S M L

अलविदा 2016: हॉकी के आखिरी जादूगर की विदाई

2016 में हॉकी के जादूगर मोहम्मद शाहिद का निधन हुआ

Updated On: Dec 30, 2016 08:42 PM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

0
अलविदा 2016: हॉकी के आखिरी जादूगर की विदाई

20 जुलाई की सुबह थी वो. सुबह चाय और अखबार का वक्त. एक फोन बजा, पूछने के लिए कि क्या शाहिद नहीं रहे? दिल और दिमाग सुन्न था. सैफ को फोन लगाया. मोहम्मद शाहिद के बेटे सैफ. उधर से आवाज आई – मैं नासिर बोल रहा हूं. सैफ फॉर्म साइन कर रहा है. समझ नहीं आ रहा था कि क्या सवाल किया जाए. सामने वाले ने दुविधा समझ ली थी. आवाज आई – जी, चले गए वो.

हॉकी का आखिरी जादूगर चला गया था. भारत को पिछला ओलिंपिक गोल्ड दिलाने वाला चला गया था. मोहम्मद शाहिद चले गए थे. शाहिद क्या हैं, इसे महज उनके रिकॉर्ड से नहीं समझा जा सकता.

इससे नहीं समझा जा सकता कि उन्होंने 20 साल की उम्र में ओलिंपिक गोल्ड जीत लिया था. इससे भी नहीं कि चैम्पियन्स ट्रॉफी और एशियाड के पदक जीते. इसलिए भी नहीं कि अर्जुन अवॉर्ड और पद्मश्री पाए. हमें वो शाहिद याद रहेंगे, जिन्होंने जिसने पूरी पीढ़ी को मंत्रमुग्ध किया. जब हॉकी में ड्रिब्लिंग की बात होती है, तो शाहिद याद आएंगे. जब रफ्तार की, डॉज की, खेल में जादूगरी की बात होगी, तो शाहिद याद आएंगे. जब जिंदादिली की बात होगी, तो शाहिद याद आएंगे. जब बनारस की बात होगी, तो शाहिद याद आएंगे.

बनारस से निकला छरहरा, घुंघराले बालों वाला वह लड़का पूरी दुनिया के लिए खौफ था. पाकिस्तान के महान खिलाड़ी हसन सरदार ने एक बार मैच हारने के बाद कहा था – हम हिंदुस्तान से नहीं हारे, शाहिद से हारे हैं.

मोहम्मद शाहिद से उस दौर के ज्यादातर हॉकी प्रेमियों की पहचान रेडियो के दौर की थी. रेडियो पर आवाज आती थी – शाहिद.. शाहिद........ शाहिद... और गोल........ वह दौर आज से अलग था. देश-विदेश के हर हॉकी मैच की कमेंटरी रेडियो पर होती थी. लखनऊ और गोरखपुर जैसे शहरों में हो रहे घरेलू टूर्नामेंट की भी. शाहिद उस दौर के हीरो थे.

करीब 11 साल पहले शाहिद अपने साथी खिलाड़ी विवेक सिंह के लिए हुए चैरिटी मैच में खेले थे. दिल्ली के शिवाजी स्टेडियम में मैच हुआ था. उस समय का एक किस्सा नहीं भूला जा सकता. एक शख्स स्टेडियम के बाहर घेरा तोड़कर टर्फ की ओर जाना चाहता है. लोग उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं. दो-तीन लोग उसके पास पहुंचे, तो उसने लगभग हाथ जोड़ लिए. उसके साथ छोटा-सा बच्चा था.

उसने कहा, 'प्लीज़, मुझे अंदर जाने दीजिए... मैं हिमाचल से कल रात की ट्रेन पकड़कर आया हूं. आज ही पहुंचा हूं. मैं अपने बच्चे को दिखाना चाहता हूं कि मोहम्मद शाहिद कौन हैं, कैसे दिखते हैं.' उन सज्जन ने शाहिद को अपने बच्चे से मिलवाया. शाहिद ने सिर पर हाथ रखा और गर्मजोशी से कहा था, 'यही प्यार तो हमको ज़िन्दा रखता है.'

हॉकी इंडिया ने कुछ साल पहले एक समारोह में सभी ओलिंपिक मेडलिस्ट को सम्मानित किया था. शाहिद भी आए थे. अपने गोल्ड मेडल के साथ. उनसे होटल में मुलाकात हुई. उन्होंने मेडल गले में पहनकर फोटो खिंचाया... हाथ आगे बढ़ाए, 'जानते हो, लोग मैच के बाद आते थे. इन हाथों को चूमते थे. कहते थे कि इसमें भगवान और अल्लाह हैं. उनका ही दिया हुआ हुनर था कि दुनिया का कोई भी फारवर्ड (फॉरवर्ड नहीं) या डिफेंडर मेरा दिन होने पर मुझसे बाल (बॉल नहीं) नहीं छीन पाता था.'

13726554_534800903371749_4892548074049012399_n

वह हमेशा हाकी कहते थे, हॉकी नहीं. बताते भी थे कि हॉकी तो अंग्रेज कहते हैं. बनारसियों के लिए तो यह हाकी है. लेकिन इस हॉकी ने उन्हें तकलीफ भी दी. उनकी बेटी के दिल में छेद था. दिल्ली में इलाज हुआ, लेकिन वह बच नहीं सकी. वह दौर था, जब शाहिद खेल रहे थे. वह टूट गए. खुद को दोषी मानते थे कि हॉकी की वजह से वह बच्ची पर उतना ध्यान नहीं दे पाए, जितना देना चाहिए था. टूट वह तब भी गए थे, जब अपने आखिरी ओलिंपिक मैच में उन्हें ज्यादातर समय खिलाया ही नहीं गया. वहीं उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला किया था.

जिंदगी के ये दो लम्हे थे, जिन्होंने शाहिद को तोड़ दिया. उनकी जिंदगी ने अनुशासन मानने से जैसे इनकार कर दिया. वह अनुशासनहीनता ही उन्हें भारी पड़ी. वरना 56 साल की उम्र दुनिया छोड़ने के लिए नहीं होती.

जिन शाहिद को हवाई यात्रा से डर लगता था, उन्हें एयर एम्बुलेंस से दिल्ली लाया. जिन शाहिद को फाइव स्टार कल्चर से नफरत थी, उन्हें पांच सितारा अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. जिन शाहिद ने बनारस ने छोड़ना पड़े, इसलिए तमाम ऑफर ठुकरा दिए. उन्होंने जब दुनिया छोड़ी, तो बनारस में नहीं थे.

उन्हें बात करते हुए पार्टनर कहने की आदत थी. हमेशा फोन करने पर कहते थे, ‘पार्टनर, बनारस कब आ रहे हो. आओ बढ़िया जलेबी और पान खिलाऊंगा.’  अस्पताल में मिलने वालों से कहते थे, ‘घबराते क्यों हो. इस बीमारी को भी डाज (डॉज) मार देंगे.’ लेकिन पूरी दुनिया को अपने डॉज से खौफजदा करने वाले मोहम्मद शाहिद इस बार मौत को डॉज नहीं दे सके. 2016 ने आवाज, वो गर्माहट, वो प्यार छीन लिया. हॉकी उस जादूगर को छीन लिया, जिसका नाम मोहम्मद शाहिद था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi