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आखिर क्यों मनोचिकित्सक को टीम के साथ नहीं जोड़ना चाहते हॉकी कोच हरेंद्र

आखिरी वक्त में मैच गंवाने की की टीम की आदत के बाद हो रही है मनोचिकित्सक को लाने की बात

Updated On: Sep 08, 2018 10:23 AM IST

Bhasha

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आखिर क्यों मनोचिकित्सक को टीम के साथ नहीं जोड़ना चाहते हॉकी कोच हरेंद्र

भारतीय हॉकी टीम की आखिरी वक्त में गोल गंवाने की समस्या ने चिंतायें खड़ी कर दी हैं लेकिन मेंस टीम के कोच हरेंद्र सिंह ने मनोचिकित्सक रखने के विचार को खारिज करते हुए कहा है कि इस शब्द में ‘नकारात्मक झलक’ आती है.

मेंस टीम ने हाल में समाप्त हुए एशियन गेम्स में सेमीफाइनल में शूटआउट में मलेशिया से हारने के बाद कांस्य पदक अपने नाम किया. भारत ने कांस्य पदक के प्ले आफ में पाकिस्तान को हराया था.

इससे टीम गोल्ड मेडल से तो चूकी ही, साथ ही 2020 ओलिंपिक के लिये सीधे क्वालीफाइ करने का मौका भी गंवा बैठी.

यह पूछने पर कि टीम को दबाव भरे हालात से निपटने के लिये पेशेवर मदद की जरूरत है तो हरेंद्र ने इससे इनकार किया. उन्होंने पूछा, ‘आपको मनोचिकित्सक की जरूरत क्यों है.’

उन्होंने टीम की जर्सी लांच करने के मौके पर कहा, ‘अगर आत्मविश्वास हासिल करना ही लक्ष्य है तो आप एक सामान्य व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं और उससे प्रेरणा ले सकते हैं. मनोचिकित्सक शब्द में नकारात्मक झलक आती है और खिलाड़ियों को लगता है कि वे कुछ चीज गलत कर रहे हैं जिसके लिये उन्हें मनोचिकित्सक की जरूरत है.’

उन्होंने कहा, ‘मुझे वो शब्द नहीं पता. किसी भी टीम में सबसे बड़ा मनोचिकित्सक कोच होता है और आप खुद होते हैं. अगर मैं खुद को प्रेरित नहीं करूंगा तो कोई भी शब्द मुझे प्रेरित नहीं कर सकते.’

हरेंद्र ने कहा कि कोच का काम यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों की भावनात्मक जरूरतें समझीं जाए और उनका निवारण किया जाए.

उन्होंने कहा, ‘मनोचिकित्सक के पास जाने और उससे मदद लेने के बजाय इन चीजों पर ध्यान दिया जाये क्योंकि उसे टीम और खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं है, और यह भी नहीं पता कि खिलाड़ी किस तरह बर्ताव करते हैं.’

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