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क्रिकेट से राजनीति में आने वाले कुछ ही चमक बिखेर पाते हैं

इमरान खान ने तो खुद पार्टी का गठन किया है. लेकिन ज्यादातर क्रिकेटरों की लोकप्रियता को भुनाने के लिए पार्टियां राजनीति में लाती रही हैं. इनमें से कुछ क्रिकेट की तरह ही चमक बिखेरने में सफल हो जाते हैं. वहीं कुछ का भाग्य साथ नहीं देता है

Updated On: Jul 26, 2018 05:33 PM IST

Manoj Chaturvedi

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क्रिकेट से राजनीति में आने वाले कुछ ही चमक बिखेर पाते हैं

पाकिस्तान को इकलौता विश्व कप जिताने वाले कप्तान इमरान खान आजकल सुर्खियां बटोर रहे हैं. पाकिस्तान के आम चुनावों में इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ ने सबसे ज्यादा सीटें जीती हैं. वह देश के प्रधानमंत्री बन पाएंगे या नहीं यह आने वाला समय ही बता पाएगा. इमरान खान ने तो खुद पार्टी का गठन किया है. लेकिन ज्यादातर क्रिकेटरों की लोकप्रियता को भुनाने के लिए पार्टियां राजनीति में लाती रही हैं. इनमें से कुछ क्रिकेट की तरह ही यहां भी चमक बिखेरने में सफल हो जाते हैं. वहीं कुछ का भाग्य साथ नहीं देता है और वह राजनीति में प्रवेश करते ही मुरझा जाते हैं. आपको क्रिकेटर से राजनीतिज्ञ बनने वाले दुनियाभर में मिल जाएंगे.

राजनीति में झंडा फहराने वाले

क्रिकेटरों की लोकप्रियता को भुनाने के प्रयास सालों से किए जाते रहे हैं. लेकिन राजनीति में झंडे कुछ ही क्रिकेटर फहरा सके हैं. इनमें चेतन चौहान, नवजोत सिंह सिद्धू और कीर्ति आजाद के नाम लिए जा सकते हैं. चेतन चौहान को क्रिकेट में सुनील गावस्कर के साथ बड़ी साझेदारियां बनाने के लिए जाना जाता है. चेतन चौहान भाजपा में शामिल होने के बाद दो बार अमरोहा से लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. पिछले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में जीतने के बाद उन्हें योगी सरकार में खेल मंत्री बना दिया गया. वह आजकल डीडीसीए को छोड़कर देश के सबसे बड़े प्रदेश में खेल स्तर सुधारने के प्रयासों में जुटे हुए हैं. चेतन चौहान की तरह ही नवजोत सिंह सिद्धू और कीर्ति आजाद के राजनैतिक करियर को सफल माना जा सकता है. दिलचस्प बात यह है कि इन तीनों ने ही अपनी राजनैतिक पारी की शुरुआत भाजपा के साथ की.

Former Indian cricketer and former member of parliament Navjot Singh Sidhu (C) walks from his car to address the media outside his residence in New Delhi on July 25, 2016. Sidhu's resignation as a Bharatiya Janata Party (BJP) MP has kickstarted speculation he is moving to the Aam Aadmi Party (AAP), which is rising in popularity in Punjab ahead of general elections. / AFP PHOTO / MONEY SHARMA

नवजोत एक उम्दा ओपनर रहे हैं. लेकिन उन्होंने क्रिकेटर के बजाय कमेंटेटर के तौर पर ज्यादा सुर्खियां बटोरी हैं. कॉमेडी कार्यक्रमों से जुड़कर तो वह बहुत लोकप्रिय शख्सियत बन गए. भाजपा ने पहली बार 2004 में अमृतसर से उन्हें लोकसभा चुनाव लड़वाया और इसमें जीतने के कुछ समय बाद ही उन्हें हत्या के आरोप में संसद सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ा. पर सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल जाने पर वह 2007 में अमृतसर से फिर लोकसभा सदस्य बने. नवजोत 2009 में तीसरी बार सांसद चुने गए. लेकिन 2014 में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर उनके और पार्टी के संबंधों में खटास आने से वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए और आजकल पंजाब में कैप्टन अमरिंदर की सरकार में मंत्री हैं. कीर्ति आजाद के पिता भगवत झा आजाद बिहार के मुख्यमंत्री रहे थे, इसलिए कीर्ति में राजनीति के गुण जन्मजात आना लाजिमी है, लेकिन 1983 में क्रिकेट विश्व कप जीतने वाली टीम में शामिल रहे कीर्ति दरभंगा से 2014 में तीसरी बार सांसद बनने पर भी मंत्री पद तक नहीं पहुंच सके. इसकी वजह शायद उनका मुखर होना हो सकती है.

