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सीनियर नेशनल बैडमिंटन : सिंधु को हरा सायना तीसरी बार बनीं चैंपियन

श्रीकांत को शिकस्त देकर प्रणॉय ने पुरुष सिंगल्स खिताब अपने नाम किया

Bhasha Updated On: Nov 08, 2017 10:03 PM IST

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सीनियर नेशनल बैडमिंटन :  सिंधु को हरा सायना तीसरी बार बनीं चैंपियन

सायना नेहवाल ने बुधवार को अपने अनुभव का फायदा उठाते हुए पीवी सिंधु को सीधे गेम में पराजित कर नागपुर में खेली जा रही सीनियर बैडमिंटन नेशनल चैंपियनशिप का महिला सिंगल्स खिताब अपने नाम किया. दुनिया की पूर्व नंबर एक सायना ने 54 मिनट तक चले मुकाबले में सिंधु को पस्त किया. 27 वर्षीय सायना ने रोमांचक फाइनल में ओलिंपिक और विश्व चैंपियनशिप रजत पदकधारी सिंधु पर 21-17, 27-25 से जीत दर्ज की.

वहीं, एक अन्य रोमांचक फाइनल में एचएस प्रणॉय ने दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी और खिताब के प्रबल दावेदार किदांबी श्रीकांत को हराकर पुरुष सिंगल्स खिताब अपने नाम किया. दूसरे वरीय प्रणॉय ने पिछले हफ्ते विश्व रैंकिंग में अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ स्थान हासिल किया था. उन्होंने शीर्ष वरीय श्रीकांत को 49 मिनट तक चले मुकाबले में 21-15, 16-21, 21-7 से शिकस्त दी. वह पिछले महीने फ्रेंच ओपन सुपर सीरीज में इस हमवतन खिलाड़ी से सेमीफाइनल में हार गए थे.

अश्विनी पोनप्पा के लिए दोहरी खुशी रही, जिन्होंने सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी के साथ मिलकर मिक्स्ड डबल और एन सिक्की रेड्डी के साथ मिलकर महिला डबल खिताब जीते. छह महीने पहले ही जोड़ी बनाने का फैसला करने वाले सात्विक और अश्विनी ने शीर्ष वरीय और दुनिया की 16वें नंबर के प्रणव जैरी चोपड़ा और सिक्की को 21-9, 20-22, 21-17 से हराकर मिक्स्ड डबल्स खिताब पर कब्जा किया. इसके बाद उन्होंने सिक्की के साथ मिलकर संयोगिता घोरपड़े और प्राजक्ता सावंत की जोड़ी को 21-14, 21-14 से हराकर महिला डबल्स खिताब अपने नाम किया.

दूसरे वरीय मनु अत्री और बी सुमित रेड्डी ने एक गेम से पिछड़ने के बाद वापसी करते हुए शीर्ष वरीय सात्विक और चिराग शेट्टी को 15-21, 22-20, 25-23 से हराकर पुरुष डबल्स खिताब अपने नाम किया.

श्रीकांत और प्रणॉय के फाइनल्स में पहुंचने से रोमांच चरम पर पहुंच गया था और मैच सभी के लिए रोमांचक साबित हुआ, क्योंकि दोनों ने खूबसूरत खेल दिखाकर मैच के दौरान तेज रैलियां पेश कीं. श्रीकांत और प्रणॉय अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में चार बार एक दूसरे के खिलाफ खेल चुके हैं, लेकिन पिछले तीन मौकों पर श्रीकांत जीत दर्ज करने में सफल रहे थे. प्रणॉय ने सिर्फ एक बार 2011 टाटा ओपन में ही श्रीकांत को हराया था.

श्रीकांत अपने करियर की शानदार फॉर्म में हैं. उन्होंने इस सत्र में पांच फाइनल्स में प्रवेश कर चार खिताब अपनी झोली में डाले. लेकिन नागपुर में परिणाम आंकड़ों के अनुरूप नहीं रहा जिससे प्रणॉय ने दिखा दिया कि इस सत्र में ली चोंग वेई और चेन लोंग पर मिली जीत कोई तुक्का नहीं थी.

सायना और सिंधु के इस टूर्नामेंट में हिस्सा लेने की पुष्टि करने के बाद से ही इन दोनों स्टार खिलाड़ियों के बीच फाइनल की उम्मीद की जा रही थी. सायना ने 2006 और 2007 में लगातार दो खिताब जीतने के बाद से सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप में हिस्सा नहीं लिया था, जबकि सिंधु भी 2011 और 2013 में खिताब जीतने के बाद से इस टूर्नामेंट में नहीं खेली थीं.

सायना और सिंधू जब एक दूसरे के आमने-सामने थीं, तो खेल का रोमांच अपने चरम पर था. पूरा स्टेडियम ‘सायना, सिंधु और इंडिया’ की चीयर्स से गूंज रहा था, क्योंकि दोनों खिलाड़ियों ने कुछ रोमांचक रैलियां खेलीं. सायना ने जीत के बाद कहा, ‘मैं जैसा खेली, उससे मैं हैरान हूं. मैंने कोर्ट पर अच्छी तरह मूव करते हुए सिंधु के मुश्किल शॉट को अच्छी तरह वापस भेजा.'

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