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खेलों के शौकीन हैं तो कैसे स्वागत नहीं करेंगे 2018 का... बहुत कुछ है इस साल

दुनिया के सबसे मकबूल खेल फुटबॉल से लेकर एशियाड, विश्व कप हॉकी और भारतीय क्रिकेट की बेहद अहम सीरीज इस साल देखने को मिलेंगी

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi Updated On: Jan 01, 2018 12:34 PM IST

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खेलों के शौकीन हैं तो कैसे स्वागत नहीं करेंगे 2018 का... बहुत कुछ है इस साल

एक बार फिर आवाज आएगी ब्राजील...ब्राजील... एक बार फिर बहस छिड़ेगी कि मेसी या रोनाल्डो... फिर एक बार जर्मनी का किसी सर्जन की तरह खेलना नजर आएगा. दुनिया के सबसे मकबूल खेल का वर्ल्ड कप होगा, तो सारी दुनिया जुटेगी. सारी दुनिया इसके रोमांचक लम्हों को सांसें थामकर देखेगी. नजरें थम जाएंगी. रूस गूगल पर सबसे ज्यादा सर्च करने वाला देश बन जाएगा.

2018 कुछ ऐसा ही होगा. यह साल फुटबॉल की जादूगरी दिखाएगा. हर दो साल पर दो बड़े इवेंट सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं. एक बार फुटबॉल वर्ल्ड कप, तो  उसके दो साल बाद समर ओलिंपिक्स. अभी तोक्यो ओलिंपिक दो साल दूर हैं. अभी बारी फुटबॉल वर्ल्ड कप की है, जो 14 जून से खेला जाना है. पिछली चैंपियन जर्मनी के लिए एक बार फिर खुद को साबित करने का मौका है. वो अब भी वर्ल्ड नंबर वन है. अपने मुल्क में मिली शर्मिंदगी के बाद ब्राजील का ‘मोस्ट ब्यूटीफुल गेम’ रूस में नजर आएगा या नहीं, यह सवाल 2018 में फुटबॉल प्रेमियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में रहेगा.

Soccer Football - Chile v Germany - FIFA Confederations Cup Russia 2017 - Final - Saint Petersburg Stadium, St. Petersburg, Russia - July 2, 2017 Germany celebrate with the trophy after winning the FIFA Confederations Cup REUTERS/Grigory Dukor TPX IMAGES OF THE DAY - RTS19I9O

फुटबॉल वर्ल्ड कप भले ही भारत के लिहाज से मतलब न रखता हो, लेकिन हमारे मुल्क में भी इसकी खुमारी होगी. हर बार की तरह. अच्छी बात यही होगी कि रात-रात भर जागने की जरूरत नहीं पड़ेगी. रूस का समय हमसे पीछे है. यानी वहां देर रात होने वाला मैच भी हमारे यहां शाम के वक्त देखा जाएगा. ऐसे में रातें तो जागते हुए नहीं कटेंगी. लेकिन शाम के मैचों के लिए ऑफिस से छुट्टी मांगने वालों की तादाद जरूर बढ़ेगी.

क्रिकेट में इस साल भारत के लिए चुनौतियां ही चुनौतियां

भारत के लिहाज से क्रिकेट हमेशा सबसे ऊपर होता है. भले ही इस साल वर्ल्ड कप नहीं होना हो. लेकिन यह साल विराट एंड कंपनी के लिए बेहद अहम है. पिछले कुछ समय से लगातार टीम अपने घर में खेल रही थी. अब दक्षिण अफ्रीका दौरे के साथ हालात बदलेंगे. साल के साथ अंदाज बदलेगा. पिच बदलेंगी. एसजी की जगह कुकाबुरा गेंद होगी. माहौल बदलेगा. ऐसे में नतीजे क्या होते हैं, इस पर निगाहें होंगी. सिर्फ दक्षिण अफ्रीका ही क्यों, उस इंग्लैंड भी जाना है, जहां विराट कोहली को दिक्कतें होती रही हैं. हालांकि तबसे अब तक विराट की जिंदगी, उनका खेल सब बदल गया है. लेकिन इंग्लैंड के खिलाफ इंग्लैंड में खेलना हमेशा खेल का रोमांच बढ़ाता है. यह साल दरअसल, विराट की महानता पर स्टैंप लगाने का काम करेगा. चाहे वो बल्लेबाज के तौर पर हो या कप्तान के तौर पर.

