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प्रजनेश गुणेश्वरन बने भारत के नंबर एक खिलाड़ी, आसान नहीं रही यहां तक की राह

वह युकी भांबरी (128) और रामकुमार रामनाथन (130) दोनों को पीछे छोड़कर भारत के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी बन गए

Updated On: Nov 19, 2018 07:23 PM IST

FP Staff

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प्रजनेश गुणेश्वरन बने भारत के नंबर एक खिलाड़ी, आसान नहीं रही यहां तक की राह

घुटने की चोट के कारण एक समय उनका करियर रसातल में चला गया था, लेकिन प्रजनेश गुणेश्वरन सोमवार को भारत के नंबर एक सिंगल्स खिलाड़ी बन गए. अब वह देखना चाहते हैं कि उनके लिए भविष्य के गर्त में क्या छिपा है. ऐसा खिलाड़ी जो 2007 की राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान चर्चा में था और जो अच्छी तरह से सीनियर स्तर की तरफ कदम बढ़ा रहा था, लेकिन तभी घुटने की चोट के कारण वह परिदृश्य से ही बाहर चले गए.

वह 2010 से 2012 तक केवल छह टूर्नामेंट में खेल पाए. जब उन्होंने 2013 में कुछ टूर्नामेंट में हिस्सा लिया तो उन्हें लगा कि बुरा वक्त अब बीत चुका है. लेकिन फिर से चोटिल होने के कारण वह 2014 में कोर्ट से बाहर रहे. इसके बाद 2015 में उन्होंने आखिरी बार भाग्य आजमाने की सोची. रीयल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े उनके पिता एसजी प्रभाकरण ने उन्हें टेनिस नहीं छोड़ने के लिए मनाया.

आज वह युकी भांबरी (128) और रामकुमार रामनाथन (130) दोनों को पीछे छोड़कर भारत के नंबर एक टेनिस खिलाड़ी बन गए. वह सिंगल्स में 110वें नंबर पर हैं. जब कोई टूर्नामेंट नहीं चल रहा होगा प्रजनेश तब जर्मनी में अपने कोच बास्टिन सुआनप्रतीप के साथ अभ्यास करेंगे.

प्रजनेश ने कहा, ‘यह सच है कि मैं अचानक ही यहां पहुंचा. निश्चित तौर पर यह रातों रात नहीं हुआ. मैंने इसके लिए काफी मेहनत की. मेरा लक्ष्य शीर्ष 100 में जगह बनाने से भी ऊंचे हैं. मैं आज जहां पर हूं मेरी क्षमता उससे भी आगे बढ़ने की है. यह निश्चित तौर पर मेरे लिए सर्वश्रेष्ठ सत्र रहा और मैं इस अनुभव का उपयोग रैंकिंग में आगे बढ़ने के लिए करूंगा. मुझे उच्चस्तर पर खेलने के लिए और बेहतर बनने की जरूरत है.’

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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