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स्टार गोलकीपर सविता पूनिया नौ साल से कर रही हैं नौकरी का इंतजार

फाइनल में निर्णायक पेनल्टी रोककर 13 साल बाद भारत की खिताबी जीत में निभाई थी अहम भूमिका

Updated On: Nov 07, 2017 04:44 PM IST

Bhasha

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स्टार गोलकीपर सविता पूनिया नौ साल से कर रही हैं नौकरी का इंतजार

महिला हॉकी टीम की गोलकीपर सविता पूनिया एशिया कप फाइनल में चीन के खिलाफ निर्णायक पेनल्टी रोककर 13 साल बाद भारत की खिताबी जीत की सूत्रधार बनी थीं. सविता नौ साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में तमाम उपलब्धियों के बावजूद अभी तक नौकरी नहीं पा सकी हैं. भारतीय महिला हॉकी टीम में 2008 में पदार्पण करने वाली सविता ने जापान के काकामिगहरा में ही अपने करियर का 150वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. अपने दिवंगत दादाजी महिंदर सिंह की इच्छा पूरी करने के लिए हॉकी में करियर बनाने वाली सविता ने मैदान पर तो कामयाबी की बुलंदियों को छुआ, लेकिन निजी जीवन में अभी तक अपने लिए रोजगार नहीं जुटा सकी हैं.

जापान से लौटने के बाद हरियाणा के सिरसा की इस गोलकीपर ने कहा, 'मैं 27 बरस की होने वाली हूं और पिछले नौ साल से नौकरी मिलने का इंतजार कर रही हूं. हरियाणा सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ ’ योजना के तहत मुझे उम्मीद बंधी थी. लेकिन वहां से सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे हैं.' एशिया कप 2013 में भी मलेशिया के खिलाफ कांस्य पदक के मुकाबले में दो अहम पेनल्टी बचाकर भारत को पदक दिलाने वाली सविता के पिता फार्मासिस्ट हैं और अपने खर्च के लिए वह उन्हीं की कमाई पर निर्भर हैं.

माता-पिता से लेना पड़ता है पैसा

उन्होंने कहा, ' मैं नौ साल से हॉकी खेल रही हूं और आज भी अपने खर्च के लिए माता-पिता से पैसा लेना पड़ता है, जबकि इस उम्र में मुझे उनकी देखभाल करनी चाहिए. हर समय दिमाग में यह टेंशन रहती है कि मेरे पास नौकरी नहीं है. मैं अपने प्रदर्शन पर उसका असर नहीं पड़ने देती, लेकिन हर जीत पर उम्मीद बंधती है और फिर टूट जाती है. यह सिलसिला सालों से चल रहा है.'

फिर से बंधी है उम्मीद

रियो ओलंपिक के बाद उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) में भी हॉकी कोचिंग के लिए आवेदन किया था, लेकिन वहां से भी जवाब का इंतजार है. अब एशिया कप में जीत के बाद सविता को फिर उम्मीद बंधी है कि खुद ओलंपिक पदक विजेता रहे खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ उनकी परिस्थिति को समझेंगे और उन्हें जल्द ही कोई नौकरी मिलेगी. उन्होंने कहा, 'यह बहुत बड़ी जीत है और रियो ओलंपिक क्वालीफिकेशन के बाद यह मेरे करियर का सबसे बड़ा पल है. हमारे खेलमंत्री खुद ओलंपिक पदक विजेता रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि वह मेरी स्थिति समझेंगे और मुझे जल्दी ही कोई नौकरी मिलेगी.'

महिला हॉकी में बढ़ेगी लड़कियों की दिलचस्पी

सविता ने यह भी कहा कि इस जीत से महिला हॉकी में लड़कियों का पूल बढ़ेगा. उन्होंने अपने प्रदर्शन का श्रेय गोलकीपिंग कोच और भारत के पूर्व गोलकीपर भरत छेत्री तथा मुख्य कोच हरेंद्र सिंह को देते हुए कहा, ' भारत में महिला हॉकी की लोकप्रियता में एशिया कप की जीत से इजाफा होगा और मुझे यकीन है कि और लड़कियां मैदान में आएंगी. हमने अपने दम पर विश्व कप के लिए क्वालीफाई किया है और आने वाले समय में इस प्रदर्शन को दोहराएंगे.'

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