अजहर का भी चला जादू

मोहम्मद अजहरुद्दीन को भारत के सफलतम क्रिकेट कप्तानों में गिना जाता है. वह कलाई का उपयोग करने वाले शानदार बल्लेबाज तो थे ही, उनकी फील्डिंग का भी कोई जवाब नहीं था. 1999-2000 के सत्र में मैच फिक्सिंग स्कैंडल में फंस जाने पर उनके ऊपर आजीवन प्रतिबंध लगाया गया. इसके नौ  साल बाद यानी 2009 में उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया और वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए. कांग्रेस ने उन्हें मुरादाबाद से चुनाव लड़ाया और वह चुनाव जीतने में सफल हो गए. वह 2014 में चुनाव नहीं जीत सके. लेकिन नवगठित तेलंगाना राज्य की कांग्रेस पार्टी ने उनसे 2019 में राज्य से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया है. यह प्रस्ताव अमल में आने पर अजहर एक बार फिर संसद में नजर आ सकते हैं.

Former Indian cricketer and Congress candidate Mohammad Azharuddin (2L) and his wife, former Miss India and actress, Sangeeta Bijlani (L) are pictured prior to Azharuddin filing his nomination in the upcoming elections in Moradabad on April 21, 2009. India is holding its 15th parliamentary general elections in five phases on April 23, April 30, May 7 and May 13 and the new parliament will be constituted before June 2. AFP PHOTO/ STR / AFP PHOTO / STR

सभी क्रिकेट की तरह सुर्खियां नहीं बटोर पाते

ऐसा नहीं है कि सभी क्रिकेटरों के राजनीति में आने पर सफल होना गारंटी हो. अब आप पूर्व भारतीय कप्तान मंसूर अली खां पटौदी को ही लें. आज भी भारतीय क्रिकेट कप्तानों पर चर्चा चलती है तो टाइगर पटौदी के नाम से मशहूर मंसूर अली खां पटौदी का नाम सबसे पहले आता है. लेकिन वह एक सफल क्रिकेटर रहने के बाद हरियाणा विशाल पार्टी के टिकट पर गुड़गांव से चुनाव लड़े और हार गए. टाइगर पटौदी ने 1991 में भोपाल से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर एक बार संसद में आने का असफल प्रयास किया. इसी तरह सचिन तेंदुलकर के जोड़ीदार के तौर पर मशहूर रहे विनेद कांबली ने 2009 में मुंबई से चुनाव लड़ा पर हार की वजह से राजनीतिक करियर को आगे नहीं बढ़ा सके. इसी तरह मनोज प्रभाकर ने नई दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा पर वह भी अपने करियर को पंख नहीं लगा सके.

वॉरेल और हॉल भी आए राजनीति में

क्रिकेट जगत में कुछ नाम बहुत सम्मान के साथ लिए जाते हैं, उनमें सर फ्रेंक रेल का नाम भी शामिल है. वह दाएं हाथ के स्टाइलिश बल्लेबाज होने के साथ बाएं हाथ से उम्दा मध्यम तेज गेंदबाजी भी किया करते थे. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्हें एक सत्र के लिए जमैका सीनेट के लिए मनोनीत किया गया. वहीं वेस्ली हॉल को दुनिया के सबसे खतरनाक पेस गेंदबाजों में शुमार किया जाता रहा है. वह बारबाडोस सीनेट में रहने के बाद हाउस ऑफ एसेंबली के लिए भी चुने गए. हॉल को 1987 में  बारबाडोस का पर्यटन मंत्री भी बनाया गया.

रणतुंगा और जयसूरिया राजनीति में भी सफल

इनके अलावा श्रीलंका को विश्व कप जिताने वाले कप्तान अर्जुन रणतुंगा और उनके विस्फोटक बल्लेबाज सनत जयसूरिया को राजनीति में करियर को आगे तक ले जाने का गौरव हासिल है. रणतुंगा श्रीलंका की सक्रिय राजनीति में शामिल हैं. वह पीपुल्स एलायंस के लिए संसद सदस्य रहने के साथ पर्यटन उपमंत्री भी रह चुके हैं. वह 2015 में नेशनल यूनाईटेड पार्टी में शामिल हो गए. वह इस पार्टी की मौजूदा सरकार में बंदरगाह और जहाजरानी मंत्री हैं. वहीं सनत जयसूरिया 2011 में संन्यास लेने से पहले ही राजनीति में शामिल हो गए थे. वह 2010 में सांसद चुने जाने पर वह महिंदा राजपक्षे की अगुआई वाली यूनाईटेड फ्रीडम एलायंस सरकार में पोस्टल सर्विस में उपमंत्री रह चुके हैं.

 

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