फाड़कर चिल्लाए थे. जिसके बाद रायडू और हरभजन के बीच तीखी झड़प हुई थी. तब भी रायडू जरा सा भी झुकने को तैयार नहीं हुए थे.

ऐसा नहीं है कि रायडू को हमेशा विवादों में ही रहना पसंद है, उन्होंने अपने खेल से कई बार लोगों का दिल भी जीता है. कभी रायडू की गिनती देश के सबसे प्रतिभाशाली क्रिकेटरों में होती थी. जिस वक्त ग्रेग चैपल टीम इंडिया के कोच बनने की जुगत में लगे हुए थे, उस दौरान उन्होंने रायुडू की तारीफों के पुल बांध दिए थे और उन्हें भविष्य का खिलाड़ी बताया था. इस तरह कुछ मौकों पर रायडू ने अपने प्रशंसकों के सामने अपनी कुछ सकारात्मक छवियां भी पेश कीं.

गुस्से के लिए फुटबॉल खिलाड़ी रहें हैं सबसे ज्यादा बदनाम

मैदान पर और प्रशंसकों के साथ झगड़े के लिए फुटबॉल खिलाड़ी खासे बदनाम माने जाते हैं. मैनचेस्टर यूनाइटेड के एरिक कैंटोना ने 1995 में कथित नस्लवादी टिप्पणी सुनने के बाद एक बदतमीज फैन को लात मार दी थी. इस साल के शुरू में, ऑटोग्राफ देने से इनकार करने पर पॉल पोग्बा को मैनचेस्टर यूनाइटेड के कुछ फैन्स के जबरदस्त गुस्से का शिकार होना पड़ा था. 2006 के फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में जिनेदिन जिदान द्वारा मार्को मेटेराज्जी को मारी गई हेड किक को भला कौन भूल सकता है.

दरअसल, एथलीट्स भी हमारे-आपके तरह ही इंसान होते हैं. उनके अंदर भी हमारी तरह ही गुस्सा, गम, खुशी और खीज जैसी भावनाएं होती हैं. लेकिन किसी खास परिस्थिति में कोई एथलीट रायडू जैसा व्यवहार करता है, तो कोई अलग तरीके से. इस दौर में अब आधुनिक खिलाड़ियों से समाज के रोल मॉडल बनने की उम्मीद रखना बेमानी है. क्योंकि मैदान पर खिलाड़ियों के बीच गाली-गलौच अब आम बात हो चुकी है. फिर भी अगर कोई खिलाड़ी चाहता है कि उसका करियर लंबा और कामयाब हो, तो उसे अपने गुस्से और व्यवहार पर काबू रखना सीखना चाहिए. इस मामले में उस खिलाड़ी का क्लब और संघ, टीम के साथी खिलाड़ी और दोस्त खासी मदद कर सकते हैं.

लिवरपूल के स्ट्राइकर लुइस सुआरेज़ और चेल्सी के ब्रैनिस्लाव इवानोविच भी अपने गुस्से की वजह से खासे चर्चित रहे हैं. इसी वजह से प्रोफेशनल फुटबॉलर्स एसोसिएशन ने दोनों को एंगर मैनेजमेंट ट्रीटमेंट पेशकश की थी. सुआरेज़ ने तो सबके सामने ये स्वीकार किया था कि, उन्हें अपने गुस्से पर काबू पाने और व्यवहार में बदलाव लाने की सख्त जरूरत है. ऐसे में सवाल उठता है कि, क्या अंबाति रायडू को अपने उग्र स्वभाव का सही-सही अंदाजा है? और क्या वो अपने जुनून को समाज में स्वीकार किए जा सकने वाले तरीके से व्यक्त करने की जरूरत को समझते हैं?

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