एशियाड और कॉमनवेल्थ में पिछली बार से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद

चार साल मे होने वाले खेलों का भी ये साल है. एशियाड होंगे जकार्ता में और कॉमनवेल्थ खेल होंगे ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में. भले ही कॉमनवेल्थ खेलों के साथ अंग्रेजों की गुलामी का ठप्पा लगा हो, लेकिन खेलों के लिहाज से ये अहम होते ही हैं. भारत ने भी आठ साल पहले मेजबानी की थी. वही कॉमनवेल्थ खेलों में हमारा श्रेष्ठतम प्रदर्शन था. उससे ऊपर जाएंगे या नहीं, यह सवाल बना रहेगा. संदेह भी बना रहेगा, क्योंकि 101 पदक जीतना फिलहाल मुमकिन नहीं दिख रहा. लेकिन इसके बाद यानी 2014 में जीते 15 गोल्ड सहित 64 पदकों को पार करना जरूर टारगेट पर होगा.

एशियाड ज्यादा अहम हैं. यहां भी भारत का प्रदर्शन 2010 के मुकाबले 2014 में गिरा था. वजह यही थी कि कॉमनवेल्थ खेलों की तैयारियों के मद्देनजर खेलों पर खास ध्यान दिया गया. उसी समय एशियाड हुए, तो भारत ने 14 गोल्ड सहित 65 पदक जीत लिए. लेकिन उसके बाद तैयारियों का वही स्तर नहीं बरकरार रह सका, जिससे चार साल बाद गोल्ड आठ रह गए और कुल पदक 57.

Bhubaneshwar :Sudha Singh of India reacts after winning the Gold in the 3000m steeplechase during the 22nd Asian Athletic Championships at the Kalina Stadium in Backbencher on Saturday. PIT Photo by Shirish Shete(PTI7_8_2017_000160B)

रियो में शूटिंग से मिली निराशा के बाद क्या फिर यह खेल भारत को सबसे ज्यादा पदक दिलाएंगा, ये सवाल है. एशियाड और कॉमनवेल्थ खेल इसी की तस्दीक करेंगे. राह से भटक गई कुश्ती के लिए कॉमनवेल्थ और एशियाड से सही राह पकड़ने का मौका है. खासतौर पर सुशील कुमार पर निगाहें होंगी, जो कई साल बाद वापसी कर रहे हैं. वापसी के साथ ही विवाद भी उनसे जुड़ ही गए हैं.

क्या 42 साल का इंतजार भुवनेश्वर में खत्म होगा

ग्रैंड स्लैम से लेकर बैडमिंटन सुपर सीरीज और शूटिंग विश्व कप जैसे रुटीन खेल तो होते ही रहेंगे. लेकिन इस बीच हॉकी वर्ल्ड कप होगा, जो इस बार भारत में ही होना है. 42 साल हो गए, जब भारत ने मलेशिया की धरती पर पहली और अब तक आखिरी बार वर्ल्ड कप जीता था. यहां तक कि कोई भी पदक जीते हुए भी इतने ही साल हो गए हैं, क्योंकि भारत पोडियम तक पहुंचने में भी नाकाम रहा है. इस बार अपनी सरजमीं है. टूर्नामेंट भुवनेश्वर में होना है. अपने लोग हैं. विश्व रैंकिंग छठी है. ऐसे में पोडियम फिनिश भारतीय हॉकी को ऐसी एनर्जी दे सकती है, जिसकी तलाश यह खेल काफी समय से कर रहा है. महिलाओं को भी वर्ल्ड कप खेलना है. लेकिन उनसे पदक नहीं, बेहतर प्रदर्शन की ही उम्मीद होगी.

india hockey 2

साल की शुरुआत अगर क्रिकेट में भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे से होनी है, तो अंत विश्व कप हॉकी के साथ होगा, जो दिसंबर के तीसरे सप्ताह में खत्म होगा. यानी 2018 बहुत कुछ लेकर आएगा. बहुत सी उम्मीदें, बहुत सी कामयाबियां.. जाहिर है, कहीं नाकामी भी होगी, कहीं उम्मीदें टूटेंगी भी. उम्मीद करें कि नाकामियों की तादाद कामयाबियों से काफी कम हों.

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