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राज्यसभा में 'बारहवें खिलाड़ी' के तौर पर ही नजर आए सचिन तेंदुलकर

तेंदुलकर की राज्यसभा सदस्य के तौर पर पारी खत्म हो गई, वह भी बिना बोले

Sachin Shankar Updated On: Mar 29, 2018 08:53 AM IST

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राज्यसभा में 'बारहवें खिलाड़ी' के तौर पर ही नजर आए सचिन तेंदुलकर

सचिन तेंदुलकर के नाम क्रिकेट के ढेरों रिकॉर्ड दर्ज हैं. वह दुनिया में जहां भी खेलने गए अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवा कर लौटे. लेकिन एक जगह ऐसी भी है, जहां क्रिकेट के भगवान 'बारहवें खिलाड़ी' के तौर पर दिखाई दिए. 'भारत रत्न' सचिन तेंदुलकर की राज्यसभा सदस्य के तौर पर पारी बुधवार को खत्म हो गई, वह भी बिना बोले. यानी दुनिया भर के गेंदबाजों को पानी पिलाने वाले मास्टर ब्लास्टर ने लोक सभा के ऊपरी सदन ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं बनाया जिसके लिए उन्हें याद किया जाए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा के सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को उनके आगे के जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सदन में हंगामे के कारण वे तीन तलाक पर रोक विधेयक जैसे ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण फैसलों पर निर्णय की प्रक्रिया में हिस्सा लेने से वंचित रह गए. उच्च सदन ने अपने सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को विदाई दी. मोदी ने इस दौरान क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का भी नाम लिया. इस तरह सचिन की राज्यसभा में छह साल की पारी खत्म हो गई. हालांकि वह सदन में एक बार भी नहीं बोले.

बहुत खराब रही उपस्थिति

राज्यसभा में सचिन की उपस्थिति भी बहुत खराब थी. एक वेबसाइट पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार पहले साल सचिन की उपस्थिति मात्र एक फीसद थी, जबकि बाकी सदस्यों के मामले में ये औसत 77 फीसद था. सचिन ने 2012 के शीतकालीन सत्र में एक बार भी उपस्थिति पंजिका में हस्ताक्षर नहीं किए. बाद के सालों में स्थिति थोड़ी बेहतर हुई, लेकिन उसे भी अच्छा नहीं कहा जा सकता. उपस्थिति के इतने खराब रिकॉर्ड के बाद ये कतई आश्चर्यजनक नहीं लगना चाहिए कि उन्होंने सदन में किसी बहस में हिस्सा क्यों नहीं लिया या कोई सवाल क्यों नहीं पूछा.

क्रिकेट करियर के कारण यहां हूं

छह साल पहले सचिन ने राज्यसभा का सदस्य बनने के साथ एक रिकॉर्ड कायम किया था. वह सांसद बनने वाले पहले सक्रिय खिलाड़ी थे. राज्यसभा में अपनी नई पारी की शुरुआत करने वाले स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने हालांकि उसी समय कहा था कि उनका पूरा ध्यान फिलहाल क्रिकेट पर होगा. हालांकि उन्होंने संकेत दिया था कि खेल से विदाई के बाद वह संसद पर ध्यान केंद्रित करेंगे. इस चिंता पर कि वह संसद के लिए ज्यादा वक्त नहीं निकाल नहीं पाएंगे, सचिन ने कहा था कि देखिए, मैं एक मनोनीत सदस्य हूं. मैं किसी से यह कहने नहीं गया था कि राज्यसभा का सदस्य बनना चाहता हूं. यह एक सम्मान है, जिसे मैंने पूरी शिद्दत से स्वीकार किया है परंतु मैं अपने क्रिकेट करियर के कारण यहां हूं.

एक बार बोलने के लिए खड़े हुए थे सचिन, लेकिन...

काफी समय से इस चर्चा के बीच कि सचिन तेंदुलकर संसद में बहुत कम उपस्थित रहते हैं और उन्होंने कभी संसद में कोई सवाल भी सामने नहीं रखा. वह पिछले साल दिसंबर में राज्यसभा में बोलने जा रहे थे, लेकिन ये मुमकिन नहीं हो पाया. उनका भाषण निर्धारित था, लेकिन संसद में हंगामे के कारण उन्हें बोलने का मौका नहीं मिला. गुजरात चुनाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मनमोहन सिंह पर दी गई प्रतिक्रिया पर कांग्रेस लगातार संसद में हंगामा कर रही थी. राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने कहा था, 'उन्होंने (सचिन तेंदुलकर) देश के लिए विश्व मंच पर कितना नाम कमाया है. ये शर्मनाक है कि उनको बोलने नहीं दिया गया, जबकि सब जानते थे कि उनका बोलना कार्यक्रम में शामिल था. क्या सिर्फ राजनेताओं को बोलने की इजाजत है?'

सचिन का राज्यसभा में रिकॉर्ड तो निराशाजनक रहा, लेकिन उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए हैं जिन्हें तोड़ना किसी भी क्रिकेटर के लिए आसान नहीं होगा

 

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